
Fasting And Hormonal Health: सुबह के 8 बज रहे हैं। रसोई में चाय की चुस्कियां ली जा रही हैं, लेकिन आप घड़ी की सुइयों पर नजर टिकाए बैठी हैं अभी तो 10 बजने में दो घंटे बाकी हैं, तब तक पानी पीकर काम चलाना पड़ेगा। अगर आप भी वजन घटाने या पेट अंदर करने के चक्कर में रोज 16 घंटे तक भूखे पेट रहने (Intermittent Fasting) का ट्रेंड फॉलो कर रही हैं, तो रुकिए! देखा जाता है कि वजन कम करने के जुनून में महिलाएं बिना सोचे-समझे फास्टिंग शुरू तो कर देती हैं, लेकिन कुछ ही महीनों में उनके पीरियड मिस होने लगते हैं, बाल झड़ने लगते हैं या बेवजह चिड़चिड़ापन घर कर लेता है। असल में, सवाल यह नहीं है कि इंटरमिटेंट फास्टिंग असरदार है या नहीं, बल्कि सवाल यह है कि क्या यह आपके शरीर और आपके पीरियड्स के मिजाज से मेल खाती है?
पुरुषों का शरीर एक ही रफ्तार में काम करता है, लेकिन महिलाओं का शरीर हर हफ्ते अलग हार्मोनल साइकिल से गुजरता है।जब आप लगातार 16 घंटे तक कुछ नहीं खाती हैं, तो शरीर इसे भुखमरी या स्ट्रेस की स्थिति मान लेता है। stress बढ़ेगा, तो शरीर में कोर्टिसोल (Cortisol) नाम का स्ट्रेस हार्मोन भी तेजी से बढ़ेगा। जब दिमाग (हाइपोथैलेमस) को लगता है कि शरीर तनाव में है, तो वह एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन जैसे सेक्स हार्मोन्स का प्रोडक्शन धीमा कर देता है। नतीजा;
क्लीवलैंड क्लिनिक के अनुसार, यदि फास्टिंग के कारण या किसी अन्य वजह से आपके हार्मोन्स बिगड़ चुके हैं, तो रातों-रात कोई जादू नहीं होगा। लेकिन ये 4 व्यावहारिक कदम तेजी से राहत दे सकते हैं;
इंटरमिटेंट फास्टिंग कोई खराब तरीका नहीं है, लेकिन इसे बिना सोचे-समझे ब्लाइंड ट्रेंड की तरह फॉलो करना गलत है। हर महिला का शरीर, उसकी उम्र और उसका हार्मोनल प्रोफाइल अलग होता है। यदि आप गर्भवती हैं, स्तनपान करा रही हैं, या आपको ईटिंग डिसऑर्डर की हिस्ट्री रही है, तो फास्टिंग से दूरी बनाए रखें। अपने शरीर के संकेतों को सुनें अगर उपवास के दौरान आपको बहुत अधिक कमजोरी, चक्कर आना या पीरियड्स में गड़बड़ी महसूस हो, तो जबरदस्ती खुद पर दबाव न डालें।