
Karwa Chauth During Periods: करवा चौथ का त्योहार आते ही महिलाओं के मन में कई तरह के सवाल उठने लगते हैं, खासकर तब जब व्रत के दिन ही पीरियड्स (मासिक धर्म) शुरू हो जाएं। ऐसे में मन में असमंजस होना स्वाभाविक है कि इस स्थिति में व्रत रखें या नहीं। आइए, पत्रिका की खास बातचीत के दौरान मेडिकल एक्सपर्ट्स की दी गई सलाह से जानते हैं कि इस दौरान सेहत का ध्यान कैसे रखा जाए।
डॉ. सीमा गोयल के मेडिकल नजरिए से देखें तो पीरियड्स खुद व्रत रखने से रोकने की कोई वजह नहीं हैं। एक स्वस्थ महिला के लिए पीरियड्स में एक दिन का व्रत आम तौर पर पूरी तरह से सुरक्षित है। पीरियड्स एक सामान्य बायोलॉजिकल प्रोसेस है, कोई बीमारी नहीं। हालांकि, इस दौरान व्रत या पूजा को लेकर जो रोक-टोक की जाती है, वह सामाजिक या धार्मिक मान्यता है, मेडिकल नहीं।
डॉ. रितु का मानना है कि पीरियड्स के दौरान करवा चौथ का व्रत रखना या न रखना पूरी तरह से धार्मिक आस्था और महिला का अपना व्यक्तिगत फैसला है। मेडिकल साइंस में मासिक धर्म के दौरान व्रत रखने पर कोई रोक नहीं है। हालांकि, लंबे समय तक पानी न पीने से डिहाइड्रेशन, कमजोरी और चक्कर आने का खतरा बढ़ सकता है, खासकर तब जब शरीर में पहले से ही कमजोरी या अधिक रक्तस्राव हो।
इसलिए महिलाओं को अपनी शारीरिक क्षमता को प्राथमिकता देनी चाहिए। अगर कमजोरी ज्यादा लगे, ब्लीडिंग अधिक हो या चक्कर आएं, तो जबरदस्ती व्रत खींचने के बजाय तुरंत व्रत खोल देना चाहिए और डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए। याद रखें, किसी भी कर्मकांड या व्रत से कहीं बढ़कर आपका अपना स्वास्थ्य है।
डॉ. आस्था ढींगरा का कहना है कि मेडिकल दृष्टि से मासिक धर्म के दौरान व्रत रखना हर महिला के लिए वर्जित नहीं है, पीरियड्स अपने आप में उपवास के लिए कोई चिकित्सकीय मनाही नहीं हैं। हालांकि, करवा चौथ के निर्जला व्रत में डिहाइड्रेशन और कमजोरी का जोखिम रहता है। मनोविज्ञान के सिद्धांतों के अनुसार, अपनी इच्छा और आस्था से लिया गया निर्णय बाहरी दबाव से लिए गए फैसले से कहीं ज्यादा बेहतर और संतोषजनक होता है।
इसलिए हर महिला को अपनी शारीरिक स्थिति और डॉक्टर की सलाह के मुताबिक ही व्रत का फैसला लेना चाहिए। मासिक धर्म जैसी प्राकृतिक प्रक्रिया को लेकर मन में किसी तरह का हीनभाव या अपराधबोध नहीं पालना चाहिए। आस्था हमेशा मन को संबल देती है, शरीर को सजा देने के लिए नहीं होती यही स्वस्थ परंपरा और सशक्त सोच की असली पहचान है।
सरगी में संतुलित आहार लें, जिसमें कॉम्प्लेक्स कार्ब्स, प्रोटीन, ताजे फल और पर्याप्त तरल पदार्थ (जैसे नारियल पानी या छाछ) शामिल हों। बहुत ज्यादा चाय-कॉफ़ी, तली-भुनी चीजें और अत्यधिक नमकीन खाने से बचें, क्योंकि इससे प्यास और ज्यादा लगती है। इस दिन शरीर को ज्यादा थकाएं नहीं, ठंडी जगह पर रहें और भारी-भरकम काम करने से बचें। जब व्रत खोलें, तो सबसे पहले सादा पानी या ओआरएस (ORS) पिएं, उसके कुछ देर बाद हल्का और सुपाच्य भोजन लें।