Heat Pocket Effect: IMD ने दी सामान्य से ज्यादा गर्मी की चेतावनी। जानिए Heat Pocket कैसे बढ़ा रहा है हार्ट अटैक और हीट स्ट्रेस का खतरा।
Heat Pocket Effect: भारत में गर्मी ने इस बार जल्दी दस्तक दे दी है। 5 मार्च 2026 को ही मौसम मई जैसा महसूस हो रहा है। India Meteorological Department ने पहले ही चेतावनी दे दी है कि इस साल मई तक सामान्य से ज्यादा गर्मी पड़ेगी। लेकिन असली खतरा सिर्फ तेज धूप नहीं है, बल्कि हमारे शहरों का कंक्रीट भी है।
आपने महसूस किया होगा कि आपका मोहल्ला घुटन भरा लगता है, या बाजार तक पैदल जाते ही दिल तेज धड़कने लगता है। यह सिर्फ आपका वहम नहीं है। इसे हीट पॉकेट कहते हैं। यह Urban Heat Island जैसा असर है, जहां इमारतें, सीमेंट और डामर दिनभर की गर्मी सोख लेते हैं और रात में धीरे-धीरे छोड़ते रहते हैं। Centre for Science and Environment की 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक कई शहरों में रात का तापमान कम ही नहीं हो रहा। बेंगलुरु और हैदराबाद जैसे शहरों में भी जमीन का तापमान 7 से 15 डिग्री तक बढ़ चुका है। मतलब आपका दिल रात में भी आराम नहीं कर पा रहा।
गर्मी में शरीर खुद को ठंडा रखने के लिए ज्यादा मेहनत करता है। पसीना निकलता है, दिल तेज धड़कता है ताकि खून त्वचा तक पहुंचे और शरीर ठंडा हो सके। लेकिन जब हवा में नमी ज्यादा हो, तो पसीना सूख नहीं पाता। World Health Organization के मुताबिक ज्यादा नमी वाली हीटवेव में शरीर का कूलिंग सिस्टम फेल हो सकता है। इससे दिल पर दबाव बढ़ता है और हार्ट अटैक का खतरा बढ़ सकता है।
गर्मी में पानी की कमी से खून गाढ़ा हो जाता है। ऐसे में दिल को उसे पंप करने में ज्यादा ताकत लगानी पड़ती है। जिन लोगों को पहले से ब्लड प्रेशर, डायबिटीज या दिल की बीमारी है, उनके लिए यह और खतरनाक हो सकता है। साथ ही, World Obesity Atlas 2026 के अनुसार भारत में मोटापा तेजी से बढ़ रहा है। ज्यादा वजन वाले लोगों का शरीर गर्मी को नियंत्रित करने में ज्यादा संघर्ष करता है, जिससे दिल पर और बोझ पड़ता है।
घनी आबादी वाले इलाके, जहां पेड़-पौधे कम हैं और एसी ज्यादा चलते हैं, वहां तापमान आसपास के हरे इलाकों से 4 से 10 डिग्री ज्यादा हो सकता है। पड़ोसी के एसी से निकलने वाली गर्म हवा भी दीवारों को और गरम करती है। ऐसे इलाकों में रहना मतलब हीट ट्रैप में रहना।