
Heliotrope Rash Cause: कभी-कभी आंखों की पलकों या आसपास की त्वचा पर अचानक लाल या बैंगनी रंग के चकत्ते, दाने और हल्की सूजन दिखाई देने लगती है। शुरुआत में लोग इसे कोई सामान्य एलर्जी, थकान या त्वचा का इन्फेक्शन समझकर अनदेखा कर देते हैं। लेकिन अगर आपकी आंखों के आसपास बैंगनी रंगत छा रही है और उसके साथ त्वचा में जलन या खुजली महसूस हो रही है, तो यह कोई आम त्वचा रोग नहीं बल्कि 'हेलीओट्रॉप रैश' (Heliotrope Rash) हो सकता है। हेल्थलाइन के अनुसार, हेलीओट्रॉप रैश एक दुर्लभ और गंभीर ऑटोइम्यून बीमारी 'डर्माटोमायोसाइटिस' (Dermatomyositis) का शुरुआती और मुख्य लक्षण है। यह बीमारी केवल आपकी त्वचा को ही प्रभावित नहीं करती, बल्कि मांसपेशियों और शरीर के अन्य अंगों पर भी असर डालती है। आइए जानते हैं कि हेलीओट्रॉप रैश क्या है, यह क्यों होता है और इसका सही समय पर इलाज करवाना क्यों बेहद जरूरी है।
हेल्थलाइन के अनुसार, हेलीओट्रॉप रैश का नाम 'हेलीओट्रॉप' नाम के एक बैंगनी फूल के नाम पर रखा गया है, क्योंकि इसका रंग उसी फूल की तरह हल्का या गहरा बैंगनी (Violet/Reddish-Purple) होता है। यह रैश मुख्य रूप से ऊपरी और निचली पलकों के आसपास उभरता है। हालांकि, कुछ मामलों में यह चेहरे के ऊपरी हिस्से, गर्दन, कंधों, छाती और उंगलियों के जोड़ों पर भी दिखाई दे सकता है। प्रभावित त्वचा का रंग सामान्य से अलग होकर बैंगनी, लाल या गहरा भूरा दिखने लगता है। कई बार आंखों के आसपास सूजन (Swelling) भी आ जाती है। इस जगह की त्वचा अक्सर सूखी, पपड़ीदार हो जाती है और इसमें खुजली, जलन या हल्का दर्द महसूस हो सकता है।
क्लीवलैंड क्लिनिक के अनुसार, हेलीओट्रॉप रैश कोई स्वतंत्र बीमारी नहीं है, बल्कि यह डर्माटोमायोसाइटिस (Dermatomyositis) नाम की बीमारी का एक स्पष्ट संकेत है। डर्माटोमायोसाइटिस एक ऐसी स्थिति है जिसमें हमारा शरीर का इम्यून सिस्टम गलती से स्वस्थ त्वचा और मांसपेशियों की कोशिकाओं पर हमला करने लगता है। इसके कारण त्वचा और छोटी रक्त वाहिकाओं में सूजन पैदा हो जाती है। समय के साथ यह बीमारी शरीर की मांसपेशियों को कमजोर बनाने लगती है, जिससे व्यक्ति को उठने-बैठने, सीढ़ियां चढ़ने, या हाथ ऊपर उठाने में दिक्कत होने लगती है।
मेडिकल साइंस के मुताबिक, इस बीमारी के सटीक कारण का अभी पूरी तरह पता नहीं चल पाया है, लेकिन शोधकर्ता इसके लिए कुछ प्रमुख कारणों को जिम्मेदार मानते हैं;
वयस्कों में यह बीमारी कभी-कभी शरीर के किसी अंदरूनी कैंसर या फेफड़ों से जुड़ी समस्याओं का शुरुआती संकेत भी हो सकती है। यह बीमारी किसी भी उम्र के व्यक्ति को हो सकती है, लेकिन 50 से 70 साल के वयस्कों और 5 से 15 साल के बच्चों में इसके मामले ज्यादा देखे जाते हैं। पुरुषों की तुलना में महिलाओं में यह समस्या अधिक पाई जाती है।
डॉक्टर सूजन कम करने के लिए कॉर्टिकोस्टेरॉइड्स (जैसे प्रेडनिसोन) और इम्यून सिस्टम को शांत करने वाली दवाएं (Immunosuppressants) देते हैं। तेज धूप से यह रैश और ज्यादा बिगड़ जाता है। इसलिए धूप में निकलते समय SPF 30 या उससे ज्यादा वाला सनस्क्रीन लगाएं और टोपी या चश्मे का इस्तेमाल करें। अगर मांसपेशियों में कमजोरी आने लगी है, तो फिजियोथेरेपी से मांसपेशियों की ताकत वापस लाने में मदद मिलती है। आंखों के आसपास की संवेदनशील त्वचा के लिए माइल्ड और बिना सुगंध वाले क्लींजर का उपयोग करें और मेकअप से बचें।
अगर आपकी आंखों की पलकों पर बैंगनी या लाल रंग का रैश दिखाई दे रहा है, सूजन कम नहीं हो रही है, या आपको हाथ-पैर उठाने में कमजोरी महसूस हो रही है, तो बिना देर किए किसी डर्मेटोलॉजिस्ट (त्वचा विशेषज्ञ) या रूमेटोलॉजिस्ट से सलाह लें। शुरुआती चरण में इलाज शुरू होने से आप मांसपेशियों के बड़े नुकसान और गंभीर जटिलताओं से बच सकते हैं।