स्वास्थ्य

Dhanteras Ayurveda: धनतेरस और राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस का क्या संबंध है, महत्व, इतिहास के बारें में जानिए

Dhanteras Ayurveda: धनतेरस और राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस के महत्व, तारीख के बदलाव और सेहतमंद रहने की आसान आयुर्वेदिक आदतों को भारत सरकार के सूचना और प्रसारण मंत्रालय, डीडी न्यूज और आयुर्वेदिक डॉक्टर अनिल योगाचार्य से जानें।
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Updated: 6 Nov 2026, 6:00 AM IST
धनतेरस पर आयुर्वेद का महत्व दर्शाती भगवान धन्वंतरि की तस्वीर, जिसमें जड़ी-बूटियां, औषधीय मसाले और दीपक दिखाई दे रहे हैं।
धनतेरस को भगवान धन्वंतरि की पूजा की जाती है। आयुर्वेद में स्वस्थ जीवनशैली और प्राकृतिक औषधियों का विशेष महत्व माना गया है- प्रतीकात्मक तस्वीर

Dhanteras Ayurveda: हर साल जब धनतेरस आती है, तो हमारे मन में सबसे पहले नए बर्तन, सोने-चांदी के सिक्के और मां लक्ष्मी की पूजा का ख्याल आता है। हम सब बाजार भागते हैं, दीये जलाते हैं और त्योहार की तैयारियों में जुट जाते हैं। लेकिन क्या कभी आपने सोचा है कि इस बड़े त्योहार का हमारी सेहत से भी गहरा नाता है? धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन समुद्र मंथन के दौरान भगवान धन्वंतरि हाथ में अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे। भगवान धन्वंतरि को ही आयुर्वेद और सेहत का देवता माना जाता है। यही वजह है कि भारत सरकार ने कुछ साल पहले धनतेरस के दिन ही राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस मनाने की शुरुआत की थी, ताकि हम अपनी इस प्राचीन चिकित्सा पद्धति को याद रखें। आपने अगर देखा हो तो लोग अब फिर से इसकी ओर लौटने लगे हैं इसके इलाज में समय भले ही ज्यादा लगता है लेकिन लोगों का मानना है कि ये लंबे समय तक असर करता है।

23 सितंबर की नई तारीख का क्या है सच?

भारत सरकार के सूचना और प्रसारण मंत्रालय के अनुसार, पहले आयुर्वेद दिवस हमेशा धनतेरस के दिन ही मनाया जाता था। लेकिन दिक्कत ये थी कि धनतेरस हिंदू पंचांग के हिसाब से तय होती है, इसलिए अंग्रेजी कैलेंडर के मुताबिक इसकी तारीख हर साल बदल जाती थी। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आयुर्वेद का प्रचार-प्रसार सही तरीके से हो सके और दुनिया भर में एक तय तारीख पर कार्यक्रम हो सकें, इसलिए सरकार ने एक बड़ा बदलाव किया। साल 2025 से यह तय कर दिया गया कि राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस हर साल 23 सितंबर को ही मनाया जाएगा। हालांकि, तारीख बदलने से भगवान धन्वंतरि और धनतेरस के साथ हमारा जो पारंपरिक और भावनात्मक जुड़ाव है, वह कभी कम नहीं हो सकता।

रोजमर्रा की वे आदतें, जो आपको हमेशा तंदुरुस्त रख सकती हैं?

डीडी न्यूज के अनुसार, आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में हम लोग बीमार होने के बाद डॉक्टर के चक्कर काटते हैं और दवाइयां खाने लगते हैं। जबकि आयुर्वेद साफ कहता है कि असली समझदारी बीमारी होने से रोकना है। अगर सर्दियों में आप छोटी-मोटी परेशानियों से दूर रहना चाहते हैं, तो अपनी रोज की दिनचर्या में इन छोटी-छोटी बातों को ढाल सकते हैं;

