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Viral Pneumonia: फ्लू के बाद सांस लेने में दिक्कत को न करें नजरअंदाज, वायरल निमोनिया का हो सकता है संकेत; The lancet

Viral Pneumonia Symptoms: क्या फ्लू के बाद आपकी भी सांस फूल रही है? द लांसेट के मुताबिक इसे मामूली कमजोरी समझकर न छोड़ें, यह वायरल निमोनिया (Viral Pneumonia Symptoms) का संकेत हो सकता है।
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भारत

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Nidhi Yadav

Jul 10, 2026

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फ्लू के बाद सांस लेने में दिक्कत को न करें नजरअंदाज, वायरल निमोनिया हो सकता है- प्रतीकात्मक तस्वीर

Viral Pneumonia Prevention: सर्दियों के मौसम में या मौसम बदलते ही सर्दी-खांसी, जुकाम और फ्लू (Flu) होना एक आम बात है। अमूमन लोग पैरासिटामोल या कफ सिरप लेते हैं और हफ्ते-दस दिन में ठीक हो जाते हैं। लेकिन अगर फ्लू ठीक होने के बाद भी आपकी सांस फूल रही है या छाती में भारीपन लग रहा है, तो संभल जाइए।

मेडिकल मैगजीन द लांसेट (The Lancet) और वेबएमडी (WebMD) की रिपोर्ट्स के मुताबिक, फ्लू के बाद सांस की तकलीफ को नजरअंदाज करना जानलेवा हो सकता है। यह मामूली कमजोरी नहीं, बल्कि वायरल निमोनिया (Viral Pneumonia) का शुरुआती संकेत हो सकता है। आइए मेयो क्लिनिक से जानते हैं कि इसके लक्षण और बचाव के उपाय क्या होते हैं।

क्या होता है वायरल निमोनिया?

बहुत ही आसान शब्दों में कहें तो जब फ्लू का वायरस हमारे नाक और गले से होते हुए सीधे फेफड़ों (Lungs) तक पहुंच जाता है, तो वहां सूजन पैदा कर देता है। फेफड़ों के अंदर जो हवा की छोटी-छोटी थैलियां होती हैं, उनमें पानी या मवाद भर जाता है। इसी स्थिति को डॉक्टरों की भाषा में वायरल निमोनिया कहते हैं। इसके बाद शरीर को ऑक्सीजन मिलने में दिक्कत होने लगती है।

इन लक्षणों को भूलकर भी न करें नजरअंदाज

अगर फ्लू के शुरुआती लक्षणों के बाद आपको नीचे लिखी दिक्कतें महसूस हो रही हैं, तो तुरंत डॉक्टर से मिलें;

  • बैठे-बैठे या छोटा-मोटा काम करने पर ही हांफने लगना।
  • सांस लेते समय या खांसते वक्त सीने में चुभन जैसा दर्द होना।
  • सूखी या बलगम वाली खांसी जो समय के साथ बढ़ती जाए।
  • फ्लू ठीक होने के बाद दोबारा अचानक तेज बुखार आ जाना।
  • होंठ या नाखूनों का नीला पड़ना।

किन लोगों को ज्यादा खतरा?

वैसे तो वायरल निमोनिया किसी को भी हो सकता है, लेकिन छोटे बच्चे और बुजुर्ग जिनकी उम्र 2 साल से कम या 65 साल से ज्यादा है। कमजोर इम्यूनिटी वाले लोग जिन्हें शुगर, दिल की बीमारी या अस्थमा जैसी पुरानी बीमारियां हैं। प्रेग्नेंसी के दौरान शरीर का इम्यून सिस्टम थोड़ा धीमा काम करता है, इसलिए खतरा बढ़ जाता है। इन लोगों को वायरल निमोनिया का खतरा ज्यादा रहता है।

बचाव के लिए क्या करें?

हर साल फ्लू की वैक्सीन (Flu Shot) लगवाने से इसका खतरा काफी कम हो जाता है। फ्लू होने पर बिना डॉक्टर की सलाह के कोई भी एंटीबायोटिक दवा न खाएं, क्योंकि एंटीबायोटिक दवाएं वायरस पर असर नहीं करतीं। अगर घर में किसी को फ्लू है, तो उसे बाकी सदस्यों (खासकर बच्चों और बुजुर्गों) से थोड़ा अलग रखें और हाथों को बार-बार धोते रहें।

डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।