
Dengue Fever And Platelets: डेंगू का नाम सुनते ही सबसे पहला ख्याल मन में तेज बुखार और गिरते प्लेटलेट्स का आता है। अक्सर देखा जाता है कि मरीज और उनके परिजन तब तक ही ज्यादा घबराते हैं जब तक शरीर में तेज बुखार रहता है। जैसे ही बुखार उतरता है, सब राहत की सांस लेते हैं और सोचते हैं कि मरीज अब खतरे से बाहर है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि मेडिकल साइंस और स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक असली सावधानी बुखार उतरने के बाद ही बरतनी होती है? डेंगू का सबसे खतरनाक दौर (Critical Phase) तब शुरू होता है जब मरीज का बुखार कम होने लगता है। आइए समझते हैं कि बुखार उतरने के बाद प्लेटलेट्स पर नजर रखना क्यों इतना जरूरी है और इस दौरान किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।
सीडीसी (Centers for Disease Control and Prevention - CDC) के अनुसार, डेंगू की बीमारी मुख्य रूप से तीन चरणों से गुजरती है। पहला चरण होता है बुखार का (Febrile Phase), जो आमतौर पर 2 से 7 दिनों तक रहता है। इसके बाद जैसे ही मरीज का तापमान सामान्य (98.6°F या 37°C) होने लगता है, तो लगता है कि बीमारी ठीक हो रही है। लेकिन CDC का कहना है कि बुखार उतरने के बाद के 24 से 48 घंटे मरीज के लिए सबसे ज्यादा संवेदनशील और नाजुक होते हैं। इसे मेडिकल भाषा में 'क्रिटिकल फेज' (Critical Phase) कहा जाता है। इसी दौरान डेंगू के गंभीर रूप लेने या प्लेटलेट्स के अचानक से नीचे गिरने का खतरा सबसे ज्यादा होता है।
मेयो क्लिनिक (Mayo Clinic) के अनुसार, डेंगू का वायरस शरीर में प्रवेश करने के बाद दो तरह से प्लेटलेट्स को नुकसान पहुंचाता है;
प्लेटलेट्स का मुख्य काम खून का थक्का (Clot) जमाना होता है ताकि शरीर के अंदर या बाहर खून का बहाव न हो। जब प्लेटलेट्स की संख्या तेजी से गिरती है, तो शरीर में ब्लीडिंग (रक्तस्राव) का जोखिम काफी बढ़ जाता है।
सीडीसी के मुताबिक, क्रिटिकल फेज में सिर्फ प्लेटलेट्स ही कम नहीं होते, बल्कि रक्त वाहिकाओं (Blood Vessels) की दीवारें कमजोर पड़ जाती हैं। इससे खून का तरल हिस्सा यानी प्लाज्मा नसों से रिसाव (Plasma Leakage) करके पेट या फेफड़ों के आसपास जमा होने लगता है। इससे मरीज का ब्लड प्रेशर अचानक से बहुत कम हो सकता है और वह 'डेंगू शॉक सिंड्रोम' की चपेट में आ सकता है। प्लेटलेट्स की कमी और प्लाज्मा लीकेज मिलकर स्थिति को गंभीर बना देते हैं।
बुखार उतरने के बाद यदि मरीज में इनमें से कोई भी लक्षण दिखे, तो इसे आम कमजोरी समझने की भूल न करें। यह गंभीर डेंगू (Severe Dengue) के संकेत हो सकते हैं;
एक सामान्य इंसान के शरीर में प्लेटलेट्स की संख्या 1.5 लाख से 4.5 लाख प्रति माइक्रोलीटर होती है। डेंगू में यह संख्या घटकर 50,000 या कभी-कभी 20,000 से भी नीचे चली जाती है। हालांकि, डॉक्टर केवल प्लेटलेट्स की संख्या देखकर ही इलाज तय नहीं करते, बल्कि मरीज के पूरे लक्षण और 'हेमेटोक्रिट' (Hematocrit) लेवल पर भी नजर रखते हैं। अगर प्लेटलेट्स कम भी हो रहे हों, लेकिन मरीज सही से तरल पदार्थ (Fluids) ले रहा है और उसमें कोई ब्लीडिंग का लक्षण नहीं है, तो केवल घर पर आराम और सही देखभाल से भी प्लेटलेट्स वापस बढ़ने लगते हैं।
मरीज को पानी, नारियल पानी, ओआरएस (ORS), नींबू पानी और ताजा सूप पिलाते रहें। शरीर में पानी की कमी न होने देना ही सबसे बड़ा बचाव है। बुखार या शरीर दर्द के लिए केवल डॉक्टर से सलाह से ही दवाई लें। एस्पिरिन (Aspirin) या इबूप्रोफेन (Ibuprofen) जैसी दवाएं अपनी मर्जी से भूलकर भी न दें, क्योंकि ये खून को पतला करती हैं और ब्लीडिंग का खतरा बढ़ा सकती हैं। बुखार उतरने के बाद भी डॉक्टर की सलाह अनुसार हर 24 घंटे में ब्लड टेस्ट करवाते रहें ताकि प्लेटलेट्स और हीमोग्लोबिन के ट्रेंड का पता चल सके। मरीज को शारीरिक काम न करने दें और पूरी तरह आराम करने दें।