
HDL Cholesterol Hindi: हम जब भी कोलेस्ट्रॉल शब्द सुनते हैं, तो मन में सबसे पहले यही आता है कि यह तो बुरी चीज है, इससे दिल की बीमारियां होती हैं। लेकिन सच यह है कि हर कोलेस्ट्रॉल शरीर के लिए बुरा नहीं होता! हमारी बॉडी में एक ऐसा कोलेस्ट्रॉल भी होता है जो दिल का दोस्त होता है। इसे हम HDL कोलेस्ट्रॉल या सीधी भाषा में 'गुड कोलेस्ट्रॉल' (अच्छा कोलेस्ट्रॉल) कहते हैं। मेयो क्लिनिक (Mayo Clinic) के मुताबिक, अगर शरीर में HDL का लेवल सही रहे, तो हार्ट अटैक और स्ट्रोक का खतरा काफी हद तक टल जाता है। आइए समझते हैं कि यह गुड कोलेस्ट्रॉल आखिर करता क्या है और इसे आप अपने रोजमर्रा के जीवन में कैसे बढ़ा सकते हैं।
HDL का पूरा नाम हाई-डेंसिटी लिपोप्रोटीन है। हमारे खून में दो मुख्य तरह के कोलेस्ट्रॉल होते हैं;
1.LDL (लो-डेंसिटी लिपोप्रोटीन)- इसे बैड कोलेस्ट्रॉल (बुरा कोलेस्ट्रॉल) कहते हैं। यह नसों (धमनियों) में जमा होकर ब्लॉकेज पैदा करता है।
2. HDL (हाई-डेंसिटी लिपोप्रोटीन)- इसे गुड कोलेस्ट्रॉल (अच्छा कोलेस्ट्रॉल) कहते हैं।
मेयो क्लिनिक के अनुसार, HDL कोलेस्ट्रॉल खून की नसों में जमा हो रहे फालतू और बुरे (LDL) कोलेस्ट्रॉल को अपने साथ समेटता है और उसे वापस लिवर (यकृत) तक ले जाता है। लिवर इस नुकसानदेह कोलेस्ट्रॉल को फिल्टर करके शरीर से बाहर निकाल देता है। इस तरह, HDL आपकी खून की नसों को साफ और खुला रखने में मदद करता है।
क्लीवलैंड क्लिनिक के अनुसार, जब आपकी धमनियों (Arteries) में बुरा कोलेस्ट्रॉल जमा नहीं होता, तो खून का बहाव पूरे शरीर और दिल तक सही तरीके से बना रहता है। मेयो क्लिनिक के अनुसार HDL के सही स्तर से ये फायदे मिलते हैं;
1.हार्ट अटैक और स्ट्रोक का खतरा कम होना- यह नसों में थक्के (Plaque) जमने से रोकता है, जिससे दिल का दौरा पड़ने की संभावना काफी घट जाती है।
2. नसों की सूजन कम करना- HDL में एंटी-ऑक्सीडेंट और एंटी-इन्फ्लेमेटरी गुण होते हैं, जो खून की नसों को अंदर से मजबूत और लचीला बनाए रखते हैं।
3. ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होना- नसें साफ रहने से पूरे शरीर में ऑक्सीजन और पोषण सही तरीके से पहुंचता है।
मेयो क्लिनिक के अनुसार, आप अपनी जीवनशैली में कुछ छोटे-छोटे सुधार करके अपने HDL लेवल को आसानी से सुधार सकते हैं;
डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।