स्वास्थ्य

पित्ताशय में गांठ जैसी दिख सकती है ये गैर-कैंसरकारी बीमारी, जानें Gallbladder Adenomyomatosis

Gallbladder Adenomyomatosis: गॉलब्लेडर में गांठ या सूजन की रिपोर्ट से न घबराएं। क्लीवलैंड क्लिनिक और साइंसडायरेक्ट से जानें क्या है गॉलब्लेडर एडेनोमायोमैटोसिस, इसके लक्षण, कारण और इलाज।
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Oct 07, 2026
Illustration of human gallbladder pain
गॉलब्लेडर एडेनोमायोमैटोसिस में पित्ताशय की दीवार मोटी हो जाती है जो अल्ट्रासाउंड में गांठ जैसी दिखती है- प्रतीकात्मक तस्वीर (Source- Freepik)

Gallbladder Adenomyomatosis: जब भी हम सोनोग्राफी या अल्ट्रासाउंड कराते हैं और रिपोर्ट में 'गॉलब्लेडर' (पित्ताशय) में किसी गांठ, सूजन या मोटाई का जिक्र मिलता है, तो मन में सबसे पहला डर कैंसर का आता है। पेट में जरा सी गांठ की बात सुनते ही कोई भी इंसान घबरा जाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि पित्ताशय की हर गांठ या उभार कैंसर नहीं होता? एक ऐसी ही स्थिति है जिसे गॉलब्लेडर एडेनोमायोमैटोसिस (Gallbladder Adenomyomatosis) कहा जाता है। यह पित्ताशय से जुड़ी एक ऐसी बीमारी है जो देखने में किसी गांठ या ट्यूमर जैसी लगती है, लेकिन यह पूरी तरह से गैर-कैंसरकारी (Non-cancerous) होती है। यह कोई कैंसर नहीं है और न ही इससे कैंसर फैलने का खतरा होता है। आइए समझते हैं कि एडेनोमायोमैटोसिस क्या है, यह क्यों होता है और इसका इलाज कैसे किया जाता है।

क्या होता है गॉलब्लेडर एडेनोमायोमैटोसिस?

क्लीवलैंड क्लिनिक के अनुसार, गॉलब्लेडर हमारे पेट के दाहिने हिस्से में लिवर के ठीक नीचे मौजूद छोटी सी थैली होती है, जिसका काम पित्त (Bile) को जमा करना होता है। इस थैली की अंदरूनी दीवार या परत में जब असामान्य रूप से कोशिकाएं (cells) बढ़ने लगती हैं और उसकी दीवार मोटी हो जाती है, तो वहां छोटे-छोटे गड्ढे या थैलीनुमा जगह बन जाती हैं। इन गड्ढों में पित्त जमा होने लगता है और कभी-कभी छोटे-छोटे क्रिस्टल या पथरी जैसे कण बन जाते हैं। अल्ट्रासाउंड की रिपोर्ट में यही मोटी हुई दीवार और गड्ढे किसी गांठ या ट्यूमर की तरह दिखाई देते हैं। इसी स्थिति को गॉलब्लेडर एडेनोमायोमैटोसिस कहा जाता है।

क्या यह बीमारी कैंसरकारी है?

साइंसडायरेक्ट के अनुसार, सबसे अच्छी और राहत की बात यह है कि यह कैंसर नहीं है। क्लीवलैंड क्लिनिक के मुताबिक, एडेनोमायोमैटोसिस एक 'बिनाइन' यानी गैर-कैंसरकारी बदलाव है। यह शरीर के अन्य हिस्सों में नहीं फैलता और न ही यह अपने आप में कोई जानलेवा बीमारी है। हालांकि, कई बार अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट में इसका रूप गॉलब्लेडर कैंसर से इतना मिलता-जुलता दिखता है कि डॉक्टर भी एक नजर में भ्रमित हो सकते हैं। इसीलिए, सही जांच करके यह पक्का करना बहुत जरूरी होता है कि यह सिर्फ एडेनोमायोमैटोसिस ही है या कुछ और।

इसके मुख्य लक्षण क्या हैं?

ज्यादातर मामलों में गॉलब्लेडर एडेनोमायोमैटोसिस के कोई भी लक्षण दिखाई नहीं देते। इंसान को पता भी नहीं चलता कि उसके पित्ताशय में ऐसा कोई बदलाव हुआ है। अक्सर जब मरीज किसी दूसरी बीमारी या पेट दर्द के लिए पेट का अल्ट्रासाउंड करवाता है, तब अचानक इसका पता चलता है। लेकिन अगर इसके लक्षण नजर आते भी हैं, तो वे गॉलब्लेडर की पथरी (Gallstones) जैसे ही होते हैं;

  • पेट के ऊपरी दाहिने हिस्से में दर्द होना।
  • जी मिचलाना और उल्टी।
  • गैस और बदहजमी।

यह क्यों होता है?

डॉक्टरों और वैज्ञानिकों के पास अभी तक इसका कोई एक सटीक कारण नहीं है। हालांकि, माना जाता है कि जब पित्ताशय के अंदर पित्त (Bile) का बहाव सही से नहीं होता या अंदरूनी दीवारों पर लंबे समय तक सूजन रहती है, तो पित्ताशय की परतें मोटी होने लगती हैं। पित्त की पथरी से पीड़ित लोगों में भी यह स्थिति ज्यादा देखने को मिलती है।

इसकी जांच और सही निदान कैसे होता है?

जैसा कि हमने जाना, यह बीमारी अक्सर गलती से या किसी अन्य जांच के दौरान पकड़ में आती है। इसकी सही पहचान के लिए डॉक्टर निम्नलिखित टेस्ट करवाने की सलाह दे सकते हैं;

  • अल्ट्रासाउंड (Ultrasound)।
  • एमआरआई (MRI / MRCP)।
  • सीटी स्कैन (CT Scan)।

इसका इलाज कैसे किया जाता है?

एडेनोमायोमैटोसिस का इलाज इस बात पर निर्भर करता है कि मरीज को कोई तकलीफ या लक्षण हैं या नहीं, अगर आपको पेट में कोई दर्द या दिक्कत नहीं है और यह केवल रिपोर्ट में आया है, तो किसी इलाज या सर्जरी की जरूरत नहीं होती। डॉक्टर समय-समय पर सिर्फ अल्ट्रासाउंड कराने की सलाह देते हैं ताकि स्थिति पर नजर रखी जा सके। मरीज को बार-बार पेट दर्द, उल्टी या पाचन की समस्या हो रही हो, या फिर साथ में पथरी भी मौजूद हो, तो डॉक्टर सर्जरी के जरिए पित्ताशय को बाहर निकालने (Cholecystectomy) की सलाह देते हैं। पित्ताशय निकल जाने के बाद मरीज पूरी तरह स्वस्थ हो जाता है और पाचन पर कोई खास असर नहीं पड़ता।

डिस्क्लेमर
इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ओपिनियन का विकल्प नहीं है। पाठकों को सलाह दी जाती है कि वे कोई भी दवा, उपचार या नुस्खा अपनी मर्जी से ना आजमाएं। इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है।
Published on:
07 Oct 2026 01:15 pm