स्वास्थ्य

दिमाग का वो कोना जो चुपके से बढ़ा रहा है आपका BP! वैज्ञानिकों ने खोजी इस बीमारी को जड़ से खत्म करने की चाबी

Blood Pressure: नई स्टडी में खुलासा हुआ है कि दिमाग का लैटरल पैराफेशियल रीजन सांस के साथ-साथ ब्लड प्रेशर भी कंट्रोल करता है। यह खोज हाई बीपी (BP) के इलाज में मददगार हो सकती है।
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Jan 14, 2026
Blood Pressure Brain Study
Blood Pressure Brain Study (photo- gemini ai)

Blood Pressure Brain Study: हाई ब्लड प्रेशर (BP) एक आम बीमारी है। हाल ही में सामने आई एक नई रिसर्च में यह चौंकाने वाली बात सामने आई है कि दिमाग का एक हिस्सा, जो अब तक सिर्फ सांस लेने को कंट्रोल करने के लिए जाना जाता था, वह ब्लड प्रेशर बढ़ाने में भी अहम भूमिका निभा सकता है। वैज्ञानिकों का मानना है कि यह खोज आगे चलकर हाई ब्लड प्रेशर (BP) के इलाज के लिए एक नया रास्ता खोल सकती है।

सांस और ब्लड प्रेशर का कनेक्शन

यह रिसर्च दिमाग के जिस हिस्से पर केंद्रित है, उसे लैटरल पैराफेशियल रीजन (pFL) कहा जाता है। यह हिस्सा ब्रेनस्टेम में मौजूद होता है, जो दिमाग को रीढ़ की हड्डी से जोड़ता है। ब्रेनस्टेम हमारे शरीर की कई ऑटोमैटिक प्रक्रियाओं को संभालता है, जैसे सांस लेना, दिल की धड़कन और पाचन। अब तक माना जाता था कि pFL का काम सिर्फ सांस लेने की प्रक्रिया को नियंत्रित करना है, खासकर तब जब हमें जोर से सांस छोड़नी पड़ती है, जैसे हंसते समय, एक्सरसाइज करते वक्त या खांसते समय।

जोर से सांस छोड़ना क्यों है खास?

स्टडी के लीड रिसर्चर और न्यूजीलैंड की यूनिवर्सिटी ऑफ ऑकलैंड के प्रोफेसर जूलियन पैटन के मुताबिक, जब हम जोर से सांस बाहर निकालते हैं तो पेट की मांसपेशियां सक्रिय होती हैं। आम तौर पर सामान्य सांस छोड़ने में इन मांसपेशियों की जरूरत नहीं पड़ती। लेकिन जब यह pFL रीजन ज्यादा एक्टिव होता है, तो यह सिर्फ सांस पर ही असर नहीं डालता, बल्कि उन नसों को भी सक्रिय कर देता है जो ब्लड वेसल्स को सिकोड़ती हैं।

ब्लड प्रेशर कैसे बढ़ता है?

रिसर्च में हाई ब्लड प्रेशर से पीड़ित चूहों पर अध्ययन किया गया। वैज्ञानिकों ने पाया कि ऐसे हालात में pFL रीजन ज्यादा सक्रिय हो जाता है। जब रिसर्च टीम ने इस हिस्से की एक्टिविटी को दबाया या बंद किया, तो चूहों का ब्लड प्रेशर नॉर्मल लेवल पर आ गया।इसका मतलब यह हुआ कि pFL रीजन ब्लड वेसल्स को टाइट करने वाली नसों से जुड़ा हुआ है, जिससे ब्लड प्रेशर बढ़ता है।

सांस लेने का पैटर्न भी है जिम्मेदार

रिसर्चर्स का कहना है कि अगर सांस लेने का तरीका बार-बार बदलता रहे। खासकर जब जोर से सांस छोड़ी जाए और पेट की मांसपेशियां ज्यादा काम करें। तो यह हाई ब्लड प्रेशर को ट्रिगर कर सकता है। यह स्थिति उन लोगों में ज्यादा देखी जा सकती है जिन्हें नींद में सांस रुकने की समस्या (स्लीप एपनिया) या ऑक्सीजन की कमी होती है।

इलाज की नई उम्मीद

रिसर्च पेपर में वैज्ञानिकों ने सुझाव दिया है कि अगर pFL रीजन के न्यूरॉन्स की एक्टिविटी को कंट्रोल किया जाए, तो हाई ब्लड प्रेशर को काबू में लाया जा सकता है। हालांकि, यह स्टडी अभी जानवरों पर की गई है, लेकिन एक्सपर्ट्स मानते हैं कि भविष्य में यह इंसानों के लिए भी हाइपरटेंशन का नया इलाज बन सकती है। कुल मिलाकर, यह रिसर्च बताती है कि हमारी सांस लेने की आदतें और दिमाग के कुछ हिस्से मिलकर ब्लड प्रेशर पर गहरा असर डाल सकते हैं, और यही खोज आने वाले समय में लाखों मरीजों के लिए राहत की वजह बन सकती है।

डिस्क्लेमर
इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ओपिनियन का विकल्प नहीं है। पाठकों को सलाह दी जाती है कि वे कोई भी दवा, उपचार या नुस्खा अपनी मर्जी से ना आजमाएं। इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है।
Updated on:
14 Jan 2026 10:30 am
Published on:
14 Jan 2026 10:30 am