IVF Pregnancy : वायु प्रदूषण जनित बीमारियों से दुनिया में हर साल औसतन 40 लाख से ज्यादा मौतें होती हैं, लेकिन अब आइवीएफ (IVF Pregnancy) तकनीक से बच्चों के जन्म पर भी इसके दुष्प्रभावा सामने आए हैं।
एम्सटर्डम. वायु प्रदूषण जनित बीमारियों से दुनिया में हर साल औसतन 40 लाख से ज्यादा मौतें होती हैं, लेकिन अब आइवीएफ (IVF Pregnancy) तकनीक से बच्चों के जन्म पर भी इसके दुष्प्रभावा सामने आए हैं। नीदरलैंड्स की राजधानी एम्सटर्डम में एएसएचआारई (प्रजनन एवं भ्रूण विज्ञान की यूरोपीय संस्था) की वार्षिक बैठक में पेश अध्ययन में इस पर चिंता जताई गई। अध्ययन रिपोर्ट के मुताबिक आइवीएफ (इन विट्रो फर्टिलाइजेशन) तकनीक में अंडे की पुनप्र्राप्ति से पहले प्रदूषण के सूक्ष्म कण (पीएम) के संपर्क में आने से शिशु के जीवित जन्म की संभावना लगभग 38 फीसदी कम हो जाती है।
रिसर्च के दौरान अंडे एकत्र करने से पहले इन्हें दो सप्ताह पीएम10 (10 माइक्रोमीटर से बारीक कण) के संपर्क में लाया गया। रिसर्च में पाया गया कि धूल कणों ने भ्रूण के जीवित जन्म लेने की संभावना को 38 फीसदी कम कर दिया। भ्रूण प्राप्त करने के समय महिलाओं की औसत उम्र 34.5 साल थी, जबकि भ्रूण बदलाव के समय 36.1 साल थी। अध्ययन के प्रमुख लेखक डॉ. सेबेस्टियन लेदरसिच के मुताबिक जलवायु परिवर्तन और प्रदूषण मानव स्वास्थ्य के लिए बड़े खतरे हैं, जिसमें प्रजनन भी शामिल है। इसके लिए अच्छी वायु गुणवत्ता को बनाए रखने के लिए वायु प्रदूषण के कारकों को सही ढंग से नियंत्रित किया जाना चाहिए।
वायु प्रदूषकों के स्तर को चार समयावधि के लिए जांचा गया। ये 24 घंटे, दो सप्ताह, चार सप्ताह और तीन महीने थी। अध्ययन में पीएम 10 और पीएम 2.5 का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन के दिशा-निर्देशों से अधिक था।
डॉ. सेबेस्टियन के मुताबिक, यह अपनी तरह का पहला अध्ययन है, जिसमें अंडे के विकास और गर्भावस्था के शुरुआती चरणों के दौरान प्रदूषकों के प्रभावों को समझने के लिए फ्रोजन भ्रूण स्थानातंरण चक्र का उपयोग किया गया। निष्कर्ष बताता है कि प्रदूषण न सिर्फ गर्भावस्था के शुरुआती चरणों में बल्कि अंडों की गुणवत्ता को प्रभावित करता है।