Cancer Treatment: आज के इस लेख में आइए जानते हैं कि CAR-T सेल्स की नई खोज कैसे काम करती है और इससे कैंसर के इलाज में क्या बदलाव होने वाला है।
Cancer Treatment: आज के समय में भी कैंसर एक जानलेवा बीमारी है, लेकिन यह लाइलाज नहीं है। अगर सही समय पर मरीज को को इसका पता चल जाए और उसे सही इलाज मिले, तो कैंसर ठीक हो सकता है। आज के समय में वैसे तो कैंसर के कई इलाज मौजूद हैं, लेकिन हाल ही में वैज्ञानिकों ने एक नया तरीका खोजा है जो कैंसर के अब तक के इलाज की पूरी प्रक्रिया को बदल सकता है।
दरअसल, अब तक कैंसर से लड़ने वाले CAR-T सेल्स को लैब में बनाना पड़ता था, जो बहुत महंगा और मरीज को परेशान करने वाला होता था। लेकिन हाल ही में यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया, सैन फ्रांसिस्को (UCSF), ग्लैडस्टोन इंस्टीट्यूट्स, ड्यूक यूनिवर्सिटी और इनोवेटिव जीनोमिक्स इंस्टीट्यूट ने एक ऐसी तकनीक खोजी है, जिससे ये सेल्स सीधे मरीज के शरीर के अंदर ही तैयार किए जा सकेंगे। आइए जानते हैं इसके बारे में विस्तार से।
कैंसर के इलाज के दौरान अभी तक जो CAR-T थेरेपी इस्तेमाल होती है, इसमें सबसे पहले मरीज के शरीर से सेल्स निकाले जाते हैं, फिर उन्हें लैब भेजा जाता है जहां उन्हें कैंसर से लड़ने के लिए री-प्रोग्राम किया जाता है। यह पूरा काम करने में कई हफ्ते लगने के साथ ही इसका खर्च भी काफी ज्यादा आता है। इसके अलावा, कीमोथेरेपी के दौरान मरीज को कई परेशानियों से भी गुजरना पड़ता है।
वैज्ञानिकों ने एक डुअल-पार्टिकल सिस्टम तैयार किया है। यह शरीर के अंदर जाकर सीधे सिर्फ इम्यून सिस्टम की कोशिकाएं को पहचानता है और उनमें नया DNA फिट कर देता है। इस तकनीक की सबसे अच्छी बात यह है कि यह नया DNA तभी एक्टिव होता है जब वह अपनी सही जगह पर पहुंच जाए। इससे शरीर की दूसरी हेल्दी सेल्स को कोई नुकसान नहीं पहुंचता।
आने वाले समय में इस खोज से कैंसर के इलाज में बहुत बड़ा बदलाव आ सकता है। इससे कैंसर का इलाज काफी ज्यादा आसान होने के साथ ही कम खर्च वाला भी हो सकता है। इसके अलावा इससे मरीजों को कीमोथेरेपी के दर्द और इलाज के लिए लंबे इंतजार से भी छुटकारा मिल जाएगा।
डिसक्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह किसी क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प नहीं है। इसलिए पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।