कई लोगों ने बिना किसी मान्यता के अपनी आंखें दान की हैं। ऐसे लोग मूक, लेकिन सच्चे नायक हैं। मृत्यु के बाद भी, वे जरूरतमंदों को दृष्टि का उपहार देते हैं। इस मौन क्रांति को जारी रखें।
-कॉर्नियल ब्लाइंडनेस के 20 लाख लोगों में 12 फीसदी बच्चे
Bengaluru के पुलिस आयुक्त दयानंद बी. Dayanand B ने कहा कि नेत्रदान Eye Donation मानवता के लिए सबसे महान उपहार है। कई लोगों ने बिना किसी मान्यता के अपनी आंखें दान की हैं। ऐसे लोग मूक, लेकिन सच्चे नायक हैं। मृत्यु के बाद भी, वे जरूरतमंदों को दृष्टि का उपहार देते हैं। इस मौन क्रांति को जारी रखें।
वे मंगलवार को शहर के नारायण नेत्रालय अस्पताल में मान्यता व पुरस्कार वितरण समारोह का उद्घाटन करने के बाद संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि ज्यादा से ज्यादा लोगों को इस महादान के लिए आगे आना चाहिए। दूसरों को भी प्रेरित करना चाहिए।
हर किसी को अपनी आंखें दान करनी चाहिए
फिल्म निर्माता और कर्नाटक फिल्म चैंबर ऑफ कॉमर्स के पूर्व अध्यक्ष एस. ए. चिन्ने गौड़ा ने कहा, डॉ. राजकुमार और डॉ. भुजंग शेट्टी दोनों ही नेत्रदान के क्षेत्र में दूरदर्शी थे। इस उद्देश्य के लिए उनके संयुक्त प्रयासों ने कई युवाओं को प्रेरित किया है। हम में से हर किसी को अपनी आंखें दान करनी चाहिए।
कॉर्नियल ब्लाइंडनेस खत्म करना है तो...
अस्पताल के अध्यक्ष डॉ. रोहित शेट्टी ने कहा, भारत में अंधापन एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। 20 लाख से अधिक लोग कॉर्नियल ब्लाइंडनेस Corneal Blindness से प्रभावित हैं। इनमें 2.4 लाख बच्चे हैं। कॉर्नियल ब्लाइंडनेस को नेत्रदान के माध्यम से समाप्त किया जा सकता है। इसके लिए, हमने एक अभियान शुरू किया है, जिसके तहत आप अपने समुदाय के लोगों को नेत्रदान के लिए प्रोत्साहित करके दृष्टि के राजदूत बन सकते हैं।
यह पहल 'नेत्रदान योद्धा' बनने के लिए एक घंटे का प्रशिक्षण कार्यक्रम प्रदान करती है। कार्यक्रम पूरा करने वाले प्रतिभागियों को एक प्रमाण पत्र और बैज प्रदान किया जाएगा, जिससे उन्हें अपने समुदायों में नेत्रदान को सक्रिय रूप से बढ़ावा देने में सहायता मिलेगी। कार्यक्रम के दौरान स्वयंसेवकों, नेत्र संग्रह केन्द्रों और दानकर्ता परिवारों को उनके निरंतर और समर्पित प्रयासों के लिए सम्मानित किया गया।