Cancer Risk: अक्सर हम नाश्ते में या बच्चों को सेहतमंद मानकर फ्रूट जूस देते हैं, लेकिन नो ऐडेड शुगर वाले जूस भी शरीर में शुगर का लेवल तेजी से बढ़ा सकते हैं। जानिए क्यों साबुत फल खाना जूस पीने से कहीं ज्यादा बेहतर है।
Cancer Risk: सुबह का नाश्ता हो या बच्चों की छोटी-मोटी भूख, हम सबसे पहले फ्रूट जूस का गिलास थमा देते हैं। हमें लगता है कि इससे बेहतर और क्या होगा? लेकिन रुकिए! जिस जूस को आप अमृत समझ रहे हैं, वह असल में आपके और आपके बच्चों के शरीर में शुगर की बाढ़ ला रहा है। अगर आप भी डिब्बाबंद या बिना चीनी वाला जूस पीकर बेफिक्र हैं, तो यह खबर आपकी आंखें खोल देगी। हाल ही में कैंसर विशेषज्ञ डॉक्टर तरंग कृष्णा ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर एक वीडियो शेयर कर जानकारी दी है कि फ्रूट जूस जो आप बाहर से सस्ता समझकर खरीदते है असल में वो आपको धीरे धीरे कैंसर का मरीज बना रहा है।
जूस के डिब्बे पर लिखा No Added Sugar एक बड़ा झांसा हो सकता है। फलों में अपनी प्राकृतिक चीनी (फ्रुक्टोज) होती है। जब हम फल का जूस निकालते हैं, तो उसकी फाइबर निकल जाती है और सिर्फ मीठा पानी बचता है, जो खून में शुगर को तुरंत बढ़ा देता है।
छोटे बच्चों का शरीर इतनी भारी मात्रा में शुगर को प्रोसेस करने के लिए तैयार नहीं होता। इससे न केवल उनके दांत खराब होने का खतरा बढ़ता है, बल्कि कम उम्र में मोटापा और सुस्ती जैसी समस्याएं भी घेरने लगती हैं।
डॉक्टरों का मानना है कि फल को चबाकर खाना सबसे बेस्ट है। फल का फाइबर शुगर के सोखने की प्रक्रिया को धीमा कर देता है, जिससे शरीर को धीरे-धीरे ऊर्जा मिलती है। जूस पीने से वो फाइबर गायब हो जाता है और फायदा कम, नुकसान ज्यादा होता है।
अगर जूस पीना ही है, तो घर पर ताजा निकालें और उसमें फाइबर (गूदा) रहने दें। पैकेट वाले जूस से जितना हो सके दूरी बनाएं और अपने बच्चों को फल काटकर खाने की आदत डालें।
कैंसर विशेषज्ञ डॉक्टर तरंग कृष्णा के अनुसार जूस पीने का सीधा कैंसर का संबंध नहीं है लेकिन लंबे समय तक और गलत तरीके से आर्टिफिशियल फ्रूट जूस का सेवन अप्रत्यक्ष रूप से काफी हद तक इसका खतरा बढ़ा देता है।
डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।