स्वास्थ्य

सिर्फ 22 साल की उम्र में लड़की के हार्ट की तीनों नसें हुईं ब्लॉक! जानिए Heart Blockage का संकेत

Heart Blockage: मुंबई में 22 साल की लड़की के हार्ट की तीनों आर्टरीज ब्लॉक हो गईं। डॉक्टर्स ने किया बायपास ऑपरेशन। जानें रेयर जेनेटिक बीमारी फैमिलियल हाइपरकोलेस्ट्रोलेमिया के लक्षण और बचाव के उपाय।
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Oct 06, 2025
Heart Blockage
Heart Blockage (photo- gemini ai)

Heart Blockage: दिल की बीमारियां आमतौर पर 40 की उम्र के बाद ज्यादा देखने को मिलती हैं। लेकिन हाल ही में मुंबई के खार इलाके से एक ऐसा मामला सामने आया जिसने डॉक्टर्स को भी हैरान कर दिया। यहां एक 22 साल की लड़की को अचानक सीने में असहनीय दर्द हुआ और जब उसकी जांच हुई तो पता चला कि उसके हार्ट की तीनों मुख्य कोरोनरी आर्टरीज में गंभीर ब्लॉकेज है। आमतौर पर इतनी कम उम्र में ऐसा होना बहुत दुर्लभ है। हालत इतनी गंभीर थी कि डॉक्टर्स को तुरंत उसका कोरोनरी आर्टरी बायपास सर्जरी करनी पड़ी। इस वजह से वह देश की सबसे कम उम्र की बायपास सर्जरी कराने वाली मरीज बन गई।

बचपन से थे लक्षण, लेकिन पहचान नहीं हुई

TOI की रिपोर्ट के मुताबिक, डॉक्टर्स के अनुसार लड़की को बचपन से ही एक दुर्लभ जेनेटिक बीमारी फैमिलियल हाइपरकोलेस्ट्रोलेमिया (Familial Hypercholesterolemia) थी। यह बीमारी जन्म से ही खून में बैड कोलेस्ट्रॉल का स्तर बहुत ज्यादा बढ़ा देती है। इसकी वजह से बहुत कम उम्र में ही धमनियां ब्लॉक होने लगती हैं। लड़की के परिवार ने बताया कि 7 साल की उम्र से ही उसकी स्किन, जॉइंट्स और आंखों के पास पीले रंग की गांठ जैसी चीजें दिखने लगी थीं। परिवार ने इसे स्किन की साधारण समस्या समझा। यहां तक कि 10वीं क्लास में उसकी एक गांठ को ऑपरेशन से हटा भी दिया गया, लेकिन तब डॉक्टर्स ने इसकी गंभीरता पर ध्यान नहीं दिया। यही लापरवाही आगे चलकर उसकी हालत को और बिगाड़ती चली गई।

सर्जरी से पहले की चुनौतियां

जांच में सामने आया कि लड़की की तीनों आर्टरीज ब्लॉक हो चुकी थीं। उसकी उम्र और लिंग को देखते हुए यह केस बेहद रेयर था, क्योंकि प्रीमेनोपॉजल महिलाओं को एस्ट्रोजन हार्मोन स्वाभाविक रूप से हार्ट डिजीज से सुरक्षा देता है। हालत इतनी बिगड़ चुकी थी कि एंजियोप्लास्टी करना संभव नहीं था, इसलिए डॉक्टर्स ने बायपास सर्जरी का फैसला लिया।

परिवार के अन्य सदस्य भी खतरे में

यह भी सामने आया कि उसकी 21 साल की बहन और 8 साल के भाई में भी यही शुरुआती लक्षण पाए गए हैं। इसका मतलब है कि यह बीमारी फैमिली में जेनेटिक रूप से फैली हुई है। इसलिए परिवार के बाकी सदस्यों की भी समय रहते जांच करना जरूरी है।

जागरूकता की जरूरत

2022 में किए गए एक सर्वे के मुताबिक मुंबई के 79 जनरल फिजिशियंस में से सिर्फ 31% ही इस बीमारी को सही से पहचान पाए। अधिकांश को यह भी जानकारी नहीं थी कि किसी मरीज को यह हो सकती है। हालांकि इस बीमारी का कोई स्थायी इलाज नहीं है, लेकिन सही खानपान, दवाओं और नियमित जांच के जरिए इसे कंट्रोल किया जा सकता है। यह मामला साफ संकेत देता है कि न सिर्फ आम लोगों, बल्कि डॉक्टरों को भी फैमिलियल हाइपरकोलेस्ट्रोलेमिया जैसी जेनेटिक बीमारियों के बारे में जागरूक होना चाहिए, ताकि समय रहते लक्षणों की पहचान कर मरीज की जान बचाई जा सके।

Updated on:
06 Oct 2025 05:47 pm
Published on:
06 Oct 2025 05:47 pm