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BP Patients के लिए Navratri Fasting Tips, क्लीवलैंड क्लिनिक से जानिए Hypertension में किन बातों का ध्यान रखना चाहिए

क्या हाई ब्लड प्रेशर (Hypertension) के मरीज नवरात्रि में व्रत रख सकते हैं? LORANS स्टडी और मेटा-एनालिसिस और क्लीवलैंड क्लिनिक के अनुसार, जानिए बीपी मरीजों के लिए फास्टिंग के फायदे, खान-पान के नियम और सुरक्षित व्रत रखने के जरूरी टिप्स।
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भारत

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Nidhi Yadav

•

Oct 12, 2026

हाई ब्लड प्रेशर मरीज के लिए नवरात्रि व्रत के दौरान सेहत की देखभाल

हाई ब्लड प्रेशर की समस्या में नवरात्रि का व्रत रखते समय सही फलाहार, पर्याप्त पानी और दवाओं के समय का विशेष ध्यान रखना जरूरी है- प्रतीकात्मक तस्वीर (Source- Chatgpt)

BP Patients Fasting Tips: नवरात्रि के पावन दिनों में बहुत से लोग उपवास रखते हैं। उपवास या फास्टिंग को धार्मिक नजरिए के साथ-साथ सेहत के लिहाज से भी काफी फायदेमंद माना जाता है। शोध और अध्ययनों से यह बात सामने आई है कि सही तरीके से फास्टिंग करने से सिस्टोलिक और डायस्टोलिक ब्लड प्रेशर में कमी आती है, जिससे दिल की सेहत में सुधार हो सकता है। लेकिन अगर आप हाई ब्लड प्रेशर (Hypertension) की समस्या से जूझ रहे हैं, तो नवरात्र के व्रत रखते समय कुछ खास बातों का ध्यान रखना बेहद जरूरी है। बिना सही जानकारी और लापरवाही के व्रत रखने से शरीर में पानी की कमी, कमजोरी या अचानक बीपी का स्तर बिगड़ने का खतरा बन रहता है। बीपी के मरीजों को उपवास के दौरान अपनी दवाओं, खान-पान और पानी की मात्रा का सही संतुलन बनाना चाहिए। आइए जानते हैं कि हाई बीपी के मरीज नवरात्रि में सुरक्षित तरीके से व्रत कैसे रख सकते हैं।

उपवास से ब्लड प्रेशर पर क्या असर पड़ता है?

LORANS स्टडी और मेटा-एनालिसिस के अनुसार, नियंत्रित उपवास करने से ब्लड प्रेशर का स्तर थोड़ा घटता है, जो आमतौर पर दिल के लिए फायदेमंद होता है। हालांकि, यदि व्रत के दौरान मरीज बहुत देर तक बिना पानी के रहे या अत्यधिक तले-भुने और नमकीन फलाहार का सेवन करे, तो यह बीपी के स्तर को अचानक बढ़ा या घटा सकता है। इसलिए बीपी के मरीजों के लिए सही फलाहार चुनना और पर्याप्त तरल पदार्थ लेना बहुत जरूरी है।

बीपी के मरीज फलाहार में क्या खाएं और क्या न खाएं?

क्लीवलैंड क्लिनिक के अनुसार, व्रत के दौरान खान-पान का सीधा असर आपके ब्लड प्रेशर पर पड़ता है। इसलिए इन बातों पर ध्यान देना चाहिए;

  • सेंधा नमक का ज्यादा प्रयोग न करें- अक्सर लोग व्रत के फलाहार में काफी मात्रा में सेंधा नमक का इस्तेमाल करते हैं। जरूरत से ज्यादा नमक बीपी बढ़ा सकता है, इसलिए नमक का इस्तेमाल सीमित मात्रा में ही करें।
  • तली-भुनी चीजों से दूर रहें- कुट्टू की पूरी, पकौड़े या ज्यादा तेल में बने आलू खाने से परहेज करें। इसकी जगह उबले आलू, समा के चावल, या कुट्टू की रोटी का सेवन करें।
  • धीमी ऊर्जा देने वाले खाद्य पदार्थ चुनें- फलाहार में मखाना, फल, दही, और मेवे (नट्स) शामिल करें, जिससे शरीर को धीरे-धीरे और लगातार ऊर्जा मिलती रहे।
  • ज्यादा मीठे से बचें- व्रत के नाम पर चीनी वाली लस्सी, मिठाइयां या मीठे जूस ज्यादा न लें, क्योंकि इससे शुगर लेवल अचानक बढ़ता है और सुस्ती आती है।

दवाइयों के समय में बिना डॉक्टर की सलाह के बदलाव न करें

  • अगर आप ब्लड प्रेशर की नियमित दवा लेते हैं, तो व्रत शुरू करने से पहले अपने डॉक्टर या फार्मासिस्ट से बात करें।
  • कभी भी अपनी मर्जी से दवा बंद न करें और न ही दवा की खुराक छोड़ें।
  • अगर आपकी दवा सुबह खाली पेट या नाश्ते के बाद की है, तो डॉक्टर से समझें कि व्रत के फलाहार के समय इसे कैसे लेना है।
  • अगर आपको व्रत के दौरान चक्कर आना, ज्यादा थकावट होना, सांस फूलना या सिर घूमने जैसा महसूस हो, तो तुरंत अपना बीपी चेक करें और जरूरत पड़ने पर डॉक्टर से संपर्क करें।

शरीर को डिहाइड्रेशन से बचाएं

उपवास के दौरान शरीर में पानी की कमी होने से बीपी कम हो सकता है, जिससे चक्कर आने या बेहोशी जैसी समस्या हो सकती है।
दिनभर में पर्याप्त मात्रा में पानी, नारियल पानी, छाछ, नींबू पानी (कम नमक के साथ) और हर्बल टी पीते रहें।
निर्जला व्रत (बिना पानी का उपवास) रखने से बचें, खासकर यदि आपकी बीपी की दवाएं चल रही हों।

डिस्क्लेमर
इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ओपिनियन का विकल्प नहीं है। पाठकों को सलाह दी जाती है कि वे कोई भी दवा, उपचार या नुस्खा अपनी मर्जी से ना आजमाएं। इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है।