Bladder Pain Syndrome: अगर ब्लैडर भरने पर दर्द बढ़ता है और बार-बार पेशाब की जरूरत महसूस होती है तो यह Bladder Pain Syndrome का संकेत हो सकता है। जानिए इसके लक्षण, कारण और इलाज।
Bladder Pain Syndrome: अगर आपको ऐसा दर्द होता है जो ब्लैडर (मूत्राशय) भरने पर बढ़ जाता है और पेशाब करने के बाद थोड़ा कम हो जाता है, तो इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए। यह ब्लैडर पेन सिंड्रोम (BPS) नाम की समस्या का संकेत हो सकता है। यह एक लंबे समय तक रहने वाली बीमारी है जिसमें ब्लैडर बहुत ज्यादा संवेदनशील हो जाता है।
आम तौर पर लोग इसे यूरिन इंफेक्शन (UTI) समझ लेते हैं, लेकिन इसमें अक्सर टेस्ट में कोई बैक्टीरिया नहीं मिलता। माना जाता है कि इसमें ब्लैडर की अंदरूनी परत कमजोर हो जाती है, जिससे नसों में जलन और सूजन होने लगती है और दर्द बार-बार महसूस होता है।
ब्लैडर पेन सिंड्रोम के कुछ खास लक्षण होते हैं, जिन पर ध्यान देना जरूरी है।
ब्लैडर भरने पर बढ़ता दर्द- इस बीमारी में ब्लैडर जैसे-जैसे भरता है, वैसे-वैसे पेट के निचले हिस्से में दबाव या दर्द बढ़ने लगता है। पेशाब करने के बाद थोड़ी राहत मिलती है, लेकिन कुछ ही समय में फिर वही परेशानी शुरू हो जाती है।
बार-बार पेशाब की जरूरत- इस समस्या में व्यक्ति को बार-बार पेशाब जाने की इच्छा होती है। कई मामलों में लोगों को दिन में 30-40 बार तक पेशाब जाना पड़ सकता है। कई बार 20-30 मिनट के अंदर ही दोबारा बाथरूम जाने की जरूरत महसूस होती है, भले ही पेशाब बहुत कम आए।
रात में बार-बार उठना- इस बीमारी से पीड़ित लोग रात में भी कई बार उठते हैं। कुछ लोगों को 3 से 8 बार तक बाथरूम जाना पड़ सकता है, जिससे नींद पूरी नहीं होती और दिनभर थकान और चिड़चिड़ापन महसूस होता है।
टेस्ट में इंफेक्शन नहीं मिलता- कई बार मरीज को दर्द और जलन तो होती है, लेकिन जांच में कोई बैक्टीरिया नहीं मिलता। इसलिए एंटीबायोटिक दवाएं भी असर नहीं करतीं। यही बात इसे सामान्य यूरिन इंफेक्शन से अलग बनाती है।
दबाव या संबंध के समय दर्द- लंबे समय तक बैठने या शारीरिक संबंध के दौरान भी दर्द बढ़ सकता है। इसका कारण ब्लैडर और पेल्विक नसों की संवेदनशीलता होती है।
इस बीमारी का इलाज संभव है और कई तरीके अपनाकर लक्षणों को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। शुरुआत में डॉक्टर ऐसी दवाएं देते हैं जो ब्लैडर की अंदरूनी परत को मजबूत करने और नसों की जलन कम करने में मदद करती हैं। अगर दवाओं से राहत नहीं मिलती तो ब्लैडर इंस्टिलेशन नाम की प्रक्रिया की जाती है। इसमें कैथेटर के जरिए दवा सीधे ब्लैडर में डाली जाती है, जिससे दर्द कम करने में मदद मिलती है।
डॉक्टरों के अनुसार कुछ चीजें इस बीमारी को बढ़ा सकती हैं। इसलिए कॉफी, शराब, सोडा, टमाटर और बहुत मसालेदार भोजन से बचने की सलाह दी जाती है, क्योंकि ये मूत्र को ज्यादा तेज बना देते हैं और ब्लैडर में जलन बढ़ा सकते हैं।
इस समस्या को संभालने का एक अच्छा तरीका है ब्लैडर डायरी बनाना। इसमें दिनभर में पेशाब का समय और दर्द का स्तर लिखें। इससे पता चल जाता है कि कौन-सी चीजें परेशानी बढ़ा रही हैं। डॉक्टरों का कहना है कि सही इलाज, खान-पान में बदलाव और नियमित निगरानी से ज्यादातर लोग इस समस्या को अच्छी तरह मैनेज कर सकते हैं।