
AQI Diwali: दीपों का त्योहार दिवाली हम सबके लिए बहुत आनंद का है, लेकिन इसके ठीक आसपास का समय हमारे फेफड़ों के लिए भी परीक्षा के बराबर ही होता है। आतिशबाजी, पटाखों का धुआं, सर्दियों की शुरुआत और हवा मिलकर आसमान में एक ऐसी परत बना देते हैं, जिससे सांस लेने में भी परेशानी होती है खासकर अस्थमा, एलर्जी और फेफड़ों की बीमारियों वाले लोगों में। इस मौसम में आपकी थोड़ी सी लापरवाही आपको अस्पताल तक पहुंचा सकती है। आइए जानते हैं कि इस फेस्टिव सीजन में अपनी और अपने परिवार की सेहत की हिफाजत कैसे करें साथ इस समय प्रदूषण ज्यादा क्यों बढ़ता है और किन लोगों को ज्यादा खतरा होता है ।
दिवाली के समय हवा के खराब होने के पीछे कई वजहें एक साथ मिलती हैं। इस दौरान भारी मात्रा में पटाखों फोड़ने से हवा में सल्फर डाइऑक्साइड, कार्बन मोनोऑक्साइड और जहरीले मेटल्स के बारीक कण (PM2.5 और PM10) घुल जाते हैं। इसके साथ ही, उत्तर भारत में इस मौसम में धान की पराली का धुआं और तापमान में गिरावट (ठंडी हवा का भारी होना) मिलकर प्रदूषण के कणों को जमीन के करीब बांध देते हैं। Asthma and Allergy Foundation of America के अनुसार, हवा की गति कम होने के कारण यह स्मॉग (धुंध और धुआं) कई दिनों तक हवा में ही लटका रहता है।
यह जहरीली हवा हर किसी के लिए नुकसानदायक है, लेकिन कुछ खास लोगों पर इसका असर बहुत घातक हो सकता है;
सेंटर फॉर इंटीग्रेटिव हेल्थ (Center for Integrative Health) और अमेरिकन होम शील्ड (American Home Shield) के मुताबिक, बाहर का प्रदूषण तो खतरनाक है ही, घर के अंदर की हवा भी सुरक्षित नहीं रहती। घर की हवा को शुद्ध रखने के लिए ये कदम उठाएं;
एयरली ऑर्गनाइजेशन की मानें तो साधारण कपड़ा या सर्जिकल मास्क जहरीले प्रदूषण के बारीक कणों (PM2.5) को नहीं रोक पाते। जब भी घर से बाहर निकलना पड़े, हमेशा N95 या N99 मास्क ही पहनें। यह मास्क हवा के 95% से ज्यादा सूक्ष्म कणों को फिल्टर कर देता है। जब आप सुबह बाहर निकलें या ऐसे इलाके में हों जहां आतिशबाजी का धुआं ज्यादा हो, तो मास्क को नाक और मुंह पर पूरी तरह फिट करके पहनें। यह सलाह Airly के एयर पॉल्यूशन मास्क गाइडलाइंस पर भी आधारित है।
आम दिनों में सुबह की सैर सेहत के लिए अच्छी होती है, लेकिन प्रदूषण के दिनों में यह खतरनाक साबित हो सकती है। सुबह के वक्त तापमान कम होने के कारण प्रदूषण के कण जमीन के सबसे करीब होते हैं। इस समय वॉक करने पर आप ज्यादा गहरी सांस लेते हैं, जिससे जहरीला धुआं सीधे फेफड़ों में उतर जाता है। अगर एक्सरसाइज करनी ही है, तो धूप निकलने के बाद (दोपहर में) जब हवा थोड़ी ऊपर उठे, तब घर के अंदर ही योग, स्ट्रेचिंग या ट्रेडमिल का सहारा लें।
लापरवाही जानलेवा साबित हो सकती है। अगर आपको या आपके परिवार में किसी को निम्नलिखित लक्षण दिखें, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें;
त्योहार हमारी जिंदगी में उमंग और खुशियां लेकर आते हैं, लेकिन खुशी का यह मतलब बिल्कुल नहीं है कि हम अपनी और अपने परिवार की सेहत से समझौता कर लें। दिवाली का असली आनंद तभी है जब रोशनी भी हो और सुरक्षा भी। जिस तरह हम अपने घरों को साफ करते हैं, उसी तरह इस बार संकल्प लें कि हम अपने फेफड़ों और पर्यावरण को भी जहरीले धुएं से बचाएंगे।