
Cancer Awareness: दुनियाभर में कैंसर तेजी से बढ़ता हुआ वैश्विक संकट बन चुका है। ताजा अंतरराष्ट्रीय अध्ययन के अनुसार, 1990 से अब तक कैंसर के नए मामलों की संख्या दोगुने से भी अधिक हो चुकी है। ठोस रोकथाम और इलाज की रणनीतियां नहीं अपनाई गईं तो 2050 तक हर साल 3.05 करोड़ नए कैंसर मामले सामने आएंगे।
अकेले तंबाकू सेवन ही 21% कैंसर मौतों के लिए जिम्मेदार है। पुरुषों में यह आंकड़ा 46% है। महिलाओं में यह जोखिम 36% है।
सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि अधिकांश मामले और मौतें अब निम्न और मध्यम आय वाले देशों में दर्ज की जा रही हैं। उच्च आय वाले देशों में बेहतर इलाज, समय पर जांच और प्रभावी स्वास्थ्य नीतियों के कारण कैंसर से मृत्यु दर में कमी आ रही है। रिपोर्ट के मुताबिक, कुल मौतों में से करीब 42% मौतें ऐसे कारणों से जुड़ी हैं जिन्हें बदला या रोका जा सकता है।
शोधकर्ताओं का अनुमान है कि यदि मौजूदा रुझान जारी रहे, तो वर्ष 2050 तक हर साल दुनिया भर में 3.05 करोड़ नए कैंसर मामले सामने आएंगे। सालाना मौतों की संख्या बढ़कर 1.86 करोड़ तक पहुंच सकती है। अगले 25 वर्षों में कैंसर के नए मामलों में 61% और मौतों में लगभग 75% की वृद्धि होने का अनुमान है।
2023 में ब्रेस्ट कैंसर दुनिया भर में सबसे अधिक पाए जाने वाला कैंसर रहा। जबकि ट्रेकिया, ब्रोंकस और फेफड़ों का कैंसर मौतों का सबसे बड़ा कारण बना रहा। 1990 से 2023 के बीच लेबनान में कैंसर की दर और मृत्यु दर में सबसे अधिक बढ़ोतरी दर्ज की गई। यूएई में कैंसर केस की दर में सबसे ज्यादा गिरावट देखी गई। कजाखस्तान में कैंसर से मृत्यु दर में सबसे बड़ी कमी दर्ज की गई।