Hemophilia Symptoms: हीमोफीलिया एक गंभीर ब्लीडिंग डिसऑर्डर है जिसमें खून देर तक बहता है। जानिए इसके लक्षण, कारण, इलाज और बचाव के आसान तरीके।
Hemophilia Symptoms: हीमोफीलिया एक ऐसी दुर्लभ (rare) बीमारी है, जिसमें शरीर में खून का थक्का (clot) ठीक से नहीं बन पाता। इसका मतलब है कि अगर चोट लग जाए, तो खून देर तक बहता रहता है या कभी-कभी बिना चोट के भी ब्लीडिंग शुरू हो सकती है।
World Health Organization (WHO) के अनुसार, अब इलाज में काफी सुधार हुआ है, लेकिन भारत जैसे देशों में अभी भी जागरूकता और इलाज की सुविधा हर जगह बराबर नहीं है।
हीमोफीलिया ज्यादातर जन्म से होती है और इसमें खून जमाने वाले प्रोटीन (क्लॉटिंग फैक्टर) की कमी होती है। हीमोफीलिया A में Factor VIII की कमी होती है। हीमोफीलिया B में Factor IX की कमी होती है। Dr Priyanshi Pachauri के अनुसार, “इस बीमारी में शरीर सही से क्लॉट नहीं बना पाता, इसलिए छोटी चोट भी बड़ी समस्या बन सकती है।”
इस बीमारी के लक्षण उसकी गंभीरता पर निर्भर करते हैं। आम लक्षण हैं:
बच्चों में अगर रेंगते या चलते समय बिना वजह चोट के निशान दिखें, तो यह शुरुआती संकेत हो सकता है।
हीमोफीलिया का पूरी तरह इलाज (cure) अभी नहीं है, लेकिन इसे कंट्रोल किया जा सकता है।
Replacement Therapy: शरीर में जो फैक्टर कम है, उसे इंजेक्शन के जरिए दिया जाता है
Preventive Treatment: पहले से दवा देकर ब्लीडिंग रोकी जाती है
नई थेरेपी: अब ऐसी दवाएं आ रही हैं जो कम इंजेक्शन में ज्यादा असर दिखाती हैं
Gene Therapy: इस पर रिसर्च चल रही है, जिससे भविष्य में बेहतर इलाज की उम्मीद है
इस बीमारी के साथ जीना आसान नहीं होता। खेल-कूद में सावधानी रखनी पड़ती है। बार-बार जोड़ों में ब्लीडिंग से दर्द और कमजोरी हो सकती है। मानसिक तनाव भी बढ़ सकता है। डॉ. पचौरी के अनुसार, “मरीजों को हर काम सोच-समझकर करना पड़ता है ताकि चोट से बचा जा सके।”
हीमोफीलिया के मरीज सही देखभाल से सामान्य जिंदगी जी सकते हैं:
डिसक्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह किसी क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प नहीं है। इसलिए पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।