
Firecracker Burn: दिवाली का मतलब है रोशनी, खुशियां और आतिशबाजी। लेकिन जरा-सी लापरवाही इस उल्लास को पल भर में गंभीर दर्द और अस्पताल के चक्कर में बदल सकती है। हर साल दिवाली की रात पटाखों की चमक के पीछे जलने और आंखों की चोटों के कई मामले सामने आते हैं। अगर हमें सही वक्त पर सही फर्स्ट एड यानी प्राथमिक उपचार का पता हो, तो नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता है। आइए जानते हैं कि पटाखे चलाते वक्त या किसी दुर्घटना के दौरान ऐसी स्थिति बन जाए, तो आपको तुरंत क्या कदम उठाने चाहिए और किन गलतियों से बचना बेहद जरूरी है।
मेयो क्लिनिक के मुताबिक, अगर त्वचा का कोई हिस्सा पटाखे या दीये की लौ से जल जाता है, तो सबसे पहले घबराएं नहीं। तुरंत निम्नलिखित कदम उठाएं;
फर्स्ट एड के नाम पर लोग अक्सर ऐसे घरेलू नुस्खे अपना लेते हैं जो समस्या को और गंभीर बना देते हैं, एनएचएस के अनुसार, जले हुए हिस्से पर कभी भी सीधी बर्फ न रगड़ें। इससे रक्त संचार रुक सकता है और त्वचा की कोशिकाएं और ज्यादा डैमेज हो सकती हैं। टूथपेस्ट, मक्खन, तेल, हल्दी या मलहम जैसी चीजें लगाने से बचें। ये हवा को रोकते हैं और घाव में बैक्टीरिया पनपने का कारण बनते हैं। अगर फफोले (Blisters) पड़ जाएं, तो उन्हें बिल्कुल न फोड़ें। फफोला त्वचा की एक प्राकृतिक सुरक्षा परत है जो संक्रमण से बचाती है।
मेयो क्लिनिक के मुताबिक, हर बर्न केस घर पर ठीक नहीं हो सकता। निम्न स्थितियों में मरीज को फौरन डॉक्टर या इमरजेंसी वार्ड ले जाएं;
अमेरिकन एकेडमी ऑफ ऑप्थैल्मोलॉजी (American Academy of Ophthalmology) के अनुसार, पटाखों की चिंगारी, बारूद या धुआं सीधे तौर पर आंखों को नुकसान पहुंचा सकता है;
त्योहार के सीजन में घर पर एक बेसिक फर्स्ट एड किट तैयार रखना समझदारी है:
याद रखें, प्राथमिक उपचार केवल स्थिति को बिगड़ने से रोकता है, यह पूर्ण इलाज का विकल्प नहीं है। यदि दर्द लगातार बढ़ रहा हो, घाव से पानी या मवाद आने लगे, या आंखों की रोशनी धुंधली लगे, तो बिना एक पल गंवाए अस्पताल का रुख करें। सतर्क रहें, सुरक्षित रहें और अपनों के साथ एक खुशहाल व सुरक्षित दिवाली मनाएं।