
Idiopathic Scoliosis Hindi: किशोरावस्था यानी 10 से 19 साल की उम्र बच्चों के शारीरिक विकास के लिए बहुत ही अहम मानी जाती है। इस उम्र में बच्चों का कद तेजी से बढ़ता है और शरीर में कई तरह के बदलाव आते हैं। लेकिन कई बार इसी दौरान रीढ़ की हड्डी में एक अनचाहा झुकाव या टेढ़ापन आने लगता है, जिसे अक्सर माता-पिता या बच्चे खुद भी शुरुआती दिनों में समझ नहीं पाते। जब रीढ़ की हड्डी सीधी रहने के बजाय अंग्रेजी के अक्षर 'S' या 'C' के आकार में मुड़ने लगती है और इसके पीछे की कोई स्पष्ट वजह सामने नहीं आती, तो मेडिकल भाषा में इसे Idiopathic Scoliosis (इडियोपैथिक स्कोलियोसिस) कहा जाता है। इडियोपैथिक शब्द का अर्थ ही होता है - जिसके सटीक कारण का पता न हो। हेल्थलाइन और क्लीवलैंड क्लिनिक की रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह समस्या सबसे ज्यादा किशोरों (Adolescents) में ही देखी जाती है। आइए इसे समझते हैं।
हेल्थलाइन के अनुसार, सामान्य तौर पर अगर आप किसी इंसान को पीछे से देखेंगे, तो उसकी रीढ़ की हड्डी बिल्कुल सीधी नजर आती है। लेकिन जिन बच्चों को स्कोलियोसिस की समस्या होती है, उनकी रीढ़ की हड्डी एक तरफ झुक जाती है। जब यह समस्या 10 से 19 साल की उम्र के बीच बच्चों में पनपती है, तो इसे Adolescent Idiopathic Scoliosis (AIS) कहा जाता है। यह कोई बीमारी नहीं बल्कि रीढ़ की हड्डी की बनावट में आने वाला एक बदलाव है। हालांकि यह समस्या जानलेवा नहीं होती, लेकिन अगर इसे समय रहते न पहचाना जाए, तो रीढ़ का यह टेढ़ापन बच्चों के पोस्चर, चलने-फिरने के ढंग और उनके आत्मविश्वास को प्रभावित कर सकता है।
क्लीवलैंड क्लिनिक के मुताबिक, शुरुआती दिनों में स्कोलियोसिस में कोई दर्द नहीं होता, इसलिए बच्चे या माता-पिता को इसका पता आसानी से नहीं चल पाता। अक्सर जब बच्चा कोई टाइट कपड़ा पहनता है या स्विमिंग करता है, तब शरीर के संतुलन में यह फर्क नज़र आता है। इसके प्रमुख लक्षण नीचे दिए गए हैं;
जैसा कि इसके नाम इडियोपैथिक से ही साफ है, इसका कोई एक सटीक या स्पष्ट कारण अभी तक वैज्ञानिक रूप से साबित नहीं हो पाया है। हालांकि, मेडिकल रिसर्च के आधार पर इसके पीछे कुछ संभावित कारक माने जाते हैं;
हालांकि, इडियोपैथिक स्कोलियोसिस लड़कों और लड़कियों दोनों को हो सकता है। लेकिन स्टडीज बताती हैं कि लड़कियों में रीढ़ की हड्डी का यह टेढ़ापन गंभीर रूप लेने का खतरा लड़कों के मुकाबले ज्यादा रहता है। इसलिए 10 से 14 साल की उम्र की लड़कियों में इसके लक्षणों पर खास ध्यान देने की सलाह दी जाती है।
अगर आपको अपने बच्चे की पीठ या कंधों की बनावट में थोड़ा भी फर्क नज़र आए, तो तुरंत किसी ऑर्थोपेडिक डॉक्टर (हड्डी रोग विशेषज्ञ) को दिखाएं। डॉक्टर सबसे पहले बच्चे को आगे झुकने को कहते हैं (जिसे Adam's Forward Bend Test कहते हैं)। इसके बाद रीढ़ के झुकाव और कोण (Cobb Angle) का सटीक पता लगाने के लिए एक्स-रे (X-ray) कराया जाता है। अगर झुकाव बहुत कम (20 डिग्री से कम) है, तो डॉक्टर किसी इलाज के बिना केवल हर 6 महीने में एक्स-रे करके स्थिति पर नज़र रखते हैं। अगर झुकाव मध्यम है और बच्चे की हड्डियां अभी भी बढ़ रही हैं, तो रीढ़ को और अधिक मुड़ने से रोकने के लिए डॉक्टर पीठ में पहनने वाला एक विशेष 'ब्रेस' लगाने की सलाह देते हैं। पीठ की मांसपेशियों को मजबूत बनाने के लिए खास एक्सरसाइज करवाई जाती हैं। केवल बहुत गंभीर मामलों में (जब झुकाव 45-50 डिग्री से ज्यादा हो जाए), रीढ़ को सीधा करने के लिए सर्जरी का सहारा लिया जाता है।