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Birth Defects: फोलिक एसिड की कमी और संक्रमण बढ़ा सकते हैं बच्चे में जन्मजात विकारों का खतरा, WHO ने बताए बचाव के उपाय

Birth Defects Cause: प्रेग्नेंसी में फोलिक एसिड की कमी और इंफेक्शन के कारण बच्चे में जन्मजात बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। जानिए WHO के बताए उपाय जिनसे आप अपने बच्चे को सुरक्षित रख सकते हैं।
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भारत

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Nidhi Yadav

Jul 09, 2026

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फोलिक एसिड की कमी और संक्रमण बढ़ा सकते हैं बच्चे में जन्मजात विकारों का खतरा- प्रतीकात्मक तस्वीर (Source- Freepik)

Birth Defects Symptoms: बच्चे में जन्म से ही कुछ शारीरिक या मानसिक बीमारियां रह जाती हैं, तो उन्हें बर्थ डिफेक्ट्स कहते हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन यानी WHO की एक रिपोर्ट कहती है कि अगर प्रेग्नेंसी के दौरान मां के शरीर में फोलिक एसिड की कमी हो जाए या उसे कोई इंफेक्शन (संक्रमण) घेर ले, तो बच्चे में इन बीमारियों का खतरा बहुत ज्यादा बढ़ जाता है। अच्छी बात यह है कि अगर सही समय पर कुछ छोटी-छोटी बातों का ध्यान रख लिया जाए, तो आप अपने बच्चे को इस बड़े खतरे से पूरी तरह से बचा सकते हैं। आइए जानते हैं कि क्या होता है बर्थ डिफेक्ट और कैसे इससे बचा जा सकता है।

बर्थ डिफेक्ट क्या होते हैं?

बर्थ डिफेक्ट वो कमियां या बीमारियां हैं जो बच्चा मां के पेट से ही अपने साथ लेकर पैदा होता है। ये कमियां बच्चे के दिल, दिमाग, रीढ़ की हड्डी, हाथ-पैर या शरीर के किसी भी अंदरूनी हिस्से में हो सकती हैं। कुछ दिक्कतें बहुत आम होती हैं जो ऑपरेशन से ठीक हो जाती हैं, जैसे कि बच्चे का होंठ या तालू कटा होना। लेकिन कुछ कमियां बहुत गंभीर होती हैं, जिनसे बच्चे का दिमागी विकास रुक जाता है या वह जिंदगी भर के लिए अपाहिज हो सकता है। WHO के अनुसार, विश्व में हर साल 240,000 नवजात शिशुओं की जन्म के 28 दिनों के भीतर मृत्यु हो जाती है।

फोलिक एसिड की कमी क्यों बनती है बड़ी वजह?

फोलिक एसिड असल में विटामिन B9 का ही एक रूप है, जो हमारे शरीर में नई कोशिकाएं (cells) बनाने के लिए बहुत जरूरी होता है। प्रेग्नेंसी के शुरुआती तीन महीनों में, जब पेट में बच्चे का दिमाग और उसकी रीढ़ की हड्डी बन रही होती है, तब मां के शरीर को फोलिक एसिड की सबसे ज्यादा जरूरत होती है। अगर इस नाजुक समय पर मां के शरीर में इसकी कमी हो जाए, तो बच्चे की रीढ़ की हड्डी का ढांचा अधूरा रह जाता है। इसे न्यूरल ट्यूब डिफेक्ट कहते हैं। इसकी वजह से बच्चा मानसिक रूप से कमजोर हो सकता है या फिर उसके पैर हमेशा के लिए काम करना बंद कर सकते हैं।

इंफेक्शन (संक्रमण) किस तरह पहुंचाते हैं नुकसान?

क्लीवलैंड क्लिनिक के अनुसार, अगर गर्भवती महिला को इस दौरान रूबेला (जिसे जर्मन खसरा भी कहते हैं), सिफलिस या जीका वायरस जैसी कोई बीमारी हो जाए, तो इसका सीधा असर पेट में पल रहे मासूम पर पड़ता है। ये खतरनाक वायरस मां के जरिए बच्चे तक पहुंच जाते हैं। इससे बच्चे का दिल कमजोर हो सकता है, उसे आंख या कान से जुड़ी दिक्कतें हो सकती हैं, और कई बार तो बच्चे का दिमाग भी पूरी तरह विकसित नहीं हो पाता।

WHO के अनुसार बचाव के उपाय

WHO ने इस खतरे से बचने के लिए कुछ तरीके बताए हैं, जिन्हें हर महिला को जरूर मानना चाहिए;

  • फोलिक एसिड की गोलियों के साथ ही खाने में दालें, हरी पत्तेदार सब्जियां, और संतरे जैसे फल जरूर लें।
  • टीके लगवाना है जरूरी।
  • हमेशा साफ और उबला पानी पीएं।
  • बाहर का खुला खाना खाने से बचें।
  • घर में मच्छर न होने दें और पूरी आस्तीन के कपड़े पहनें।
  • प्रेग्नेंसी के दौरान हर महीने डॉक्टर के पास जाकर रूटीन चेकअप करवाएं।

डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।