
Japan centenarians lifestyle|फोटो सोर्स – Freepik
Japanese Lifestyle Habits: जापान में 100 साल से ऊपर उम्र के लोगों की संख्या लगातार बढ़ रही है, और देश ने हाल ही में लगभग 1 लाख सेंटेनरियंस का रिकॉर्ड छुआ। Government data के अनुसार सितंबर 2025 तक जापान में सेंटेनरियंस यानी 100 साल से अधिक उम्र के लोगों की संख्या 99,763 तक पहुंच गई है, जो लगातार 55वें साल इस उम्र के लोगों में वृद्धि का संकेत देती है। इसमें महिलाओं की हिस्सेदारी 88% है। भारत में बढ़ती डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर और स्ट्रेस को देखते हुए, जापानी आदतें हमें बेहतर और हेल्दी जिंदगी का रास्ता दिखा सकती हैं। आइए जानते हैं वे 5 खास जापानी आदतें, जिन्हें अपनाकर भारतीय भी अपनी सेहत और उम्र को बेहतर बना सकते हैं।
जापान में भोजन को सिर्फ स्वाद या पेट भरने का जरिया नहीं माना जाता, बल्कि यह सेहत की नींव है। उनकी थाली में हमेशा मौसमी सब्जियां, फिश, सोया और फर्मेंटेड फूड्स शामिल रहते हैं, जो शरीर की इम्यूनिटी और पाचन को मजबूत करते हैं। भारतीय संदर्भ में भी हम प्रोसेस्ड स्नैक्स की बजाय भुना चना, मखाना या स्प्राउट्स जैसी हेल्दी चीज़ें अपनाकर अपने शरीर को रोगों से पहले सुरक्षा दे सकते हैं। मोटे अनाज, दालें और हल्दी-अदरक जैसे मसाले इम्यून सिस्टम को मजबूत रखते हैं, जबकि कांजी, अचार या घर का बना डोसा बैटर पाचन तंत्र को स्वस्थ बनाए रखते हैं। इस तरह खाना केवल पेट भरने का माध्यम नहीं, बल्कि स्वास्थ्य की सुरक्षा कवच बन जाता है।
ओकिनावा द्वीप के लोग मानते हैं कि लंबी उम्र का राज खाने में संयम है। वे हमेशा पेट पूरी तरह भरने से पहले ही रुक जाते हैं। धीरे-धीरे खाने से दिमाग को तृप्ति का संकेत मिलने का समय मिलता है और भूख के संकेतों को समझकर खाना शरीर पर अनावश्यक दबाव नहीं डालता। हर बार दूसरी सर्विंग लेने की आदत छोड़ देना फायदेमंद होता है। इस तरीके से भोजन शरीर के लिए संतुलित और हल्का रहता है, जो लंबे समय तक फिट रहने में मदद करता है।
जापानी लोग फिट रहने के लिए केवल जिम पर निर्भर नहीं रहते। पैदल चलना, साइकिल चलाना और बागवानी उनकी दैनिक जीवनशैली का हिस्सा हैं। इसी तरह भारतीय घरों में सूर्य नमस्कार या योग से दिन की शुरुआत की जा सकती है। छोटी दूरी तय करने के लिए वाहन की बजाय पैदल चलने की आदत डालें। घर के काम जैसे झाड़ू-पोंछा या बागवानी भी शरीर को सक्रिय रखते हैं। इस तरह नियमित हल्की गतिविधि लंबी उम्र और स्वस्थ जीवन की कुंजी है।
जापानी संस्कृति में ‘इकिगाई’ का मतलब है जीवन का उद्देश्य ढूंढना। यह मानसिक सेहत और खुशहाली के लिए बेहद जरूरी है। परिवार और समाज से जुड़े रहना अकेलेपन को दूर करता है, नई स्किल सीखना या पुराने शौक अपनाना दिमाग को तेज रखता है, और उम्र बढ़ने के बावजूद खुद को उपयोगी महसूस करना आत्मविश्वास बढ़ाता है। जब जीवन का कोई उद्देश्य होता है, तो न केवल मानसिक स्वास्थ्य बेहतर रहता है, बल्कि व्यक्ति लंबे समय तक सक्रिय और खुश भी रहता है।
जापानी लोग रोजमर्रा के छोटे रिचुअल्स के माध्यम से तनाव कम करते हैं। स्क्रीन से ब्रेक लेकर प्रकृति के साथ समय बिताना मन को शांत करता है, जबकि ध्यान, जाप, मंत्र या अन्य आध्यात्मिक गतिविधियां मानसिक संतुलन बनाए रखती हैं। संगीत, पेंटिंग, लेखन जैसी क्रिएटिव एक्टिविटीज भीतर की खुशी और संतोष को जगाती हैं। इन छोटे-छोटे रिचुअल्स से जीवन में शांति और मानसिक स्थिरता बनी रहती है, जो लंबी और स्वस्थ जिंदगी के लिए जरूरी है।
Published on:
05 Jan 2026 12:41 pm
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