मोटे अनाजों को बनाएं अपनी डाइट का हिस्सा

सर्दियों के दिनों में बाजरा, ज्वार, मक्का, जौ और रागी जैसे मोटे अनाज खाना बहुत फायदेमंद होता है। इनके साथ हरी सब्जियां, दूध और ताजे फल खाने से शरीर को भरपूर ऊर्जा मिलती है और ठंड से मुकाबला करने में मदद मिलती है।

1. गुड़ और ज्वार का करें सेवन

सर्दियों में हमेशा ताजा और गरमागरम खाना ही खाएं। इसके अलावा, गुड़ और ज्वार को अपनी डाइट में जरूर शामिल करें। गुड़ हमारे शरीर को अंदर से गर्म रखता है और इसमें भरपूर आयरन होता है, जबकि ज्वार पाचन को ठीक रखता है और पोषण देता है।

2. देसी घी और सही कुकिंग का तरीका

सर्दियों में खाना बनाते समय सही मात्रा में तेल या शुद्ध घी का इस्तेमाल करें। देसी घी खाने से शरीर को ताकत और अंदरूनी गर्मी मिलती है, साथ ही हड्डियां और जोड़ भी मजबूत होते हैं। इसके अलावा, चीनी की जगह गुड़ या शहद का इस्तेमाल करें, क्योंकि ये इम्युनिटी बढ़ाने के साथ शरीर को गर्म रखते हैं। ताजा और गर्म खाना खाने से पाचन भी अच्छा रहता है।

3. ठंडी चीजों से पूरी तरह बनाएं दूरी

सर्दियों में सबसे जरूरी बात यह है कि ठंडी चीजों से दूर रहें। इस मौसम में आइसक्रीम, कोल्ड ड्रिंक्स या फ्रिज का ठंडा पानी बिल्कुल न लें। ये चीजें शरीर की अंदरूनी गर्मी को कम कर देती हैं, जिससे सर्दी-जुकाम और दूसरी समस्याएं हो सकती हैं।

4. आयुर्वेदिक उपचार और घरेलू नुस्खों को अपनाने से पहले डॉक्टर की सलाह कब लें?

आयुर्वेदिक डॉक्टर अनिल योगाचार्य के अनुसार, नुस्खे और जड़ी-बूटियां हमारी भारतीय संस्कृति का अहम हिस्सा हैं और सर्दी-जुकाम जैसी आम परेशानियों में ये बहुत असरदार होती हैं। लेकिन हर बार सिर्फ नुस्खों के भरोसे रहना सही नहीं है। अगर आपको सीने में तेज दर्द, सांस लेने में तकलीफ, बहुत ज्यादा चक्कर आना, या कोई पुरानी बीमारी (जैसे शुगर या ब्लड प्रेशर) है, तो अपनी मर्जी से कोई भी जड़ी-बूटी या कड़क काढ़ा न लें। किसी भी गंभीर या लंबे समय से चली आ रही स्वास्थ्य समस्या के लिए हमेशा योग्य आयुर्वेदिक डॉक्टर या मेडिकल एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें। सही समय पर सही सलाह लेना ही समझदारी है।

इस धनतेरस पर लें सेहत का पक्का संकल्प

धनतेरस पर हम सब घर में सुख-समृद्धि लाने की कामना करते हैं, लेकिन असली धन तो हमारा अच्छा स्वास्थ्य ही है। इस बार धनतेरस पर सिर्फ बाजार से सामान खरीदने तक सीमित न रहें, बल्कि एक सेहतमंद जीवन जीने का पक्का संकल्प लें। जंक फूड को छोड़कर घर के बने पौष्टिक खानपान को अपनाएं, रोजाना थोड़ा समय योग, प्राणायाम या सैर के लिए निकालें और अपनी मानसिक शांति का भी ध्यान रखें। याद रखिए, एक स्वस्थ शरीर और शांत मन ही सबसे बड़ा खजाना है।

डिस्क्लेमर
इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ओपिनियन का विकल्प नहीं है। पाठकों को सलाह दी जाती है कि वे कोई भी दवा, उपचार या नुस्खा अपनी मर्जी से ना आजमाएं। इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है।
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