स्वास्थ्य

Long Fasting Effects: लंबे समय तक व्रत रखने से शरीर पर क्या असर पड़ता है, हेल्थलाइन से समझें

Long Fasting Effects: नेचर रिसर्च, हेल्थलाइन और हार्वर्ड हेल्थ पब्लिशिंग जानें लंबे उपवास और नवरात्र के व्रतों से शरीर के भीतर क्या बदलाव आते हैं। फैट बर्निंग, ऑटोफेजी (सेल्स की सफाई) और सेहत से जुड़े वैज्ञानिक फायदे और सावधानियां पढ़ें।
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Oct 19, 2026
Navratri fasting health benefits and body changes during long fasts
लंबे समय तक व्रत शरीर को डिटॉक्स करने और ऑटोफेजी जैसी प्राकृतिक प्रक्रियाओं के जरिए सेहत सुधारने में भी मदद करता है- प्रतीकात्मक तस्वीर (Source- Freepik)

Long Fasting Effects: हम में से बहुत लोग नवरात्र के दिनों में नौ दिनों तक व्रत रखते हैं और रखना भी चाहिए क्योंकि धार्मिक आस्था के साथ ही इसके सेहत से जुड़े भी कई फायदे होते हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि 9 दिनों के लंबे उपवास के बाद शरीर पर क्या असर पड़ता है? खासकर उन लोगों में जो पूरे 9 दिन फलाहार पर रहते हैं। आजकल वजन घटाने, शरीर को डिटॉक्स करने और बीमारियों से बचने के लिए भी लोग 16 घंटे की इंटरमिटेंट फास्टिंग से लेकर 24, 48 या 72 घंटे तक का व्रत रख रहें हैं। आइए जानते हैं कि इतने लंबे व्रत के दौरान और इसके बाद शरीर पर क्या असर पड़ता है?

1. पहले 24 घंटे, फैट बर्निंग की प्रोसेस

नेचर रिसर्च के अनुसार, जब आप उपवास की शुरुआत करते हैं और अन्न (अनाज) का सेवन बंद कर सिर्फ फलाहार, जूस, सिंघाड़े या कुट्टू की चीजों पर रहते हैं, तो शरीर सबसे पहले अपने अंदर जमा ग्लूकोज का इस्तेमाल करता है। करीब 24 घंटे बीतते-बीतेत जब ग्लूकोज खत्म होने लगता है, तो शरीर अपनी जमा चर्बी (फैट) को ऊर्जा में बदलना शुरू कर देता है। यही वजह है कि व्रत के दौरान शरीर हल्का महसूस होने लगता है और वजन नियंत्रित रहने में मदद मिलती है।

2. ऑटोफेजी (Autophagy), शरीर के अंदर की सफाई

हेल्थलाइन के मुताबिक, लंबे व्रतों के दौरान शरीर में ऑटोफेजी की प्रक्रिया शुरू हो जाती है। इसे विज्ञान की भाषा में शरीर का खुद का कचरा साफ करने वाला अभियान कहा जाता है। इस दौरान शरीर की मजबूत कोशिकाएं पुरानी, क्षतिग्रस्त या अस्वास्थ्यकर कोशिकाओं को खत्म कर देती हैं और उनकी जगह नई और ऊर्जावान कोशिकाएं बनाती हैं। यह नेचुरल क्लींजिंग शरीर को अंदर से तरोताजा कर देती है।

3. पाचन तंत्र (Digestive System) को मिलता है आराम

हम तला-भुना, मसालेदार और लगातार खाते रहते हैं, जिससे हमारे पाचन तंत्र को कभी रेस्ट नहीं मिलता। व्रत के दौरान जब हम हल्का भोजन (जैसे फल, मखाना, साबूदाना या उबले आलू) सीमित मात्रा में खाते हैं, तो पेट और आंतों को रिलैक्स होने का पूरा मौका मिलता है। इससे एसिडिटी, कब्ज और भारीपन जैसी पेट की कई समस्याएं अपने आप ठीक होने लगती हैं।

4. व्रत के दौरान शुरुआती सुस्ती और कमजोरी क्यों होती है?

हार्वर्ड हेल्थ पब्लिशिंग के मुताबिक, शुरुआती दिनों में जब शरीर अचानक अपनी एनर्जी मैकेनिज्म को बदलता है (ग्लूकोज से फैट बर्निंग पर जाता है), तो कुछ लोगों को हल्का सिरदर्द, चक्कर आना, सुस्ती या कमजोरी महसूस हो सकती है। व्रत के नाम पर दिनभर खाली पेट रहने के बजाय पर्याप्त मात्रा में नींबू पानी, नारियल पानी, छाछ या सेंधा नमक वाला पानी पीते रहना चाहिए ताकि शरीर में डिहाइड्रेशन और इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी न हो।

क्या नवरात्र का उपवास हर किसी के लिए ठीक है?

अगर आप पूरी तरह स्वस्थ हैं, तो पारंपरिक सात्विक नवरात्र व्रत आपके लिए बहुत फायदेमंद है। लेकिन अगर आप टाइप-1 डायबिटीज, गंभीर लो-बीपी के मरीज हैं, कोई भारी दवाइयां ले रहे हैं या गर्भवती महिलाएं हैं, तो आपको डॉक्टर की सलाह के बिना सख्त उपवास रखने से बचना चाहिए।

डिस्क्लेमर
इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ओपिनियन का विकल्प नहीं है। पाठकों को सलाह दी जाती है कि वे कोई भी दवा, उपचार या नुस्खा अपनी मर्जी से ना आजमाएं। इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है।
Published on:
19 Oct 2026 09:15 am