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बार-बार थकान, जोड़ों में दर्द और त्वचा पर रैश? Lupus Foundation के मुताबिक ये SLE के संकेत हो सकते हैं

SLE Cause: लूपस फाउंडेशन ऑफ अमेरिका और क्लीवलैंड क्लिनिक के अनुसार, ल्यूपस (SLE) एक ऑटोइम्यून बीमारी है, जो त्वचा, जोड़ों और किडनी को प्रभावित कर सकती है। जानिए इसके लक्षण, कारण और इसे कंट्रोल करने के उपाय।
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भारत

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Nidhi Yadav

Jul 31, 2026

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ल्यूपस (SLE) एक ऑटोइम्यून बीमारी है, जो त्वचा, जोड़ों और किडनी को प्रभावित कर सकती है।-प्रतीकात्मक तस्वीर (Source- Freepik)

SLE Prevention: क्या आपको बिना काम किए भी अक्सर बहुत ज्यादा थकान महसूस होती है? या आपके जोड़ों में दर्द रहता है या फिर चेहरे और त्वचा पर अजीब से लाल निशान या रैश उभर आते हैं? अगर हां, तो इन संकेतों को नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है। लूपस फाउंडेशन ऑफ अमेरिका के अनुसार, ये लक्षण सिस्टमिक लूपस एरिथेमेटोसस (SLE) नाम की बीमारी का इशारा हो सकते हैं। आइए जानते हैं कि यह बीमारी आखिर क्या है, इसके क्या लक्षण हैं और इससे कैसे बचा जा सकता है।

आखिर क्या है एस.एल.ई (SLE)?

क्लीवलैंड क्लिनिक के अनुसार, एस.एल.ई (SLE) एक ऐसी बीमारी है जिसमें हमारे शरीर की अपनी ही सुरक्षा प्रणाली (इम्यून सिस्टम) गलती से हमारे ही अंगों और ऊतकों (tissues) पर हमला करने लगती है। इसकी वजह से शरीर में सूजन आ जाती है, जो आपकी त्वचा, जोड़ों, खून और यहां तक कि गुर्दे (किडनी), फेफड़ों और दिल जैसे जरूरी अंगों पर असर डाल सकती है। इसलिए आपको तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए, डॉक्टर आपको ऐसी दवाएं दे सकते हैं जिससे इसके लक्षण कम हों और यह बीमारी बार-बार न उभरे।

इस बीमारी के मुख्य लक्षण क्या हैं?

मेयो क्लिनिक के अनुसार, एस.एल.ई के लक्षण हर इंसान में थोड़े अलग हो सकते हैं, लेकिन इसके सबसे आम संकेत ये हैं

  • भरपूर नींद और आराम लेने के बाद भी शरीर में हमेशा सुस्ती और कमजोरी बनी रहना।
  • सुबह उठते ही हाथों, कलाइयों या घुटनों में अकड़न और दर्द महसूस होना।
  • त्वचा पर रैश (निशान)।
  • बार-बार बुखार आना।
  • अचानक से बहुत ज्यादा बाल झड़ने लगना।

यह बीमारी क्यों होती है?

  • अगर परिवार में किसी को यह समस्या रही हो।
  • हार्मोनल बदलाव के कारण।
  • बहुत ज्यादा धूप के संपर्क में आना।

इससे बचने के लिए क्या करें?

अगर आपको ऊपर बताए गए लक्षण काफी समय से परेशान कर रहे हैं, तो तुरंत किसी अच्छे डॉक्टर या रुमेटोलॉजिस्ट (Rheumatologist) से संपर्क करें।सही समय पर ब्लड टेस्ट और डॉक्टर की सलाह से इस बीमारी को पूरी तरह नियंत्रण (control) में रखा जा सकता है। इसके अलावा अपनी दिनचर्या में ये छोटे-छोटे बदलाव जरूर करें;

  • बाहर निकलते समय सनस्क्रीन लगाएं और शरीर को ढककर रखें।
  • योग और मेडिटेशन की मदद लें।
  • हरी सब्जियां, फल खाएं और रोजाना 7-8 घंटे की पूरी नींद लें।

डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।