Antibiotic Resistance: एंटीबायोटिक के गलत इस्तेमाल से बढ़ रहा एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस। AIIMS दिल्ली कर रहा है सुपरबग से लड़ने की अगुवाई, जानिए पूरी रिपोर्ट।
Antibiotic Resistance: एंटीबायोटिक दवाओं के अंधाधुंध उपयोग के कारण बैक्टीरिया रजिस्टेंस की समस्या अब दुनियाभर में एक बड़ा खतरा बन उभरी है। विशेष रूप से भारत में जहां इनका सबसे ज्यादा उपयोग होता है। हाल में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी इसे खतरे के तौर पर चिन्हित किया था। इन एंटीमाइक्रोबियल रजिस्टेंस से पैदा हुए सुपरबग से लडऩे के लिए एम्स दिल्ली ने राष्ट्रीय स्तर पर कमान संभाली है। एम्स दिल्ली के माइक्रोबायोलॉजी विभाग के प्रमुख डॉ.बिमल दास के अनुसार संस्थान में संक्रामक रोगों से संबंधित रिसर्च एवं डायग्रोस्टिक लैब सेंटर इसकी अगुवाई कर रहा है।
नोडल सेंटर के रूप में यह एंटीमाइक्रोबियल रजिस्टेंस सर्विलांस नेटवर्क से भी समन्वय बना रहा है। इसके जरिए हमारा लक्ष्य जल्द संक्रमण की पहचान, उस पर केन्द्रित उपचार और अस्पतालों में संक्रमण नियंत्रण पर काम करना है। इसके लिए संस्थान में करीब 15 शोध परियोजनाओं पर काम चल रहा है। जिससे रजिस्टेंस के पैटर्न को समझा जा सके। उसका डायग्रोसिस बेहतर हो और एंटीबायोटिक दवाओं के तार्किक उपयोग को बढ़ावा दिया जा सके।
ये भी पढ़ें
भारत एंटीबायोटिक दवाओं का विश्व में सबसे बड़ा उपभोक्ता है। एंटीबाायोटिक दवाओं की ओवर द काउंटर बिक्री बेहद सामान्य बात है। आंकड़ों के अनुसार भारत में 2019 में एंटीमाइक्रोबियल रजिस्टेंस के कारण करीब 2.97 लाख मौतें हुईं। वहीं दुनिया भर में 2050 तक इससे 1 करोड़ लोगों की मौत होने की संभावना है।
एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस (एएमआर) तब होता है, जब बैक्टीरिया में एंटीबायोटिक दवाओं के लिए प्रतिरोधक क्षमता विकसित हो जाती है। एम्स के डॉक्टरों के अनुसार अब ऐसे मरीज भी सामने आ रहे हैं, जिन्हें कभी अस्पताल में भर्ती नहीं किया गया, फिर भी उन पर आम एंटीबायोटिक दवाओं का असर नहीं हो रहा है।
एम्स दिल्ली के माइक्रोबायोलॉजी डिपार्टमेंट के प्रोफेसर डॉ. हितेंदर गौतम के अनुसार बिना एएमआर के बढने की सबसे बड़ी वजह एंटीबायोटिक दवाओं का अंधाधुंध प्रयोग है। डॉक्टर्स इसका कम ही पता लगा पाते हैं संक्रमण का कारक कौन सा पैथोजिन है। इसमें सबसे जानलेवा प्रभाव सेप्सिस का होता है। अगर इसका जल्द पता नहीं चले तो यह आर्गन फेल होने या मृत्यु का खतरा रहता है। इसके लिए माइक्रोबायोलॉजी डिपार्टमेंट की टीम ब्लड स्ट्रीम में बैक्टीरिया के साइट स्पेसिफिक बायोमार्कर पहचान में लगी है। जिसके कारण सेप्सिस बढ़ सकता है। इसका अगर जल्द पता लग जाए तो हम बता सकते हैं कि कौन सी एंटीबायोटिक की जरूरत है।