
How Vaccines Work: आज के समय में वैक्सीन यानी टीका हमारे जीवन का एक अहम हिस्सा बन चुका है। बचपन में लगने वाले टीकों से लेकर बड़े होने पर लगने वाले टीकों तक, ये हमें कई खतरनाक और जानलेवा बीमारियों से सुरक्षित रखते हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि कांच की एक छोटी सी शीशी में मौजूद यह दवा हमारे शरीर के अंदर जाकर बीमारियों को कैसे हरा देती है? वैक्सीन हमारे शरीर की कुदरती रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्यून सिस्टम) को बिना बीमार किए मजबूत बनाने का काम करती है। आइए समझते हैं कि वैक्सीन क्या है और यह हमारे शरीर में किस तरह काम करती है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मुताबिक, वैक्सीन एक तरह की जैविक तैयारी (बायोलॉजिकल प्रिपरेशन) है, जो हमारे शरीर को किसी खास बीमारी से लड़ने के लिए तैयार करती है। वैक्सीन के अंदर उसी वायरस या बैक्टीरिया का बहुत ही कमजोर, मृत (निष्क्रिय) रूप या फिर उसका कोई छोटा सा हिस्सा (जैसे प्रोटीन या जेनेटिक मटेरियल) होता है, जिसके खिलाफ सुरक्षा देनी होती है। चूंकि यह रूप बहुत कमजोर होता है, इसलिए यह शरीर में बीमारी पैदा नहीं कर पाता, लेकिन हमारे शरीर के सुरक्षा तंत्र को जगाने के लिए काफी होता है।
सेन्ट्रल फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (CDC) के अनुसार, हमारा शरीर एक किले की तरह है और इम्यून सिस्टम उसके सिपाही हैं। जब भी कोई नया वायरस या बैक्टीरिया शरीर में घुसता है, तो इम्यून सिस्टम को उसे पहचानने और मारने का हथियार (एंटीबॉडी) बनाने में थोड़ा समय लगता है। इसी बीच इंसान बीमार पड़ जाता है। वैक्सीन इसी प्रक्रिया को आसान बनाती है। यह एक तरह की मॉक ड्रिल या अभ्यास की तरह काम करती है,जब आपको वैक्सीन लगाई जाती है, तो शरीर का इम्यून सिस्टम उसमें मौजूद कमजोर जर्म्स को दुश्मन मान लेता है। इम्यून सिस्टम तुरंत उस जर्म्स को खत्म करने के लिए विशेष प्रोटीन बनाता है, जिसे एंटीबॉडी (Antibodies) कहते हैं। दुश्मन को हराने के बाद हमारा शरीर उस वायरस या बैक्टीरिया की पहचान अपने दिमाग में दर्ज कर लेता है। इसे मेमोरी सेल्स कहा जाता है। इसके बाद, जब कभी भविष्य में असली और खतरनाक वायरस आपके शरीर पर हमला करता है, तो शरीर का सुरक्षा तंत्र उसे तुरंत पहचान लेता है और बीमारी फैलने से पहले ही उसे खत्म कर देता है।
क्लीवलैंड क्लिनिक की रिसर्च के अनुसार, वैज्ञानिक बीमारियों के हिसाब से अलग-अलग तरह की वैक्सीन बनाते हैं। इसके मुख्य प्रकार इस प्रकार हैं;
लाइव-अटेनुएटेड वैक्सीन (Live-attenuated Vaccine)- इसमें वायरस को बहुत कमजोर करके इस्तेमाल किया जाता है, जैसे खसरा (Measles) या पोलियो की ओरल ड्रॉप्स।
इनैक्टीवेटेड वैक्सीन (Inactivated Vaccine)- इसमें मरे हुए (निष्क्रिय) वायरस या बैक्टीरिया का इस्तेमाल किया जाता है, जैसे फ्लू या रेबीज की वैक्सीन।
सबयूनिट या रिकॉम्बिनेंट वैक्सीन- इसमें पूरे वायरस के बजाय उसके सिर्फ एक छोटे से हिस्से (जैसे प्रोटीन) का इस्तेमाल होता है।
mRNA वैक्सीन- यह एक नई तकनीक है, जिसमें शरीर को खुद ही वायरस का एक छोटा सा हिस्सा बनाकर उससे लड़ने की हिदायत दी जाती है।
वैक्सीन लगवाने के मुख्य रूप से दो बड़े फायदे हैं, यह आपको पोलिया, टिटनेस, खसरा, हेपेटाइटिस और काली खांसी जैसी कई गंभीर बीमारियों से बचाती है। जब किसी समाज या देश में ज्यादातर लोग वैक्सीन लगवा लेते हैं, तो बीमारी का फैलना रुक जाता है। इससे उन लोगों की भी सुरक्षा होती है जो किसी बीमारी या छोटे होने की वजह से टीका नहीं लगवा सकते।
टीका लगने के बाद कई बार बांह में दर्द, हल्का बुखार या थकान महसूस होती है। लोग इससे डर जाते हैं, लेकिन असल में यह इस बात का संकेत है कि आपकी वैक्सीन सही से काम कर रही है और आपका इम्यून सिस्टम एंटीबॉडी बना रहा है। यह लक्षण एक या दो दिन में अपने आप ठीक हो जाते हैं।