Blood Pressure Treatment: हाई ब्लड प्रेशर से भी खतरनाक है 'रेसिस्टेंट हाइपरटेंशन'। जब मरीज तीन या उससे अधिक दवाएं लेने के बावजूद अपने ब्लड प्रेशर को नियंत्रित नहीं कर पाता। यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन (UCL) के हालिया शोध में एक नई दवा बैक्सड्रोस्टेट (Baxdrostat) के चौंकाने वाले परिणाम सामने आए हैं। आईये जानते है इसके बारे की इसके क्या फायदे है?
Blood Pressure Treatment: WHO रिपोर्ट के अनुसार, भारत में 30-79 वर्ष की आयु के 30% से अधिक लोग इस बीमारी से जूझ रहे हैं। हाई ब्लड प्रेशर को साइलेंट किलर कहा जाता है, लेकिन क्या आप जानते है इससे भी खतरनाक है 'रेसिस्टेंट हाइपरटेंशन'। इसमें होता ये है कि जब मरीज तीन या उससे अधिक दवाएं लेने के बाद भी अपने ब्लड प्रेशर को नियंत्रित नहीं कर पाता। यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन (UCL) के हालिया शोध में एक नई दवा 'बैक्सड्रोस्टेट' (Baxdrostat) के तीसरे चरण के परिणामों ने एक आशा की किरण दी है।
ज्यादातर मरीज शिकायत करते हैं कि वे नियम से दवा ले रहे हैं, फिर भी बीपी कम नहीं हो रहा। शोध में देखा गया कि इसके पीछे 'एल्डोस्टेरोन' (Aldosterone) नामक हार्मोन की बड़ी भूमिका है। यह हार्मोन शरीर में नमक और पानी को रोकता है, जिससे नसों पर दबाव बढ़ता है। पुरानी दवाएं इस हार्मोन को पूरी तरह नियंत्रित नहीं कर पाती थीं, जिससे बीपी Resistant हो जाता था।
यह नई दवा सीधे उस हार्मोन पर हमला करती है। 800 मरीजों पर किए गए क्लिनिकल ट्रायल में देखा गया कि 12 हफ्तों के भीतर मरीजों के सिस्टोलिक ब्लड प्रेशर में 10 mmHg तक की गिरावट आई। 40% मरीजों का बीपी सामान्य हो गया। जिन मरीजों को बाकि दवाइयों से आराम नहीं मिला उन सभी मरीजों के लिए असरदार ज्यादा रही।
सबसे बड़ा फायदा उन मरीजों को होगा जिनका बीपी 3-4 अलग-अलग तरह की दवाइयां लेने के बाद भी कम नहीं होता। शोध के अनुसार, यह दवा एल्डोस्टेरोन (Aldosterone) हार्मोन को रोकती है। जब नमक कम रुकेगा, तो नसों का दबाव कम हो जाएगा। इस नई दवा से बीपी नियंत्रित होने पर मरीजों को किडनी फेलियर, हार्ट अटैक, ब्रेन स्ट्रोक के खतरों से भी सुरक्षा होगी।
यह दवा अभी क्लिनिकल ट्रायल के तीसरे चरण को सफलतापूर्वक पार कर चुकी है। जल्द ही नियामक मंजूरी (Regulatory Approval) के बाद यह बाजार में उपलब्ध हो सकती है। तब तक अपनी वर्तमान दवाओं को बिना डॉक्टर की सलाह के न बदलें।
डिसक्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह किसी क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प नहीं है। इसलिए पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।