Congo Virus Outbreak: पाकिस्तान के कराची शहर में कांगो वायरस (CCHF) से पहली मौत ने हड़कंप मचा दिया है। ईद-उल-अजहा से पहले हुई इस मौत ने स्वास्थ्य अधिकारियों की भी चिंता बढ़ा दी है, क्योंकि इस दौरान जानवरों की मंडियां लगती हैं जहां से यह वायरस फैलने का खतरा सबसे ज्यादा होता है।
Congo Virus Outbreak: आजकल जिस स्पीड से बिमारियां बढ़ रही है उसमें खुद को सुरक्षित रख पाना भी एक चुनौती बन गया है। हाल ही में कराची के सिंध संक्रामक रोग अस्पताल में एक लड़के को तेज बुखार की वजह से भर्ती कराया गया था। जांच के बाद पता चला कि वह क्रिमियन-कांगो हेमोरेजिक फीवर (CCHF) यानी कांगो वायरस से संक्रमित था। इलाज के दौरान उसकी मृत्यु हो गई। पाकिस्तान में हर साल त्योहारों के वक्त जब जानवरों की खरीद-फरोख्त बढ़ती है, तब इस वायरस का खतरा भी बढ़ जाता है। आइए जानते हैं कि यह वायरस क्या है और कैसे फैलता है?
कांगो वायरस बहुत ही खतरनाक बीमारी है जो इंसानों में एक कीड़े (Tick/चिचड़ी) के काटने से फैलती है। इसका वैज्ञानिक नाम क्रिमियन-कांगो हेमोरेजिक फीवर (CCHF) है। यह वायरस शरीर के अंदर खून बहने (bleeding) का कारण बनता है, इसलिए इसे हेमोरेजिक फीवर कहा जाता है।
कांगो वायरस को बहुत घातक माना जाता है क्योंकि इससे मरने वालों की संख्या काफी ज्यादा होती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, इससे संक्रमित होने वाले 10% से 40% लोगों की मौत हो जाती है। इसका सबसे बड़ा खतरा यह है कि यह बहुत तेजी से फैलता है। नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन के अनुसार, मृत्यु दर (Mortality Rate) के मामले में क्रिमियन-कांगो हेमोरेजिक फीवर (CCHF), कोविड-19 की तुलना में कहीं अधिक घातक है। जहां कोरोना वायरस संक्रामक अधिक है लेकिन उसकी मृत्यु दर कम है, वहीं कांगो वायरस संक्रमण फैलने की तुलना में जान लेने में अधिक खतरनाक साबित होता है।
डिसक्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह किसी क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प नहीं है। इसलिए पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।