स्वास्थ्य

 AQI Diwali: दिवाली के आसपास वायु प्रदूषण क्यों बढ़ता है? AAFA से जानें AQI, सही मास्क, एक्सरसाइज के समय से जुड़ी बातें

AQI Diwali: दिवाली पर जहरीले प्रदूषण से खुद को और परिवार को कैसे बचाएं? अस्थमा एंड एलर्जी फाउंडेशन ऑफ अमेरिका (Asthma and Allergy Foundation of America), सेंटर फॉर इंटीग्रेटिव हेल्थ (Center for Integrative Health) और अमेरिकन होम शील्ड (American Home Shield) से जानें AQI का हाल, सही N95 मास्क चुनने के तरीके, घर की हवा शुद्ध करने के उपाय और डॉक्टर के पास जाने के जरूरी संकेत।
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Updated: 5 Nov 2026, 8:00 AM IST
N95 मास्क पहने महिला, आतिशबाजी, प्रदूषण और AQI मीटर का संकेत दिखाता हुआ दृश्य।
दिवाली के दौरान बढ़ते वायु प्रदूषण, AQI के खतरे और बचाव के तरीकों (जैसे N95 मास्क पहनना और प्रदूषण में बाहर एक्सरसाइज से बचना) को दर्शाती सांकेतिक तस्वीर। (Source- Chatgpt)

AQI Diwali: दीपों का त्योहार दिवाली हम सबके लिए बहुत आनंद का है, लेकिन इसके ठीक आसपास का समय हमारे फेफड़ों के लिए भी परीक्षा के बराबर ही होता है। आतिशबाजी, पटाखों का धुआं, सर्दियों की शुरुआत और हवा मिलकर आसमान में एक ऐसी परत बना देते हैं, जिससे सांस लेने में भी परेशानी होती है खासकर अस्थमा, एलर्जी और फेफड़ों की बीमारियों वाले लोगों में। इस मौसम में आपकी थोड़ी सी लापरवाही आपको अस्पताल तक पहुंचा सकती है। आइए जानते हैं कि इस फेस्टिव सीजन में अपनी और अपने परिवार की सेहत की हिफाजत कैसे करें साथ इस समय प्रदूषण ज्यादा क्यों बढ़ता है और किन लोगों को ज्यादा खतरा होता है ।

1. दिवाली के आसपास वायु प्रदूषण क्यों बढ़ता है और हवा की गुणवत्ता किन कारणों से बिगड़ती है?

दिवाली के समय हवा के खराब होने के पीछे कई वजहें एक साथ मिलती हैं। इस दौरान भारी मात्रा में पटाखों फोड़ने से हवा में सल्फर डाइऑक्साइड, कार्बन मोनोऑक्साइड और जहरीले मेटल्स के बारीक कण (PM2.5 और PM10) घुल जाते हैं। इसके साथ ही, उत्तर भारत में इस मौसम में धान की पराली का धुआं और तापमान में गिरावट (ठंडी हवा का भारी होना) मिलकर प्रदूषण के कणों को जमीन के करीब बांध देते हैं। Asthma and Allergy Foundation of America के अनुसार, हवा की गति कम होने के कारण यह स्मॉग (धुंध और धुआं) कई दिनों तक हवा में ही लटका रहता है।

2. दिवाली के दौरान बढ़ते वायु प्रदूषण से किन लोगों को सबसे ज्यादा खतरा है?

यह जहरीली हवा हर किसी के लिए नुकसानदायक है, लेकिन कुछ खास लोगों पर इसका असर बहुत घातक हो सकता है;

  • बच्चों के फेफड़े अभी विकसित हो रहे होते हैं और वे बड़ों की तुलना में तेजी से सांस लेते हैं, जिससे वे दूषित हवा को ज्यादा अंदर खींचते हैं।
  • उम्र के साथ फेफड़ों की क्षमता कम हो जाती है, जिससे अस्थमा या दिल की बीमारियां गंभीर रूप ले सकती हैं।
  • अस्थमा और सीओपीडी मरीज।
  • गर्भवती महिलाएं।

3. दिवाली के समय घर के अंदर की हवा साफ और बेहतर रखने के लिए कौन-से उपाय अपनाएं?

