
त्योहारों की भागदौड़ में मेंटल हेल्थ का रखें ख्याल बेहतर नींद, स्मार्ट प्लानिंग और अपनों का साथ तनाव को दूर भगाने में मदद करता है- प्रतीकात्मक तस्वीर (Source- Chatgpt)
Festive Stress Prevention: त्योहार आते ही घर में एक अलग ही रौनक छा जाती है, ,साफ-सफाई, नए कपड़े, मिठाइयां और मेहमानों का आना-जाना। लेकिन इस जगमगाती रोशनी के पीछे एक ऐसी सच्चाई भी है, जिससे कई लोग हर साल झेलते हैं और वह है मानसिक तनाव, शारीरिक थकान और अचानक बढ़ने वाला चिड़चिड़ापन। त्योहारों की इस भागदौड़ में मेंटल हेल्थ कैसे बिगड़ने लगती है और इससे कैसे बचा जाए आइए पत्रिका की मनोचिकित्सक डॉ. आदित्य सोनी (MD, Psychiatrist) से खास बातचीत के आधार पर समझते हैं। समझिए कि इस फेस्टिव सीजन में आप अपनी मानसिक और शारीरिक सेहत को कैसे दुरुस्त रख सकते हैं।
अमेरिकन साइकियाट्रिक एसोसिएशन (APA) के एक ब्लॉग में भी इस बात का जिक्र किया गया है कि त्योहारों के समय वित्तीय दबाव और सामाजिक अपेक्षाएं एंग्जाइटी का मुख्य कारण बनती हैं। जब भी कोई बड़ा त्योहार नजदीक आता है, तो अचानक से टू-डू लिस्ट (To-do list) इतनी लंबी हो जाती है कि उसे पूरा करते-करते इंसान सांस लेना भूल जाता है। घर की डीप क्लीनिंग, मेहमानों के लिए पकवान बनाना, रिश्तेदारों के यहां तोहफे भेजना और ऑफिस का बचा हुआ काम यह सब मिलकर मानसिक दबाव पैदा कर देता है।
यूनिवर्सिटी ऑफ आयोवा हेल्थ केयर (UIHC) की गाइडलाइंस भी यही सुझाती हैं कि त्योहारों के तनाव को संभालने के लिए लक्ष्य तय करना जरूरी है;
सेंटर्स फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (CDC) की मानें तो रोजाना कम से कम 7 से 8 घंटे की गहरी नींद न केवल शरीर की रिकवरी के लिए अनिवार्य है। डॉ. आदित्य सोनी कहते हैं, जब आप नींद से समझौता करते हैं, तो दिमाग का मूड कंट्रोल करने वाला हिस्सा (Prefrontal cortex) ठीक से काम करना बंद कर देता है। नतीजा यह होता है कि आप छोटी-छोटी बातों पर ओवररिएक्ट करने लगते हैं, एकाग्रता घट जाती है और एंग्जाइटी बढ़ने लगती है। इसलिए चाहे कितनी भी व्यस्तता हो, अपनी नींद के समय से समझौता बिल्कुल न करें।
कभी-कभी त्योहारों का तनाव सिर्फ थकान तक सीमित नहीं रहता, बल्कि यह डिप्रेशन या गंभीर पैनिक अटैक का रूप ले लेता है। ऐसे में समय रहते पेशेवर मदद (Professional Help) लेना बुद्धिमानी है। डॉ. आदित्य सोनी सलाह देते हैं कि यदि आपको नीचे दिए गए लक्षण लगातार दो हफ्ते से ज्यादा महसूस हों, तो किसी मनोचिकित्सक या काउंसलर से मिलने में बिल्कुल संकोच न करें;
त्योहार खुशियां बांटने और अपनों के साथ सुकून के पल बिताने के लिए होते हैं, खुद को शारीरिक और मानसिक रूप से थका डालने के लिए नहीं। इस बार त्योहार मनाते वक्त अपनी सेहत को प्राथमिकता दें, क्योंकि आपकी मुस्कान और मानसिक शांति ही घर की असली रौनक है।
Published on:
5 Nov 2026, 7:00 PM IST
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