
Cracker Burn First Aid: दीपावली का नाम आते ही मन में दीयों की रोशनी, मिठाइयों की खुशबू और पटाखों की गूंज आ जाती है। बच्चों से लेकर बड़ों तक, हर कोई इस त्योहार के रंग में रंगा होता है। लेकिन इस चकाचौंध और मस्ती के बीच अगर जरा सी भी चूक हो जाए, तो खुशियां पल भर में मातम में बदल सकती हैं। हर साल दिवाली के दिन अस्पतालों के इमरजेंसी वार्ड में पटाखों से जलने या आंखों में चोट लगने के ढेरों केस आते हैं। थोड़ी सी अक्लमंदी और सूझबूझ आपको और आपके परिवार को बड़े हादसे से बचा सकती है। आइए जानते हैं कि इस दिवाली किन बातों का ध्यान रखना है ताकि जश्न में कोई खलल न पड़े।
पटाखे हमेशा खुली जगह पर ही अच्छे लगते हैं और वहीं इनकी सुरक्षा भी है।
घर के सामने बड़ा मैदान हो, पार्क हो या कोई खुली गली, ऐसी जगहों का चुनाव करें।
तंग गलियां, गाड़ियों (कार या बाइक) के ठीक बगल में, बिजली के तारों के नीचे या ट्रांसफार्मर के पास कभी पटाखे न जलाएं।
घर के आस-पास पेट्रोल, डीजल, गैस सिलेंडर या कोई भी ऐसी चीज न रखी हो जो आग पकड़ ले। एक चिंगारी बड़ा नुकसान करा सकती है।
Association of Plastic Surgeons of India (एोसिएशन ऑफ़ प्लास्टिक सर्जन ऑफ इंडिया या भारतीय प्लास्टिक सर्जन संघ) के मुताबिक, उत्साह में लोग अक्सर वो गलतियां कर बैठते हैं जो भारी पड़ सकती हैं। रॉकेट, अनार या सुतली बम को कभी भी हाथ में पकड़कर न जलाएं। इन्हें लंबी छड़ या जमीन पर सही से रखकर ही दूर से जलाएं। अगर कोई पटाखा जलते-जलते बीच में ही बुझ जाए, तो उसके पास तुरंत दोबारा मत जाइए। अक्सर लोग जाकर देखने लगते हैं और वो अचानक फट जाता है। ऐसे 'मिसफायर' हुए पटाखे पर दूर से ही एक बाल्टी पानी या रेत डाल दें। पटाखा जलाने बैठें तो घर के बाहर एक बाल्टी पानी, पानी से भरी बोतल और थोड़ी सी रेत (बालू) हमेशा अपने पास रखें। कभी भी आग भड़के, तो ये तुरंत काम आएंगे।
बचपन का रोमांच ही अलग होता है, और बच्चे पटाखों को लेकर सबसे ज्यादा बेपरवाह होते हैं। छोटे बच्चों को कभी भी अकेले पटाखे न जलाने दें। वे फुलझड़ी भी जला रहे हों, तो घर का कोई बड़ा उनके पास खड़ा होना चाहिए। बच्चों को सख्त हिदायत दें कि वे पटाखों या तीलियों को अपनी जेब में न रखें। जलते हुए पटाखे एक-दूसरे की तरफ फेंकने की जिद पर बिल्कुल रोक लगाएं।
आजकल प्रदूषण और सेहत को ध्यान में रखते हुए मार्केट में ग्रीन क्रैकर्स (Green Crackers) मिलते हैं। नॉर्मल पटाखों की तरह इनमें खतरनाक केमिकल (जैसे बेरियम नाइट्रेट) नहीं होते या बहुत कम मात्रा में होते हैं। इनसे धुआं भी कम निकलता है और आवाज भी कम होती है। हमेशा किसी भरोसेमंद दुकान से खरीदें। डब्बे पर सीएसआईआर-नीरी (CSIR-NEERI) का लोगो और क्यूआर कोड चेक करके ही असली ग्रीन पटाखे लें।
बर्न एसोसिएशन ऑफ अमेरिका और मेयो क्लिनिक के अनुसार, अगर किसी को चोट लग जाए या कोई हिस्सा जल जाए, तो घबराने की बजाय तुरंत ये कदम उठाएं;
अगर जले हुए हिस्से पर कपड़ा चिपक गया है, तो उसे जोर से खींचकर न निकालें। डॉक्टर पर छोड़ दें। अगर आंख में बारूद या चिंगारी चली जाए, तो आंख को बिल्कुल न रगड़ें। सादे पानी से हल्के हाथ से धोएं और तुरंत किसी डॉक्टर (आई स्पेशलिस्ट) के पास ले जाएं। अगर जख्म गहरा है, छाले पड़ गए हैं या चमड़ी काली पड़ रही है, तो घर पर इलाज करने की बजाय सीधे अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड भागें।