Deadliest Disease: दुनिया में आए दिन नई-नई बीमारियों के नाम सुनने को मिलते हैं, जिनके इलाज पर लगातार रिसर्च जारी है। लेकिन एक ऐसी बीमारी है जो सबसे पुरानी होने के साथ-साथ सबसे जानलेवा भी मानी जाती है। हालांकि, हाल ही के एक शोध में यह साबित हुआ है कि अब इस बीमारी से लड़ना पहले से कहीं आसान हो सकता है।
Deadliest Disease: दुनिया में आए दिन नई-नई बीमारियों के नाम सुनने को मिलते हैं, जिनके इलाज पर लगातार रिसर्च जारी है। लेकिन एक ऐसी बीमारी है जो सबसे पुरानी होने के साथ-साथ सबसे जानलेवा भी मानी जाती है। टीबी यानी ट्यूबरकुलोसिस दुनिया की सबसे पुरानी और जानलेवा बीमारियों में से एक है, जो आज भी लाखों जिंदगियों को प्रभावित कर रही है। लेकिन अब इस खतरनाक बीमारी को लेकर एक नई उम्मीद की किरण नजर आई है। एमआईटी (Massachusetts Institute of Technology) के वैज्ञानिकों ने हाल ही में एक नई वैक्सीन पर अहम शोध किया है, जो टीबी के खिलाफ लड़ाई में गेम-चेंजर साबित हो सकती है
टीबी की मौजूदा वैक्सीन बीसीजी (BCG) साल 1921 में बनी थी। यानी लगभग सौ साल पुरानी। ये वैक्सीन बच्चों को तो कुछ हद तक सुरक्षा देती है, लेकिन बड़ों में इसका असर बहुत कम होता है। खासकर उन देशों में जहां टीबी ज्यादा फैलती है, वहां इसका बचाव लगभग न के बराबर है।
2025 में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, एमआईटी (MIT) के वैज्ञानिकों ने टीबी से लड़ाई के लिए एक नई दिशा दिखाई है।उन्होंने पाया कि टीबी बैक्टीरिया के 24 खास प्रोटीन टुकड़े शरीर की T-सेल्स को तेजी से सक्रिय करते हैं।इन्हीं टुकड़ों पर आधारित नई सिंथेटिक वैक्सीन तैयार की जा रही है।यह वैक्सीन शरीर को सिखाती है कि असली टीबी बैक्टीरिया को कैसे पहचानकर खत्म किया जाए।पुरानी बीसीजी की तुलना में यह वयस्कों को बेहतर सुरक्षा दे सकती है।
नई वैक्सीन शरीर की रोग-प्रतिरोधक शक्ति को पहले से तैयार कर देती है।यह ऐसे काम करती है जैसे सेना दुश्मन के आने से पहले उसकी चाल पहचान ले। यह वैक्सीन टीबी के खिलाफ शरीर को पहले से सतर्क बनाती है और शुरुआती परीक्षणों में युवाओं और बड़ों में लंबे समय तक सुरक्षा देने के संकेत मिले हैं।
वैज्ञानिकों का कहना है कि यह वैक्सीन अभी शुरुआती चरण में है। इसे इंसानों पर कई परीक्षणों से गुजरना होगा ताकि इसकी सुरक्षा और प्रभाव साबित हो सके। साथ ही, सीमित संसाधनों वाले देशों में इसका बड़े पैमाने पर उत्पादन और वितरण भी एक बड़ी चुनौती होगा।