
Kidney Disease (photo- gemini ai)
Kidney Disease: अक्सर जब डॉक्टर कहते हैं कि आपकी किडनी की रिपोर्ट नॉर्मल है, तो हमें राहत मिलती है। लगता है सब ठीक है। लेकिन क्या सच में नॉर्मल हमेशा सुरक्षित होने का संकेत होता है? एक नई रिसर्च बताती है कि ऐसा जरूरी नहीं है। कई बार नॉर्मल दिखने वाली रिपोर्ट के पीछे भी किडनी की गंभीर बीमारी का शुरुआती खतरा छुपा हो सकता है।
यह स्टडी स्वीडन के करोलिंस्का इंस्टीट्यूट के वैज्ञानिकों ने की और इसे जर्नल Kidney International में छापा गया। इसमें स्टॉकहोम इलाके के 11 लाख से ज्यादा वयस्कों के करीब 70 लाख eGFR टेस्ट का विश्लेषण किया गया। eGFR वह टेस्ट होता है जिससे पता चलता है कि किडनी खून को कितनी अच्छी तरह साफ कर रही है। रिसर्च में पता चला कि किसी व्यक्ति का eGFR भले ही नॉर्मल रेंज में हो, लेकिन अगर वह उसकी उम्र और जेंडर के हिसाब से कम है, तो आगे चलकर किडनी की बीमारी का खतरा बढ़ सकता है।
समस्या यह है कि लैब रिपोर्ट की नॉर्मल रेंज काफी चौड़ी होती है। इसमें उम्र और शरीर के फर्क को ठीक से नहीं देखा जाता।
इस स्टडी में वैज्ञानिकों ने उम्र और जेंडर के हिसाब से परसेंटाइल चार्ट बनाए, जैसे बच्चों की हाइट-वेट के चार्ट होते हैं। ताकि 55 साल के व्यक्ति की किडनी की तुलना 25 साल के व्यक्ति से न की जाए।
मान लीजिए आपकी उम्र 55 साल है और आपका eGFR 80 है। आमतौर पर डॉक्टर इसे नॉर्मल मानेंगे। लेकिन उम्र के हिसाब से यह वैल्यू 10वें परसेंटाइल पर आती है, यानी आपकी उम्र के 90% लोगों की किडनी आपसे बेहतर काम कर रही है। स्टडी के मुताबिक ऐसे लोगों में आगे चलकर गंभीर किडनी फेल होने का खतरा लगभग 3 गुना तक बढ़ सकता है।
क्रॉनिक किडनी डिजीज बहुत चालाक होती है। शुरुआती स्टेज में कोई खास लक्षण नहीं दिखते। कई लोगों को तब पता चलता है जब किडनी की आधी से ज्यादा ताकत खत्म हो चुकी होती है। दुनियाभर में 10-5% लोग किसी न किसी स्तर की किडनी बीमारी से जूझ रहे हैं और आने वाले सालों में यह बड़ी स्वास्थ्य समस्या बन सकती है।
रिसर्चर्स ने उम्र के हिसाब से eGFR समझने के लिए ऑनलाइन कैलकुलेटर और चार्ट भी बनाए हैं। लेकिन स्टडी में यह भी सामने आया कि कई ऐसे मरीज जिनका eGFR 60 से ऊपर था, उन्हें आगे का जरूरी यूरिन टेस्ट (एल्ब्यूमिन टेस्ट) ही नहीं कराया गया। अगर आपकी किडनी रिपोर्ट नॉर्मल आई है, तो घबराने की जरूरत नहीं है। लेकिन अगर वैल्यू आपकी उम्र के हिसाब से कम है, तो डॉक्टर से दोबारा बात करना समझदारी है। सही समय पर जांच, खानपान में बदलाव और लाइफस्टाइल सुधार से गंभीर किडनी बीमारी को रोका जा सकता है।
Published on:
06 Feb 2026 06:00 pm
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