Thyroid and Heart Risk: क्या हॉर्मोनल असंतुलन आपके दिल को नुकसान पहुंचा सकता है? जानें Thyroid Disease, Cortisol और Insulin Resistance कैसे बढ़ाते हैं हार्ट डिजीज का खतरा।
Thyroid and Heart Risk: दिल की बीमारी की बात आते ही हम कोलेस्ट्रॉल, ब्लड प्रेशर या खराब लाइफस्टाइल के बारे में सोचते हैं। लेकिन अब डॉक्टर बता रहे हैं कि हॉर्मोनल असंतुलन भी दिल को धीरे-धीरे नुकसान पहुंचा सकता है। खास बात यह है कि इसके लक्षण शुरुआत में साफ नजर नहीं आते।
कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. संजय कुमार के मुताबिक, “हॉर्मोनल गड़बड़ी साइलेंट तरीके से दिल की बीमारियों को बढ़ा सकती है, कई बार बिना किसी स्पष्ट संकेत के।”
Thyroid Disease दिल की सेहत पर बड़ा असर डाल सकती है। अगर थायरॉयड कम काम करता है, तो कोलेस्ट्रॉल बढ़ सकता है और धमनियां सख्त हो सकती हैं। वहीं ज्यादा सक्रिय थायरॉयड दिल की धड़कन को तेज कर देता है, जिससे Atrial Fibrillation जैसी समस्या हो सकती है। इसके लक्षण जैसे थकान, वजन में बदलाव या कमजोरी को लोग अक्सर नजरअंदाज कर देते हैं।
Cortisol को स्ट्रेस हॉर्मोन कहा जाता है। अगर यह लंबे समय तक बढ़ा रहे, तो हाई बीपी, सूजन, पेट के आसपास चर्बी और मेटाबॉलिक समस्या बढ़ने लगती है। इससे हार्ट अटैक और स्ट्रोक का खतरा भी बढ़ जाता है।
Insulin Resistance भी दिल के लिए खतरनाक है। इसमें ब्लड शुगर कंट्रोल नहीं हो पाती और नसों को नुकसान होने लगता है। महिलाओं में मेनोपॉज के बाद एस्ट्रोजन कम होने से दिल की सुरक्षा घट जाती है, जबकि पुरुषों में टेस्टोस्टेरोन का असंतुलन भी असर डाल सकता है।
हॉर्मोनल गड़बड़ी के लक्षण बहुत सामान्य होते हैं, जैसे थकान, नींद की कमी, मूड स्विंग या वजन बढ़ना। लोग इन्हें रोजमर्रा की समस्या मान लेते हैं और जांच नहीं कराते, जिससे असली वजह छिपी रह जाती है।
डॉ. संजय कुमार का कहना है कि अब सिर्फ कोलेस्ट्रॉल और ब्लड प्रेशर चेक करना काफी नहीं है। अगर बिना वजह हाई बीपी, दिल की धड़कन में गड़बड़ी या मेटाबॉलिक समस्या हो, तो हॉर्मोन टेस्ट भी करवाना चाहिए।
अच्छी बात यह है कि हॉर्मोनल गड़बड़ी को समय पर पहचान लिया जाए, तो दवाओं, सही खान-पान, एक्सरसाइज और स्ट्रेस मैनेजमेंट से इसे कंट्रोल किया जा सकता है। इससे दिल की बीमारी का खतरा भी काफी कम हो जाता है। दिल की सेहत सिर्फ खान-पान और एक्सरसाइज पर निर्भर नहीं करती, बल्कि हॉर्मोन के बैलेंस पर भी टिकी होती है। इसलिए शरीर में छोटे-छोटे बदलावों को नजरअंदाज न करें, क्योंकि कई बार असली खतरा वही होता है, जो दिखाई नहीं देता।