सेंटर फॉर इंटीग्रेटिव हेल्थ (Center for Integrative Health) और अमेरिकन होम शील्ड (American Home Shield) के मुताबिक, बाहर का प्रदूषण तो खतरनाक है ही, घर के अंदर की हवा भी सुरक्षित नहीं रहती। घर की हवा को शुद्ध रखने के लिए ये कदम उठाएं;

  • दरवाजे-खिड़कियां बंद रखें।
  • इंडोर प्लांट्स लगाएं।
  • एयर प्यूरीफायर का इस्तेमाल।
  • झाड़ू लगाने से धूल और पीएम 2.5 के कण हवा में उड़ते हैं, इसलिए वैक्यूम क्लीनर या गीले पोछे का ही इस्तेमाल करें।

4. प्रदूषण से बचने के लिए कौन-सा मास्क पहनें और इसे कब इस्तेमाल करना सबसे जरूरी है?

एयरली ऑर्गनाइजेशन की मानें तो साधारण कपड़ा या सर्जिकल मास्क जहरीले प्रदूषण के बारीक कणों (PM2.5) को नहीं रोक पाते। जब भी घर से बाहर निकलना पड़े, हमेशा N95 या N99 मास्क ही पहनें। यह मास्क हवा के 95% से ज्यादा सूक्ष्म कणों को फिल्टर कर देता है। जब आप सुबह बाहर निकलें या ऐसे इलाके में हों जहां आतिशबाजी का धुआं ज्यादा हो, तो मास्क को नाक और मुंह पर पूरी तरह फिट करके पहनें। यह सलाह Airly के एयर पॉल्यूशन मास्क गाइडलाइंस पर भी आधारित है।

5. दिवाली के आसपास प्रदूषण बढ़ने पर सुबह की सैर और एक्सरसाइज करने का सही समय क्या है?

आम दिनों में सुबह की सैर सेहत के लिए अच्छी होती है, लेकिन प्रदूषण के दिनों में यह खतरनाक साबित हो सकती है। सुबह के वक्त तापमान कम होने के कारण प्रदूषण के कण जमीन के सबसे करीब होते हैं। इस समय वॉक करने पर आप ज्यादा गहरी सांस लेते हैं, जिससे जहरीला धुआं सीधे फेफड़ों में उतर जाता है। अगर एक्सरसाइज करनी ही है, तो धूप निकलने के बाद (दोपहर में) जब हवा थोड़ी ऊपर उठे, तब घर के अंदर ही योग, स्ट्रेचिंग या ट्रेडमिल का सहारा लें।

6. प्रदूषण के दौरान सांस फूलने, सीने में जकड़न या खांसी बढ़ने पर कब डॉक्टर के पास जाएं?

लापरवाही जानलेवा साबित हो सकती है। अगर आपको या आपके परिवार में किसी को निम्नलिखित लक्षण दिखें, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें;

  • सांस लेने में बहुत ज्यादा तकलीफ होना या सीने में भारीपन/जकड़न महसूस होना।
  • लगातार तेज खांसी आना या खांसते समय बलगम के साथ खून आना।
  • सामान्य से ज्यादा तेज दिल की धड़कन या चक्कर आना।
  • इनहेलर लेने के बावजूद अस्थमा के लक्षणों का कंट्रोल न होना।

त्योहार हमारी जिंदगी में उमंग और खुशियां लेकर आते हैं, लेकिन खुशी का यह मतलब बिल्कुल नहीं है कि हम अपनी और अपने परिवार की सेहत से समझौता कर लें। दिवाली का असली आनंद तभी है जब रोशनी भी हो और सुरक्षा भी। जिस तरह हम अपने घरों को साफ करते हैं, उसी तरह इस बार संकल्प लें कि हम अपने फेफड़ों और पर्यावरण को भी जहरीले धुएं से बचाएंगे।

डिस्क्लेमर
इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ओपिनियन का विकल्प नहीं है। पाठकों को सलाह दी जाती है कि वे कोई भी दवा, उपचार या नुस्खा अपनी मर्जी से ना आजमाएं। इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है।
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