
इंडिया के औषधी विज्ञान आयुर्वेद में हमारे आसपास जितनी भी प्राकृतिक वनस्पति या संसाधन मौजूद है उनके अनेकों लाभ आयुर्वेद में बताए गए है। ओषिधीय गुणों से परिपूर्ण पान के पत्ते से जुड़े अनेको लाभ आयुर्वेद में वर्णित है। पान के पत्ते को हिन्दू धर्म में शुद्ध समझा जाता है इसलिए इस्तेमाल पूजा में किया जाता है मगर धार्मिक इस्तेमाल के साथ साथ पान के पत्ते अपने अंदर अनेको स्वास्थ्य लाभ छुपे है।
पान के पत्ते मेंलगभग 85-90% पानी होता है, जिसका अर्थ है कि इसमें नमी की मात्रा अधिक है और कैलोरी की मात्रा कम है । लगभग 100 ग्राम पान के पत्तों में सिर्फ 44 कैलोरी होती है। इसमें 0.4-1% वसा और 3-3.5% प्रोटीन होता है, जो इसे वसा का कम स्रोत और प्रोटीन का मध्यम स्रोत बनाता है। इसके अलावा, पान के पत्ते में आयोडीन (3.4 एमसीजी / 100 ग्राम), पोटेशियम (1.1-4.6%), विटामिन ए (1.9-2.9 मिलीग्राम / 100 ग्राम), विटामिन बी 1 (13-70 एमसीजी / 100 ग्राम), विटामिन बी2 (1.9-30 एमसीजी/ 100 ग्राम) और निकोटिनिक एसिड (0.63-0.89 मिलीग्राम/100 ग्राम) जैसे आवश्यक पोषक तत्वों की मात्रा होती है। इन पोषक तत्वों के अलावा पान के पत्तों में आवश्यक तेल और सुपारी का तेल और चाविकोल, सुपारी, यूजेनॉल, टेरपीन और कैंपीन जैसे रासायनिक घटक होते हैं। इन रासायनिक घटकों में औषधीय गुण होते हैं और विभिन्न रोगों और विकारों के उपचार और रोकथाम में मदद करते हैं।
1. मधुमेह / डायबिटीज को कण्ट्रोल करने में मददगार
डायबिटीज या मधुमेह के दवाइयों का किडनी और लिवर पर साइड इफ़ेक्ट होता है जो इन शरीर के महत्पूर्ण अंगो को नुक्सान भी पंहुचा सकते है। शोध से पता चला है कि सूखे पान के पत्तो के पाउडर में डायबिटीज-2 के रोगियों के खून में शुगर की मात्रा को काम करने की क्षमता है और सबसे महत्वपूर्ण बात , इसके कोई भी दुष्परिणाम नहीं है।
मधुमेह वाले व्यक्ति हाइपरग्लेसेमिया (उच्च रक्त शर्करा के स्तर) के कारण ऑक्सीडेटिव तनाव के हाई लेवल को महसूस करते हैं। रक्त शर्करा का इतना उच्च स्तर एंटीऑक्सिडेंट एंजाइमों को और निष्क्रिय मानव शरीर के एंटीऑक्सिडेंट रक्षा प्रणाली को नष्ट कर देता है । पान का पत्ता एंटीऑक्सिडेंट का एक बड़ा स्रोत है जो मुक्त कणों (Free रेडिकल्स ) को नष्ट करके ऑक्सीडेटिव तनाव से लड़ता है। इस प्रकार, पान के पत्ते उच्च रक्त शर्करा के स्तर को कम करने में मदद करती है और मधुमेह मेलेटस के मैनेजमेंट में सहायता करती है।
2. उच्च कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम करता है
कोलेस्ट्रॉल का ऊँचा स्तर हृदय रोग और स्ट्रोक के लिए बहुत हद तक जिम्मेदार होते है। अध्ययनों में पाया गया है कि पान का पत्ता टोटल कोलेस्ट्रॉल, ट्राइग्लिसराइड्स, कम घनत्व वाले लिपोप्रोटीन (LDL) कोलेस्ट्रॉल और बहुत कम घनत्व वाले लिपोप्रोटीन (VLDL) कोलेस्ट्रॉल के के हाई लेवल को कम करने में मदद करती है। इसके अलावा, यह उच्च घनत्व वाले लिपोप्रोटीन (HDL) कोलेस्ट्रॉल के स्तर को बढ़ाने में भी मदद करता है। पान के पत्ते में मौजूद प्राकृतिक एंटीऑक्सिडेंट, यूजेनॉल , लिपिड को कम करने के लिए जिम्मेदार होता होता है जो मुक्त कणों (Free Radicals ) के प्रभाव को बेअसर करके हमारे हार्ट को स्वस्थ्य रखने में मदद करता है।
3 . सर्दी खांसी ठीक करता है।
सर्दी खांसी के दौरान हमे छाती और फेफड़ों में अकड़न , दर्द और सांस लेने में परेशानी होने लगती है। इस दौरान हमे और ख़ास कर बच्चो को श्वसन से संबंधित समस्याएं भी हो सकती है। सर्दी , खांसी और इनसे होने वाली समस्या से निपटने के लिए हम पान के पत्ते पर सरसों का तेल लगाकर गर्म करने के बाद, ग्रसित व्यक्ति की छाती पर रखने से सर्दी खांसी में काफी राहत मिलती है।
4. भूख को बढ़ाने में लाभदायक
अगर आपको भूख से संबंधित समस्याओं या पेट खराब जैसी परेशानी है तब भी आप पान के पत्ते का इस्तेमाल कर सकते है। पान के पत्ते भूख लगने वाले हार्मोन को एक्टिव करने में सक्षम होते है जिससे आपकी भूख न लगने की समस्या दूर होती है साथ ही पान के पत्ते आपके पेट से विषाक्त पदार्थों को बाहर निकाल कर हमारी जठराग्नि को और जागृत करती है जिससे हमारी पाचन प्रणाली मजबूत होती है।
5. पाचन क्रिया में मददगार
पान के पत्ते चबाने से हमारी लार ग्रंथि सक्रिय होती है और जिसके कारण जब भी हम कुछ खाते हैं तो उसमें ज्यादा से ज्यादा मात्रा में लार मिल जाती है। लार की अधिकता के कारण लार में पाए जाने वाले एंजाइम खाद्य पदार्थों को अच्छे से तोड़ पाते हैं इस वजह से पाचन बहुत आसान हो जाता है।
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6. गैस की समस्या में निदान
गलत जीवनशैली और खाने पीने का निश्चित समय ना होने कारण आज हम सब गैस्ट्रिक या गैस से संबंधित परेशानियां का सामना कर रहे है । यह परेशानियां पाचन से संबंधित समस्याओं के कारण होती है। पान के पत्ते नियमित सेवन करने से एसिडिटी की समस्या में राहत मिलती है जो इसमें मौजूद एंजाइम पेट के अम्लीय स्तर को कम करके Ph लेवल को सामान्य बनाने में मदद करता है।
7. सिर दर्द को कम करता है
पान के पत्तों को सिर दर्द से निजात पाने या कम करने के लिए भी इस्तेमाल किया जाता है। सर दर्द सेछुटकारा पाने के लिए आप पान के कुछ पत्तों को किसी कपड़े की मदद से कान के चारों ओर कुछ देर के लिए बांध लें और थोड़ी देर में आपको सर दर्द से राहत महसूस होगी।