
Coffee Benefits for Liver : क्या आप भी उन लोगों में से हैं जिनकी सुबह की शुरुआत एक गरमागरम कॉफी के कप के बिना अधूरी है? अगर हां तो आपके लिए एक बहुत अच्छी खबर है। यह सिर्फ आपको जगाती ही नहीं बल्कि आपके लिवर का खास ख्याल भी रखती है। जी हां, आपने बिल्कुल सही सुना। एक ताजा रिसर्च में पता चला है कि आपकी पसंदीदा कॉफी न सिर्फ लिवर को बीमारियों से बचा सकती है, बल्कि फैटी लिवर और दूसरी गंभीर लिवर संबंधी समस्याओं का खतरा भी कम कर सकती है।
यूके की साउथेम्प्टन और एडिनबर्ग यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने एक बड़ा अध्ययन किया है। उन्होंने पाया कि किसी भी तरह की कॉफी पीने से क्रोनिक लिवर रोग (Chronic Liver Disease) का खतरा कम होता है। यह रिसर्च 'BMC पब्लिक हेल्थ' नाम की प्रतिष्ठित पत्रिका में छपी है। यह उन सभी लोगों के लिए एक राहत भरी खबर है जो लिवर की बीमारियों को लेकर चिंतित रहते हैं।
हमारा लिवर शरीर का सबसे बड़ा अंदरूनी अंग है। यह एक फिल्टर की तरह काम करता है जो खून को साफ करता है और पोषक तत्वों, ज़हरीले पदार्थों और वेस्ट प्रोडक्ट्स को प्रोसेस करता है। पाचन, चयापचय (metabolism) और रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immune function) में भी लिवर की अहम भूमिका होती है।
शोधकर्ताओं ने पाया कि चाहे आप कैफीन वाली कॉफी (ग्राउंड या इंस्टेंट) पीते हों या डीकैफिनेटेड कॉफी, यह सभी लिवर संबंधी रोगों के जोखिम को कम करती हैं। अध्ययन में यह भी सामने आया कि जो लोग कॉफी पीते थे उनमें लिवर की पुरानी बीमारियों के विकसित होने और उनसे मरने का जोखिम कॉफी न पीने वालों की तुलना में काफी कम था।
रिसर्च के मुताबिक, लिवर को सबसे ज्यादा फायदा तब मिलता है जब आप रोजाना तीन से चार कप कॉफी पीते हैं। इस अध्ययन के लिए शोधकर्ताओं ने यूके बायोबैंक से 495,585 प्रतिभागियों के डेटा का विश्लेषण किया, जिनकी कॉफी पीने की आदतें दर्ज थीं। इन प्रतिभागियों पर 10.7 साल से ज्यादा समय तक नजर रखी गई, ताकि यह देखा जा सके कि उनमें क्रोनिक लिवर रोग और संबंधित स्थितियां विकसित होती हैं या नहीं।
| स्वास्थ्य जोखिम | जोखिम में कमी (%) |
|---|---|
| क्रोनिक लिवर रोग | 21% |
| क्रोनिक या फैटी लिवर रोग | 20% |
| क्रोनिक लिवर रोग से मृत्यु | 49% |
अध्ययन में पाया गया कि लगभग 78% (384,818) प्रतिभागियों ने ग्राउंड या इंस्टेंट कैफीन वाली या डीकैफिनेटेड कॉफी का सेवन किया, जबकि 22% (109,767) ने कोई भी कॉफी नहीं पी। अध्ययन की इस अवधि के दौरान, क्रोनिक लिवर रोग के 3,600 मामले सामने आए, जिनमें 301 मौतें भी शामिल थीं। इसके अलावा क्रोनिक लिवर रोग या स्टीटोसिस (जिसे फैटी लिवर रोग भी कहते हैं) के 5,439 मामले और एक प्रकार के लिवर कैंसर, हेपेटोसेलुलर कार्सिनोमा के 184 मामले भी दर्ज किए गए।
शोधकर्ताओं ने पाया कि कॉफी न पीने वालों की तुलना में कॉफी पीने वाले लोगों में क्रोनिक लिवर रोग का जोखिम 21% कम, क्रोनिक या फैटी लिवर रोग का जोखिम 20% कम, और क्रोनिक लिवर रोग से मृत्यु का जोखिम 49% कम था।
| श्रेणी | संख्या (प्रतिशत) | विवरण |
|---|---|---|
| कुल प्रतिभागी | 494,585 | अध्ययन में शामिल कुल लोग |
| कॉफी पीने वाले प्रतिभागी | 384,818 (78%) | ग्राउंड, इंस्टेंट, या डीकैफिनेटेड कॉफी |
| कॉफी न पीने वाले प्रतिभागी | 109,767 (22%) | कोई भी प्रकार की कॉफी नहीं पी |
अध्ययन में यह भी सामने आया कि ग्राउंड कॉफी पीने वाले लोगों को सबसे ज्यादा फायदा मिला। इसका कारण यह है कि ग्राउंड कॉफी में कहवेओल (Kahweol) और कैफेस्टोल (cafestol) नामक तत्व अधिक मात्रा में पाए जाते हैं, जो जानवरों में क्रोनिक लिवर रोग के खिलाफ फायदेमंद साबित हुए हैं।
हालांकि, इंस्टेंट कॉफी में कहवेओल और कैफेस्टोल की मात्रा कम होती है फिर भी यह क्रोनिक लिवर रोग के जोखिम को कम करने में सहायक पाई गई। भले ही इसका फ़ायदा ग्राउंड कॉफी जितना न हो, लेकिन फिर भी यह लाभ पहुंचाती है।
| रोग का प्रकार | मामले (संख्या) | विवरण |
|---|---|---|
| क्रोनिक लिवर रोग | 3,600 | इनमें से 301 मौतें हुईं |
| क्रोनिक लिवर रोग या स्टीटोसिस (फैटी लिवर) | 5,439 | वसा युक्त लिवर से संबंधित समस्याएं |
| हेपेटोसेलुलर कार्सिनोमा (लिवर कैंसर) | 184 | लिवर कैंसर का एक प्रकार |
प्रमुख लेखक, डॉ. ओलिवर कैनेडी ने कहा, कॉफी आसानी से उपलब्ध है और हमारे अध्ययन से मिलने वाले लाभों का मतलब यह हो सकता है कि यह क्रोनिक लिवर रोग के लिए एक संभावित निवारक उपचार प्रदान कर सकती है। यह उन देशों में विशेष रूप से मूल्यवान होगा जहां कम आय है और स्वास्थ्य देखभाल तक पहुंच कम है और जहां क्रोनिक लिवर रोग का बोझ सबसे ज्यादा है।
तो अगली बार जब आप अपनी कॉफी का कप उठाएं, तो याद रखें कि यह सिर्फ एक पेय नहीं, बल्कि आपके लिवर के लिए एक सुरक्षा कवच भी हो सकता है! लेकिन हां, किसी भी चीज की अति अच्छी नहीं होती। संतुलित मात्रा में ही सेवन करें और यदि आपको कोई स्वास्थ्य समस्या है तो अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें।
कॉफी की मात्रा नहीं, समय जरूरी