
Health Tips for 30s: 30 की उम्र हो गई है, अब पहले जैसा शरीर नहीं रहा। यह बात आपने अपने दोस्तों, परिवार या शायद खुद से भी कई बार कही होगी। पहले रातभर जागने के बाद भी अगले दिन काम हो जाता था। बाहर का खाना खाकर भी पेट ठीक रहता था। लेकिन अब देर से खाना खाने पर एसिडिटी होने लगती है, ऑफिस के तनाव का असर सीधे पेट पर दिखता है और नींद पूरी न हो तो पूरा दिन सुस्ती महसूस होती है। ऐसा सिर्फ आपके साथ नहीं हो रहा।
University of Kansas के प्रोफेसर Dr. Prateek Sharma, Harvard Medical School, NIH, NIDDK और Cleveland Clinic के अनुसार, 30 की उम्र के बाद शरीर का मेटाबॉलिज्म, हार्मोनल बदलाव और तनाव से निपटने का तरीका धीरे-धीरे बदलने लगता है। ऐसे में कुछ हेल्दी आदतें पहले से ज्यादा जरूरी हो जाती हैं।
30 की उम्र तक आते-आते जिम्मेदारियां बढ़ जाती हैं। नौकरी, परिवार, बच्चों की पढ़ाई, लोन और भविष्य की चिंता, इन सबका असर सिर्फ दिमाग पर नहीं, पेट पर भी पड़ता है। रिसर्च बताती है कि हमारा गट और ब्रेन लगातार एक-दूसरे से जुड़े रहते हैं। जब तनाव बढ़ता है तो पाचन गड़बड़ा सकता है। गैस, पेट फूलना, कब्ज या बार-बार टॉयलेट जाने जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं। यही वजह है कि विशेषज्ञ रोज कुछ मिनट मेडिटेशन, गहरी सांस लेने की एक्सरसाइज या अपनी पसंद की एक्टिविटी करने की सलाह देते हैं।
अगर आपकी आदत है कि कभी सुबह का नाश्ता छोड़ दिया, कभी दोपहर का खाना शाम 4 बजे खाया और रात का खाना 11 बजे तो 30 की उम्र के बाद शरीर इसका असर दिखाना शुरू कर सकता है। NIDDK के अनुसार, नियमित समय पर भोजन करने से पाचन तंत्र बेहतर तरीके से काम करता है। इससे ब्लड शुगर और ऊर्जा का स्तर भी संतुलित रहने में मदद मिल सकती है। इसलिए कोशिश करें कि रोज लगभग एक ही समय पर खाना खाएं।
आजकल ज्यादातर लोग मोबाइल देखते हुए या लैपटॉप पर काम करते-करते खाना खा लेते हैं। धीरे-धीरे और अच्छी तरह चबाकर खाने से पाचन बेहतर होता है। इससे शरीर को यह समझने का समय मिलता है कि पेट भर चुका है, जिससे जरूरत से ज्यादा खाने की संभावना भी कम होती है।
20 की उम्र में चार-पांच घंटे की नींद भी चल जाती थी, लेकिन 30 के बाद शरीर इसकी कीमत वसूलने लगता है। NIH और Harvard Medical School के अनुसार, लगातार कम नींद लेने से तनाव, वजन बढ़ना, ब्लड शुगर का असंतुलन और पाचन संबंधी समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है। अधिकांश वयस्कों के लिए रोज 7-9 घंटे की अच्छी नींद जरूरी मानी जाती है।
अगर आपकी प्लेट में रोजाना सिर्फ मैदा, तली हुई चीजें और मीठे पेय शामिल हैं, तो आंतों के अच्छे बैक्टीरिया प्रभावित हो सकते हैं।रिसर्च बताती है कि फल, सब्जियां, साबुत अनाज, दालें और फाइबर से भरपूर भोजन Gut Microbiome को बेहतर बनाए रखने में मदद करते हैं। Gut स्वस्थ रहेगा तो पाचन, इम्यूनिटी और ओवरऑल हेल्थ पर भी सकारात्मक असर पड़ सकता है।
इस उम्र के बाद केवल फिट दिखना ही काफी नहीं है। अगर परिवार में डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर या दिल की बीमारी का इतिहास है, तो समय-समय पर ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर, कोलेस्ट्रॉल और वजन की जांच कराते रहना फायदेमंद हो सकता है।
डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।