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Festive Stress: त्योहारों में तनाव, थकान और चिड़चिड़ापन कैसे कम करें? मनोचिकित्सक से जानें बेहतर नींद और मानसिक सेहत के उपाय

Diwali Stress: त्योहारों की भागदौड़ में तनाव, थकान और चिड़चिड़ापन बढ़ गया है? मनोचिकित्सक डॉ. आदित्य सोनी, अमेरिकन साइकियाट्रिक एसोसिएशन (APA), सेंटर्स फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (CDC), यूनिवर्सिटी ऑफ आयोवा हेल्थ केयर (UIHC) और नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ मेंटल हेल्थ (NIMH) से जानिए बेहतर नींद, स्मार्ट प्लानिंग और मेंटल हेल्थ को दुरुस्त रखने के उपाय।
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भारत

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Nidhi Yadav

•

Updated: 5 Nov 2026, 7:00 PM IST

Festive stress management and mental health care tips during Diwali

त्योहारों की भागदौड़ में मेंटल हेल्थ का रखें ख्याल बेहतर नींद, स्मार्ट प्लानिंग और अपनों का साथ तनाव को दूर भगाने में मदद करता है- प्रतीकात्मक तस्वीर (Source- Chatgpt)

Festive Stress Prevention: त्योहार आते ही घर में एक अलग ही रौनक छा जाती है, ,साफ-सफाई, नए कपड़े, मिठाइयां और मेहमानों का आना-जाना। लेकिन इस जगमगाती रोशनी के पीछे एक ऐसी सच्चाई भी है, जिससे कई लोग हर साल झेलते हैं और वह है मानसिक तनाव, शारीरिक थकान और अचानक बढ़ने वाला चिड़चिड़ापन। त्योहारों की इस भागदौड़ में मेंटल हेल्थ कैसे बिगड़ने लगती है और इससे कैसे बचा जाए आइए पत्रिका की मनोचिकित्सक डॉ. आदित्य सोनी (MD, Psychiatrist) से खास बातचीत के आधार पर समझते हैं। समझिए कि इस फेस्टिव सीजन में आप अपनी मानसिक और शारीरिक सेहत को कैसे दुरुस्त रख सकते हैं।

त्योहारों के दौरान काम की भागदौड़ और जिम्मेदारियों से तनाव क्यों बढ़ जाता है?

अमेरिकन साइकियाट्रिक एसोसिएशन (APA) के एक ब्लॉग में भी इस बात का जिक्र किया गया है कि त्योहारों के समय वित्तीय दबाव और सामाजिक अपेक्षाएं एंग्‍जाइटी का मुख्य कारण बनती हैं। जब भी कोई बड़ा त्योहार नजदीक आता है, तो अचानक से टू-डू लिस्ट (To-do list) इतनी लंबी हो जाती है कि उसे पूरा करते-करते इंसान सांस लेना भूल जाता है। घर की डीप क्लीनिंग, मेहमानों के लिए पकवान बनाना, रिश्तेदारों के यहां तोहफे भेजना और ऑफिस का बचा हुआ काम यह सब मिलकर मानसिक दबाव पैदा कर देता है।

त्योहारों की व्यस्तता के बीच थकान, चिड़चिड़ापन और मानसिक तनाव के किन संकेतों को पहचानें?

  • बात-बात पर गुस्सा या चिड़चिड़ापन आना।
  • शारीरिक थकावट और सिरदर्द बने रहना।
  • नींद का पैटर्न बिगड़ना।
  • मेहमानों या परिवार के बीच रहने के बावजूद भीतर से अकेलापन महसूस होना।

त्योहारों में तनाव कम करने के लिए काम बांटने और बेहतर प्लानिंग करने के आसान तरीके

यूनिवर्सिटी ऑफ आयोवा हेल्थ केयर (UIHC) की गाइडलाइंस भी यही सुझाती हैं कि त्योहारों के तनाव को संभालने के लिए लक्ष्य तय करना जरूरी है;

  • अकेले सुपरमैन या सुपरवुमन न बनें।
  • पहले से लिस्ट बनाएं।
  • जरूरत पड़ने पर ना कहें।

त्योहारों के दौरान पर्याप्त नींद लेना क्यों जरूरी है?

सेंटर्स फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (CDC) की मानें तो रोजाना कम से कम 7 से 8 घंटे की गहरी नींद न केवल शरीर की रिकवरी के लिए अनिवार्य है। डॉ. आदित्य सोनी कहते हैं, जब आप नींद से समझौता करते हैं, तो दिमाग का मूड कंट्रोल करने वाला हिस्सा (Prefrontal cortex) ठीक से काम करना बंद कर देता है। नतीजा यह होता है कि आप छोटी-छोटी बातों पर ओवररिएक्ट करने लगते हैं, एकाग्रता घट जाती है और एंग्‍जाइटी बढ़ने लगती है। इसलिए चाहे कितनी भी व्यस्तता हो, अपनी नींद के समय से समझौता बिल्कुल न करें।

त्योहारों में अकेलेपन और उदासी से कैसे निपटें और अपनी मानसिक सेहत का ख्याल रखें?

  • अपनी भावनाओं को दबाएं नहीं।
  • अपनों से जुड़ें।
  • दिनभर की भीड़-भाड़ के बाद कम से कम 15-20 मिनट खुद के साथ बिताएं। गहरी सांस लें, अपनी पसंद का कोई शांत गाना सुनें या खुली हवा में टहलें। नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ मेंटल हेल्थ (NIMH) भी मानसिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता देने के लिए ऐसे छोटे ब्रेक्स लेने की सलाह देता है।

तनाव, उदासी या बेचैनी बढ़ने पर कब काउंसलर या डॉक्टर से मिलना चाहिए?

कभी-कभी त्योहारों का तनाव सिर्फ थकान तक सीमित नहीं रहता, बल्कि यह डिप्रेशन या गंभीर पैनिक अटैक का रूप ले लेता है। ऐसे में समय रहते पेशेवर मदद (Professional Help) लेना बुद्धिमानी है। डॉ. आदित्य सोनी सलाह देते हैं कि यदि आपको नीचे दिए गए लक्षण लगातार दो हफ्ते से ज्यादा महसूस हों, तो किसी मनोचिकित्सक या काउंसलर से मिलने में बिल्कुल संकोच न करें;

  • दिनभर अत्यधिक उदासी, निराशा या खालीपन महसूस होना।
  • किसी भी चीज में, यहां तक कि त्योहारों की खुशियों में भी बिल्कुल रुचि न रहना।
  • अचानक से घबराहट होना, दिल की धड़कन तेज होना या सांस फूलना (Panic attacks)।
  • आत्महत्या जैसे नकारात्मक विचार आना या खुद को नुकसान पहुंचाने का मन करना।

त्योहार खुशियां बांटने और अपनों के साथ सुकून के पल बिताने के लिए होते हैं, खुद को शारीरिक और मानसिक रूप से थका डालने के लिए नहीं। इस बार त्योहार मनाते वक्त अपनी सेहत को प्राथमिकता दें, क्योंकि आपकी मुस्कान और मानसिक शांति ही घर की असली रौनक है।

डिस्क्लेमर
इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ओपिनियन का विकल्प नहीं है। पाठकों को सलाह दी जाती है कि वे कोई भी दवा, उपचार या नुस्खा अपनी मर्जी से ना आजमाएं। इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है।

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