Dehydration Symptoms: दिल्ली की भीषण गर्मी ने जान जोखिम में डाल दी है। सफदरजंग अस्पताल के एक ICU डॉक्टर ने अपनी आंखों देखी कहानी शेयर की है कि कैसे लोग डिहाइड्रेशन (पानी की कमी) की वजह से सीधे अस्पताल पहुंच रहे हैं। डॉक्टर का कहना है कि अगर आप प्यास लगने का इंतजार कर रहे हैं, तो आप पहले ही बहुत देर कर चुके हैं।
Dehydration Symptoms: दिल्ली-NCR की गर्मी अब सिर्फ पसीना नहीं निकाल रही, बल्कि लोगों को बीमार बना रही है। हम अक्सर सोचते हैं कि जब प्यास लगेगी, तब पानी पी लेंगे। लेकिन क्या आप जानते हैं? प्यास लगना इस बात का संकेत है कि आपका शरीर पहले ही सूख चुका है। आइए डॉक्टर बाबूलाल वर्मा (फिजिशियन) से जानते हैं कि गर्मी में कितना पानी पीना चाहिए।
यह कहानी एक 25 साल के मार्केटिंग एक्जीक्यूटिव की है, जिसका काम दिन भर अपनी बाइक पर एक क्लाइंट से दूसरे क्लाइंट के पास जाना है। दोपहर की तपती धूप में वह घंटों बाहर रहता था। उसे लगा कि इतनी गर्मी में खुद को बचाने के लिए खूब पानी पीना ही काफी है। वह दिन भर में करीब 5 लीटर सादा पानी पी जाता था, लेकिन वह एक बहुत बड़ी गलती कर रहा था, वह कुछ खा नहीं रहा था। सुबह की जल्दबाजी में उसका नाश्ता छूट जाता और दिन भर मीटिंग्स के चक्कर में वह लंच भी नहीं कर पाता था। वह केवल सादा पानी पी रहा था, न तो उसने कोई फल खाया, न ही नींबू-पानी या ORS जैसी कोई चीज ली। नतीजा यह हुआ कि इतने पानी के बावजूद उसकी तबीयत बुरी तरह बिगड़ गई।
जब हम पसीने में भीगते हैं, तो शरीर से सिर्फ पानी नहीं निकलता, बल्कि नमक भी बाहर निकल जाता है। वह लड़का सिर्फ सादा पानी पी रहा था। सादा पानी शरीर की प्यास तो बुझा सकता है, लेकिन पसीने में जो जरूरी नमक और मिनरल्स बह गए, उनकी भरपाई नहीं कर सकता। बिना कुछ खाए सिर्फ ढेर सारा पानी पीने से शरीर में इलेक्ट्रोलाइट्स का संतुलन बिगड़ गया, जिससे शरीर अंदर से और ज्यादा कमजोर हो गया।
डॉक्टर के अनुसार, गर्मी में हर आधे घंटे में कम से कम एक गिलास पानी पीना चाहिए, चाहे आपको प्यास लगी हो या नहीं। प्यास लगना असल में इस बात का संकेत है कि आपका शरीर पहले ही सूख चुका है। इस मौसम में सिर्फ प्यास बुझाने के लिए नहीं, बल्कि शरीर को ठंडा रखने के लिए पानी पीते रहना जरूरी है।
डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।