स्वास्थ्य

Kidney Damage Symptoms: किडनी खराब होने का पता देर से क्यों चलता है? ये टेस्ट पहले ही दे देता है चेतावनी

Kidney Damage Symptoms: किडनी की बीमारी चुपचाप बढ़ती है। सिर्फ KFT काफी नहीं। जानिए यूरिन ACR टेस्ट कैसे सालों पहले किडनी डैमेज पकड़कर डायलिसिस से बचा सकता है।

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Feb 25, 2026
Kidney Damage Symptoms (Photo- gemini ai)

Kidney Damage Symptoms: किडनी की बीमारी को अक्सर साइलेंट किलर कहा जाता है, क्योंकि यह धीरे-धीरे और बिना ज्यादा लक्षण दिखाए बढ़ती रहती है। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में बहुत से लोग डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं। ये बीमारियां शुरुआत में ज्यादा परेशानी नहीं देतीं, लेकिन समय के साथ-साथ चुपचाप किडनी को नुकसान पहुंचाती रहती हैं।

ज्यादातर लोगों को लगता है कि अगर शरीर ठीक लग रहा है तो किडनी भी स्वस्थ होगी। लेकिन सच यह है कि जब तक सूजन, थकान या पेशाब कम आने जैसे लक्षण दिखते हैं, तब तक किडनी को काफी नुकसान हो चुका होता है। इसलिए समय पर जांच कराना बहुत जरूरी है।

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सिर्फ KFT टेस्ट पर भरोसा करना सही नहीं

कई लोग किडनी की जांच के लिए सिर्फ किडनी फंक्शन टेस्ट (KFT) ही करवाते हैं। इस ब्लड टेस्ट में क्रिएटिनिन जैसे पदार्थों का स्तर देखा जाता है, जिससे पता चलता है कि किडनी कितनी अच्छी तरह काम कर रही है। लेकिन समस्या यह है कि क्रिएटिनिन का स्तर तब बढ़ता है जब किडनी की 60-70% कार्यक्षमता पहले ही कम हो चुकी होती है। यानी जब रिपोर्ट में दिक्कत दिखती है, तब तक बीमारी काफी आगे बढ़ चुकी होती है। सीनियर डायबिटोलॉजिस्ट Dr Brijmohan Arora बताते हैं कि अगर हम सिर्फ क्रिएटिनिन बढ़ने का इंतजार करेंगे, तो बीमारी की पहचान देर से होगी। तब इलाज मुश्किल हो सकता है और डायलिसिस जैसी गंभीर स्थिति तक पहुंचने का खतरा बढ़ जाता है।

यूरिन ACR टेस्ट क्यों जरूरी है?

डॉक्टर सलाह देते हैं कि ब्लड टेस्ट के साथ-साथ यूरिन ACR टेस्ट भी करवाना चाहिए। ACR का मतलब है Albumin-Creatinine Ratio। इस टेस्ट से पता चलता है कि पेशाब में एल्ब्यूमिन नाम का प्रोटीन तो नहीं जा रहा। सामान्य तौर पर स्वस्थ किडनी इस प्रोटीन को पेशाब में जाने से रोकती है। अगर यह ज्यादा मात्रा में मिलने लगे, तो यह किडनी पर तनाव या शुरुआती नुकसान का संकेत हो सकता है। अगर ACR स्तर 30 mg/g से ज्यादा हो, तो यह शुरुआती किडनी डैमेज का संकेत माना जाता है, भले ही ब्लड रिपोर्ट सामान्य क्यों न हो।

जल्दी पता चले तो बचाव आसान

यूरिन ACR टेस्ट की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह किडनी की समस्या को कई साल पहले पकड़ सकता है। इससे मरीज को समय रहते इलाज और सावधानी का मौका मिल जाता है। ब्लड शुगर और ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करना, नमक कम खाना, वजन संतुलित रखना, नियमित व्यायाम और डॉक्टर की दवाएं समय पर लेना ये सब किडनी को खराब होने से बचा सकते हैं। सही समय पर कदम उठाने से डायलिसिस या ट्रांसप्लांट जैसी नौबत भी टल सकती है।

किसे और कितनी बार टेस्ट करवाना चाहिए?

डायबिटीज या हाई ब्लड प्रेशर वाले लोगों को साल में कम से कम 1-2 बार KFT और यूरिन ACR दोनों टेस्ट करवाने चाहिए। जिनके परिवार में किडनी की बीमारी रही हो या जो लंबे समय से कुछ दवाएं ले रहे हों, उन्हें भी नियमित जांच करवानी चाहिए।किडनी फेलियर अचानक नहीं होता, बल्कि धीरे-धीरे बढ़ता है। इसलिए सिर्फ ब्लड टेस्ट पर निर्भर रहना काफी नहीं है। एक साधारण, सस्ता और आसान यूरिन ACR टेस्ट आपकी किडनी को गंभीर नुकसान से बचाने में बड़ी भूमिका निभा सकता है। नियमित जांच और स्वस्थ जीवनशैली ही किडनी को सुरक्षित रखने का सबसे अच्छा तरीका है।

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Published on:
25 Feb 2026 12:04 pm
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