स्वास्थ्य

2026 में लौट रही हैं ‘भूली-बिसरी’ जानलेवा बीमारियां! क्या बचपन में लगे टीके आज भी असरदार है?

Preventable Diseases 2026: दुनिया भर में खसरा और काली खांसी जैसी पुरानी बीमारियों की वापसी। जानें WHO और CDC की डराने वाली रिपोर्ट और बचाव के तरीके।
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Updated: 22 Apr 2026, 4:27 PM IST
Health Crisis 2026
Health Crisis 2026 (Photo- gemini ai)

Health Crisis 2026: दुनिया भर के डॉक्टर और वैज्ञानिक इस वक्त एक बेहद डरावने ट्रेंड से परेशान हैं। जो बीमारियां दशकों पहले 'खत्म' मान ली गई थीं, वे अब अचानक और ज्यादा ताकत के साथ वापस लौट रही हैं। जापान में 2025 में आई 'काली खांसी' (Whooping Cough) की लहर से लेकर वियतनाम और फिलीपींस में खसरे (Measles) के तांडव तक, आंकड़े बताते हैं कि हम एक बड़े स्वास्थ्य संकट की ओर बढ़ रहे हैं।

जापान से शुरू हुआ 'पर्टुसिस' का तूफान

हालिया रिसर्च और वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन (WHO) के आंकड़े चौंकाने वाले हैं। जापान में 2025 की पहली छमाही में 'काली खांसी' के इतने मामले आए, जितने पिछले कई सालों के कुल योग से भी ज्यादा थे। इसे "100-day cough" कहा जाता है क्योंकि इसके लक्षण हफ्तों तक पीछा नहीं छोड़ते। अमेरिका के CDC (सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल) ने भी पुष्टि की है कि 2024 और 2025 में संक्रमण की दर प्री-पेंडेमिक स्तर से कहीं ऊपर निकल गई है।

खसरा: सबसे घातक और संक्रामक दुश्मन

अगर काली खांसी डरावनी है, तो खसरा (Measles) उससे भी ज्यादा संक्रामक है। WHO की 2025 की रिपोर्ट के अनुसार, पूर्वी एशिया और प्रशांत क्षेत्रों में हजारों बच्चे इसकी चपेट में हैं। खसरा अक्सर गिरते टीकाकरण कवरेज का 'अलार्म' होता है। वैज्ञानिकों का कहना है कि अगर आबादी का छोटा सा हिस्सा भी अन-वैक्सीनेटेड रह जाए, तो यह वायरस बिजली की गति से फैलता है।

क्यों फेल हो रही है हमारी सुरक्षा? (Research Insights)

विशेषज्ञों ने इस 'कमबैक' के पीछे 5 प्रमुख वैज्ञानिक कारण बताए हैं:

इम्यूनिटी गैप (Pandemic Legacy): कोविड-19 के दौरान करोड़ों बच्चों के रूटीन टीके छूट गए। रिसर्च बताती है कि अब वही 'इम्यूनिटी गैप' विस्फोट का कारण बन रहा है।

वैनिंग इम्यूनिटी (Waning Immunity): वैज्ञानिकों के अनुसार, काली खांसी जैसे टीकों का असर समय के साथ कम होने लगता है। अगर सही समय पर 'बूस्टर डोज' न लगे, तो वयस्क भी इसके वाहक बन सकते हैं।

रोगाणु विकास (Pathogen Evolution): कुछ स्टडीज संकेत देती हैं कि Bordetella pertussis (काली खांसी का बैक्टीरिया) खुद को इवॉल्व (Evolve) कर रहा है, जिससे टीकों का असर कम हो सकता है।

वैक्सीन को लेकर हिचकिचाहट: भ्रामक जानकारियों की वजह से कई देशों में टीकाकरण की दर गिरी है, जिससे 'हर्ड इम्यूनिटी' कमजोर हुई है।

भारतीय टीकाकरण विशेषज्ञ का अलर्ट

डॉ. एन. के. अरोड़ा (Chief of India’s National Technical Advisory Group on Immunization - NTAGI) ने बताया "भारत में हमें 'मिशन इंद्रधनुष' की सफलता पर गर्व है, लेकिन वैश्विक स्तर पर काली खांसी (Whooping Cough) का बढ़ता प्रकोप हमें चेतावनी दे रहा है। पेंडमिक के दौरान छूटे हुए टीकों को 'कैच-अप' अभियान के जरिए तुरंत पूरा करना हमारी प्राथमिकता होनी चाहिए।"

WHO (विश्व स्वास्थ्य संगठन) के विशेषज्ञ का नजरिया

टेड्रोस एडनोम घेब्येयियस (Director-General, WHO) ने बताया कि "हम एक ऐसे दौर में हैं जहां पुरानी बीमारियों की वापसी हमारे टीकाकरण सिस्टम की दरारें दिखा रही है। खसरा (Measles) केवल एक बीमारी नहीं, बल्कि गिरते स्वास्थ्य स्तर का एक 'अलार्म' है जिसे नजरअंदाज करना घातक हो सकता है।"

भारत के लिए क्यों है यह रेड अलर्ट?

भारत ने 'मिशन इंद्रधनुष' के जरिए बड़ी सफलता पाई है, लेकिन हमारी घनी आबादी और महामारी के दौरान आए व्यवधान हमें जोखिम में डालते हैं। डिप्थीरिया, पोलियो और रूबेला जैसी बीमारियों का दोबारा सिर उठाना भारत के लिए एक बड़ी चेतावनी है।

डिसक्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।

अब क्या करें? (Expert Advice)

  • कैच-अप वैक्सीनेशन: अगर बच्चों के टीके छूट गए हैं, तो उन्हें तुरंत पूरा करवाएं।
  • बूस्टर डोज: वयस्कों और किशोरों के लिए जरूरी बूस्टर शॉट्स पर डॉक्टर से सलाह लें।
  • लक्षण पहचानें: तेज बुखार, शरीर पर लाल दाने या हफ्तों तक रहने वाली खांसी को मामूली न समझें।
डिस्क्लेमर
इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ओपिनियन का विकल्प नहीं है। पाठकों को सलाह दी जाती है कि वे कोई भी दवा, उपचार या नुस्खा अपनी मर्जी से ना आजमाएं। इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है।
Updated on:
22 Apr 2026, 4:27 PM IST
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