
Fibromyalgia Symptoms: क्या आपके साथ कभी ऐसा होता है कि सुबह सोकर उठने के बाद भी ऐसा लगता है कि शरीर की थकान उतरी ही नहीं? पूरे बदन में, मांसपेशियों में एक अजीब सा मीठा-मीठा दर्द बना रहता है और ऐसा लगता है कि शरीर में कोई ताकत ही नहीं बची? अक्सर लोग इसे काम का तनाव या आम कमजोरी मानकर नजरअंदाज कर देते हैं या पेनकिलर खाकर काम चलाते रहते हैं। लेकिन अगर यह दर्द हफ्तों और महीनों तक बना रहे, तो यह फाइब्रोमायल्जिया (Fibromyalgia) नामक बीमारी का संकेत हो सकता है। आइए एनसीबीआइ और मेयो क्लिनिक से समझते हैं कि यह क्या है और इसे कैसे पहचानें।
एनसीबीआइ के अनुसार, फाइब्रोमायल्जिया कोई आम दर्द नहीं है। यह एक ऐसी क्रॉनिक यानी लंबे समय तक चलने वाली समस्या है, जिसमें इंसान को पूरे शरीर की मांसपेशियों और हड्डियों में लगातार दर्द महसूस होता है। इसमें असल में कोई चोट नहीं लगी होती, बल्कि हमारा दिमाग दर्द के सिग्नल्स को बहुत ज्यादा बढ़ा-चढ़ाकर महसूस करने लगता है। यानी जो हल्की सी छुअन या सामान्य खिंचाव दूसरों को महसूस भी नहीं होगा, वो फाइब्रोमायल्जिया के मरीज को बहुत तेज दर्द के रूप में महसूस होता है।
मेयो क्लिनिक के अनुसार, यह दर्द शरीर के दोनों तरफ (ऊपर और नीचे) कम से कम 3 महीने या उससे ज्यादा समय से लगातार बना रहता है। यह एक धीमा लेकिन हर वक्त रहने वाला दर्द होता है। आप चाहे 8 घंटे की पूरी नींद ले लें या दिनभर आराम करें, आपको हमेशा ऐसा लगेगा कि शरीर में ताकत ही नहीं है। दर्द के कारण गहरी नींद (Deep Sleep) नहीं आ पाती, जिससे सुबह उठने पर भी इंसान खुद को थका हुआ और अस्वस्थ महसूस करता है। इस बीमारी में ध्यान लगाने में दिक्कत होती है, चीजें याद नहीं रहतीं और दिमाग में हमेशा एक धुंधलापन सा (Mental Fog) महसूस होता है।
जैसा कि हमने पहले जाना, हमारे दिमाग और रीढ़ की हड्डी के काम करने के तरीके में बदलाव आ जाता है, जिससे दर्द का अहसास बढ़ जाता है। अगर परिवार में माता-पिता या किसी करीबी को यह समस्या रही हो, तो इसके होने की आशंका बढ़ जाती है। कई बार कोई गंभीर एक्सीडेंट, बड़ी सर्जरी या बहुत ज्यादा मानसिक तनाव (Depression या Trauma) के बाद यह बीमारी एक्टिव हो जाती है। पुरुषों के मुकाबले महिलाओं में फाइब्रोमायल्जिया होने की संभावना बहुत ज्यादा होती है।
फाइब्रोमायल्जिया को पूरी तरह खत्म करने की कोई जादू की छड़ी नहीं है, लेकिन अपनी लाइफस्टाइल में कुछ छोटे बदलाव करके इसे बहुत हद तक कंट्रोल किया जा सकता है;
पूरे शरीर में दर्द होने की कई और वजहें भी हो सकती हैं (जैसे विटामिन डी या बी12 की कमी, थायराइड आदि), इसलिए खुद से कोई भी पेनकिलर खाने के बजाय किसी अच्छे डॉक्टर से मिलें। डॉक्टर सही जांच करके आपको सही दवाइयां और थेरेपी बता सकते हैं, जिससे आप एक सामान्य और एक्टिव जिंदगी जी सकें।
डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।