
पार्किंसंस बीमारी (Parkinson's Disease) के लक्षण और कारण क्या हैं- प्रतीकात्मक तस्वीर (Source- Freepik)
Parkinson’s Disease Symptoms: उम्र बढ़ने के साथ शरीर में थोड़ी थकावट या कमजोरी आना आम बात है, लेकिन क्या आपने कभी ध्यान दिया है कि कुछ लोगों के हाथ-पैर अचानक कांपने लगते हैं या उन्हें चलने में दिक्कत होने लगती है? अक्सर लोग इसे बढ़ती उम्र की सामान्य कमजोरी समझकर छोड़ देते हैं। लेकिन यह पार्किंसंस बीमारी (Parkinson's Disease) की शुरुआत हो सकती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की मानें तो पार्किंसंस दिमाग और तंत्रिका तंत्र (नर्वस सिस्टम) से जुड़ी बीमारी है, जो धीरे-धीरे शरीर पर अपना असर दिखाती है। आइए जानते हैं कि यह बीमारी क्यों होती है और इसके क्या-क्या शुरुआती लक्षण हैं।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, पार्किंसंस की बीमारी मुख्य रूप से अधिक उम्र के लोगों या बुजुर्गों में देखने को मिलती है। हालांकि, ऐसा नहीं है कि यह बीमारी सिर्फ बुजुर्गों को ही होती है; कभी-कभी कम उम्र या युवाओं में भी इसके मामले देखे जा सकते हैं। अगर महिलाओं और पुरुषों की तुलना की जाए, तो यह बीमारी महिलाओं के मुकाबले पुरुषों में ज्यादा पाई जाती है।
मेयो क्लिनिक के अनुसार, तो पार्किंसंस होने की असली और सटीक वजह का अभी तक पूरी तरह से पता नहीं चल पाया है। हालांकि, मेडिकल रिसर्च में कुछ बातें सामने आई हैं जो इस बीमारी के खतरे को बढ़ा सकती हैं जैसे, अगर आपके परिवार में या माता-पिता में से किसी को पहले यह बीमारी रही है, तो आपको पार्किंसंस होने का जोखिम दूसरों के मुकाबले थोड़ा ज्यादा हो सकता है। हवा में फैला प्रदूषण, खेतों या घरों में इस्तेमाल होने वाले कीटनाशक (Pesticides) और जहरीले केमिकल्स/सॉल्वेंट्स के ज्यादा संपर्क में रहने से भी इस बीमारी का खतरा बढ़ सकता है।
क्लीवलैंड क्लिनिक के अनुसार, अगर आपके घर में किसी बुजुर्ग या व्यक्ति के हाथ कांपते हैं या चलने में संतुलन बिगड़ता है, तो खुद से दवा लेने के बजाय तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। रोज हल्की-फुल्की वॉक, आसान एक्सरसाइज या फिजियोथेरेपी कराने से नसों की अकड़न कम होती है और शरीर का बैलेंस बेहतर रहता है। मरीज की डाइट में हरी सब्जियां, फल और फाइबर से भरपूर चीजें शामिल करें, ताकि शरीर को ताकत मिले और पाचन ठीक रहे।
डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।
Published on:
01 Aug 2026 07:00 am
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