
Eye Floaters: हाई ब्लड प्रेशर एक आम और गंभीर बीमारी है। कई लोग इसे सीरियस नहीं लेते, लेकिन अगर समय रहते ध्यान नहीं दिया गया तो यह हमारी आंखों को भी खराब कर सकता है। तो आइए जानते हैं कि कैसे हाई ब्लड प्रेशर से हमारी आंखों पर प्रभाव पड़ता है और इससे कैसे बचा जा सकता है।
हाई ब्लड प्रेशर आंख की रेटिना में मौजूद बारीक नसों पर दबाव डालता है। लंबे समय तक यह दबाव बढ़ने से इन नसों को नुकसान हो सकता है, जिसे हाइपरटेंसिव रेटिनोपैथी कहा जाता है। जब ये नसें कमजोर होकर फट जाती हैं या इनमें से खून और तरल रिसने लगता है, तो आंखों के नीचे अचानक फ्लोटर्स दिखने लगते हैं। ऐसे में आंखें कमजोर हो सकती है।
वहीं, डायबिटीज में ब्लड शुगर ज्यादा होने से रेटिना की छोटी-छोटी नसें खराब हो जाती हैं, जिसे डायबिटिक रेटिनोपैथी कहते हैं। शुरुआती स्टेज में ज्यादा लक्षण नहीं दिखते, लेकिन जैसे-जैसे बीमारी बढ़ती है, कमजोर नसें फट कर आंख के अंदर खून बहा सकती हैं, जिससे फ्लोटर्स और नजर की परेशानी होती है। कभी-कभी डायबिटीज में रेटिना अलग भी हो सकती है (रेटिनल डिटैचमेंट), जो इमरजेंसी स्थिति है और तुरंत इलाज जरूरी है।
नियमित आंखों की जांच कराएं, खासकर अगर आपको हाई BP या डायबिटीज है। हाई ब्लड प्रेशर वाले लोग कम नमक वाला संतुलित आहार लें, रोजाना व्यायाम करें और डॉक्टर की दवाई समय पर लें। डायबिटीज वाले लोग ब्लड शुगर नियंत्रित रखें, संतुलित आहार लें और डॉक्टर की सलाह मानें।
अगर आई फ्लोटर्स का कारण हाई BP या डायबिटीज से जुड़ा रेटिनल नुकसान है, तो डॉक्टर ये इलाज सुझा सकते हैं:
आई इंजेक्शन – रेटिना की सूजन कम करने और नई खराब नसों के बनने से रोकने के लिए।
लेजर ट्रीटमेंट – आंख के अंदर रिसाव को रोकने के लिए।
सर्जरी (विट्रेक्टॉमी) – खून या स्कार टिश्यू हटाने और रेटिना को ठीक करने के लिए।