स्वास्थ्य

NSO की सर्वे रिपोर्ट में नया खुलासा! 7 साल में तीन गुना बढ़ गए दिल के मरीज, 15 से 29 साल के युवा ज्यादा हो रहे शिकार

Heart disease In Youth: नेशनल स्टैटिस्टिकल ऑफिस (NSO) के ताजा सर्वे ने देश की सेहत को लेकर एक डरावनी तस्वीर पेश की है। रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले सात सालों में भारत में हृदय रोगों (Heart Diseases) के मामले तीन गुना बढ़ गए हैं। सबसे ज्यादा चिंता की बात यह है कि अब बुढ़ापे में होने वाली यह बीमारी 15 से 29 साल के युवाओं को भी अपना शिकार बना रही है।

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Apr 30, 2026
Heart disease In Youth
Heart disease In Youth (Image- gemini)

Heart disease In Youth: जिम में वर्कआउट करते हुए अचानक गिरना हो या डांस करते-करते जान जाना, हाल के दिनों में ऐसे कई मामले सामने आए हैं। पहले माना जाता था कि दिल की बीमारियां 50 की उम्र के बाद होती हैं, लेकिन NSO का नया सर्वे बताता है कि भारत का युवा अब सबसे ज्यादा खतरे में है। 2017-18 के मुकाबले 2022-23 तक दिल की बीमारियों के आंकड़े जिस रफ्तार से बढ़े हैं, उसने हेल्थ एक्सपर्ट्स की नींद उड़ा दी है।

7 साल में तीन गुना उछाल क्या कहते हैं आंकड़े?

NSO की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में हृदय रोगों की व्यापकता (prevalence) में जबरदस्त बढ़ोतरी हुई है। रिपोर्ट बताती है कि सात साल पहले के मुकाबले अब दिल की बीमारियों के मरीजों की संख्या तीन गुनी हो गई है। सर्वे के मुताबिक, 15 से 29 साल के आयु वर्ग के युवाओं में हृदय रोगों के मामले बेहद तेजी से बढ़े हैं। यह वह उम्र है जिसे सबसे फिट माना जाता है, लेकिन अब यही वर्ग सबसे ज्यादा 'सॉफ्ट टारगेट' बन रहा है।

क्यों बूढ़ा हो रहा है युवाओं का दिल?

देर तक जागना, घंटों स्क्रीन के सामने बैठना और शारीरिक एक्टिविटी का कम होना सबसे बड़ी वजह है। जंक फूड, अत्यधिक तेल-मसाले और पैकेट बंद खाने का बढ़ता चलन युवाओं की धमनियों (Arteries) को कमजोर कर रहा है। करियर और निजी जिंदगी का स्ट्रेस कम उम्र में ही हाई बीपी (Hypertension) की समस्या पैदा कर रहा है। स्मोकिंग के बढ़ते चलन और बिना डॉक्टरी सलाह के हैवी सप्लीमेंट्स लेने से भी दिल पर बुरा असर पड़ रहा है।

बचाव के लिए क्या करें?

5 की उम्र के बाद साल में कम से कम एक बार फुल बॉडी चेकअप और लिपिड प्रोफाइल टेस्ट जरूर कराएं। दिन में कम से कम 30-40 मिनट की वॉक या योगा को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाएं। खाने में नमक और चीनी की मात्रा कम करें और ताजे फल-सब्जियों को शामिल करें। सीने में भारीपन, अचानक बहुत ज्यादा पसीना आना या सांस फूलने जैसे लक्षणों को 'गैस' समझकर नजरअंदाज न करें।

डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह किसी क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प नहीं है। इसलिए पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।

Published on:
30 Apr 2026 12:37 pm