Insulin Plant: इंसुलिन प्लांट (Insulin Plant) कोई मामूली पौधा नहीं, बल्कि शुगर के मरीजों के लिए कुदरत का करिश्मा है। इसकी बस एक पत्ती रोज खाने से शरीर में अपने आप इंसुलिन बनने लगता है और धीरे-धीरे दवाइयों और इंजेक्शन से पीछा छूट सकता है।
Insulin Plant: आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में मधुमेह (Diabetes) एक वैश्विक महामारी बन चुका है। WHO के अनुसार, दुनिया भर में लगभग 80 से 85% रोगी टाइप-2 डायबिटीज से पीड़ित हैं। हर दूसरे घर में डायबिटीज (शुगर) का मरीज मिल जाता है। लोग महंगी दवाइयां और इंजेक्शन से थक चुके हैं। ऐसे में इंसुलिन प्लांट एक बहुत ही सस्ता और असरदार तरीका है। वैज्ञानिक रूप से कोस्ट्स पिक्ट्स के नाम से जाना जाने वाला यह पौधा दिखने में बहुत सुंदर होता है और इसे आप अपने घर के गमले में भी आसानी से लगा सकते हैं। इसे कोस्टस इगनियस भी कहते हैं, पर लोग इसे इसकी खूबियों की वजह से इंसुलिन प्लांट के नाम से ही जानते हैं।
Asian Journal of Research in Botany के अनुसार, जब हम इसकी पत्ती खाते हैं, तो यह सीधे हमारे शरीर के उस हिस्से (पैनक्रियाज) पर काम करता है जो इंसुलिन बनाता है। यह सुस्त पड़े पैनक्रियाज को जगाता है ताकि शरीर खुद इंसुलिन बनाना शुरू कर दे। जो लोग रोज इंजेक्शन लगाते हैं, इस पौधे के नियमित इस्तेमाल से उनकी शुगर कंट्रोल होने लगती है और धीरे-धीरे इंजेक्शन की जरूरत कम या खत्म हो सकती है। हजारों की दवाइयों के मुकाबले यह एक फ्री का इलाज है जो आपके घर में ही उग सकता है।
रोज सुबह इस पौधे की एक ताजी पत्ती तोड़ें, उसे साफ पानी से धोएं और बस चबाकर खा लें। अगर आप पत्ती नहीं चबाना चाहते, तो इसे सुखाकर पाउडर बना लें या पानी में उबालकर पी लें। शुरुआत में एक पत्ती से ही शुरू करें। कुछ लोग इसे सुबह और शाम (दो बार) भी लेते हैं, लेकिन शरीर के हिसाब से इसकी मात्रा तय करनी चाहिए।
इसे उगाना बहुत आसान है, जैसे हम एलोवेरा या मनीप्लांट लगाते हैं। एक बड़े गमले (15-20 किलो वाला) में इसे लगाएं। इसे दिन में 5-6 घंटे की धूप दिखाएं,यह गर्मी में खूब फलता-फूलता है। बस थोड़ी सी गोबर की खाद डालें और गर्मी में हर 2-3 दिन में पानी दें। इसके पास एक गेंदे का पौधा लगा दें ताकि कीड़े-मकोड़े इसे खराब न करें।
डिसक्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह किसी क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प नहीं है। इसलिए पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।