HPV Vaccine Myths and Facts : भारत सरकार एचपीवी वैक्सीन 14 साल तक की लड़कियों को मुफ्त देने का अभियान छेड़ी है। लाखों लड़कियों को सर्वाइकल कैंसर (गर्भाशय ग्रीवा का कैंसर) से बचाने के लिए ऐसा किया जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी ये अपील कर रहे हैं। इसी बीच एचपीवी वैक्सीन को लेकर […]
HPV Vaccine Myths and Facts : भारत सरकार एचपीवी वैक्सीन 14 साल तक की लड़कियों को मुफ्त देने का अभियान छेड़ी है। लाखों लड़कियों को सर्वाइकल कैंसर (गर्भाशय ग्रीवा का कैंसर) से बचाने के लिए ऐसा किया जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी ये अपील कर रहे हैं। इसी बीच एचपीवी वैक्सीन को लेकर कुछ बातें हो रही हैं। जैसे- एचपीवी वैक्सीन से लड़कियां बांझपन का शिकार हो सकती हैं, या कुछ और बीमारी हो सकती है…। इस वजह से कुछ लोग वैक्सीन लगाने से भी डर रहे हैं। आइए, हम एचपीवी टीका का सच तथ्यों के साथ समझते हैं।
सोशल मीडिया पर प्रसिद्ध डॉक्टर विश्वरूप चौधरी का एक वीडियो सामने आया है। उसमें वो एचपीवी टीका के साइड इफेक्ट्स बताने के साथ इस बात को लेकर भी जोर दे रहे हैं कि ये बांझपन बना सकता है। वीडियो के थंबनेल पर भी इसे देखा जा सकता है। पर क्या ये बात पूरी तरह सच है।
सीडीसी और अन्य स्वास्थ्य संस्थाओं ने एचपीवी वैक्सीन के साइड इफेक्ट्स के बारे में जानकारी शेयर की है। जिसमें इस बात का कहीं जिक्र नहीं मिलता है कि इस टीका को लगाने के बाद बांझपन जैसी स्थिति हो सकती है।
15 साल से दुनियाभर में एचपीवी वैक्सीन का इस्तेमाल लड़का-लड़कियों पर किया जा रहा है। पर, इस तरह का मामला देखने को नहीं मिलता है कि इसके इस्तेमाल करने से बांझपन का शिकार हो सकते हैं।
कई लोग ये भी मान रहे हैं कि इसके टीकाकरण से कैंसर का रिस्क कम नहीं होता है। इसको लगाने से भी कोई फायदा नहीं होने वाला है।
'BMJ' में प्रकाशित हालिया अध्ययन "Extended follow-up of invasive cervical cancer risk after quadrivalent HPV vaccination" के अनुसार, इनवेसिव सर्वाइकल कैंसर के 930 मामले सामने आए, जिनमें से 97 मामले टीकाकृत (vaccinated) व्यक्तियों में और 833 मामले बिना टीका लगवाए व्यक्तियों में पाए गए। इस हिसाब से एचपीवी टीका सर्वाइकल कैंसर से बचाने में कारगर है।
बता दें, भारत सरकार ने 28 फरवरी 2026 को देशव्यापी एचपीवी (HPV) टीकाकरण अभियान शुरू किया। इस पहल से 2030 तक सर्वाइकल कैंसर को समाप्त करने के विश्व स्वास्थ्य संगठन के दृष्टिकोण के अनुरूप है, जो हमारी बेटियों के स्वास्थ्य और भविष्य को सुरक्षित करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है।