
Cancer Drug Prices: कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से लड़ रहे मरीजों और उनके परिवारों के लिए एक बड़ी खबर आई है। 11 जून को भारत सरकार ने एक नया नियम जारी किया है। इसके तहत, दवाओं की कीमतें तय करने वाली सरकारी संस्था एनपीपीए (NPPA) ने कार्बोप्लाटिन और सिस्प्लाटिन इंजेक्शन के नए और 50% बढ़े हुए दाम तय कर दिए हैं। इस फैसले के बाद बाजार में ये जीवनरक्षक इंजेक्शन लगभग तीन गुना तक महंगे मिल सकते हैं। मेयो क्लिनिक के अनुसार, सिस्प्लैटिन इंजेक्शन का उपयोग मूत्राशय, अंडाशय या अंडकोष के उन्नत कैंसर के इलाज के लिए किया जाता है। आइए क्लीवलैंड क्लिनिक और मेयो क्लिनिक से जानते हैं कि कीमोथेरेपी और कौनसे कैंसर के इलाज में काम आती हैं ये दोनों दवाएं?
पिछले कुछ महीनों से देश के कई सरकारी और प्राइवेट अस्पतालों में कार्बोप्लाटिन और सिस्प्लाटिन इंजेक्शन की भारी कमी (शॉर्टेज) देखी जा रही थी। इस वजह से कई मरीजों की कीमोथेरेपी समय पर नहीं हो पा रही थी। इस कमी की मुख्य वजह यह थी कि इन दवाओं को बनाने में प्लेटिनम (Platinum) धातु का इस्तेमाल होता है, जिसकी कीमत अंतरराष्ट्रीय बाजार में बहुत ज्यादा बढ़ चुकी है।
सरकार इन दवाओं के दाम खुद तय करती है (ताकि ये सस्ती रहें), इसलिए दवा बनाने वाली कंपनियां महंगे कच्चे माल के बावजूद इनके दाम नहीं बढ़ा पा रही थीं। नुकसान होने के कारण कंपनियों ने इनका उत्पादन या तो बहुत कम कर दिया या पूरी तरह बंद कर दिया। इसी सप्लाई संकट को दूर करने के लिए दवा नियामक संस्था (NPPA) ने आपातकालीन शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए इनके दामों में बढ़ोतरी को मंजूरी दी है, ताकि कंपनियां दोबारा उत्पादन शुरू करें और मरीजों को दवा आसानी से मिल सके।
क्लीवलैंड क्लिनिक के अनुसार, कार्बोप्लाटिन (Carboplatin) का उपयोग कैंसर की कोशिकाओं (cancer cells) की वृद्धि को धीमा करने के लिए किया जाता है। कार्बोप्लाटिन और सिस्प्लाटिन को कैंसर के इलाज में फर्स्ट-लाइन ट्रीटमेंट यानी सबसे पहली और बुनियादी दवा माना जाता है। ये दवाएं फेफड़ों (Lung Cancer), महिलाओं में गर्भाशय और अंडाशय (Ovarian Cancer) और यूरिनरी ब्लैडर कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों के इलाज में कीमोथेरेपी का मुख्य आधार होती हैं। इन दवाओं का समय पर मिलना मरीज के ठीक होने के लिए बेहद जरूरी होता है।
डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।