स्वास्थ्य

Labile Hypertension: बार-बार अचानक बढ़ जाता है BP? क्लीवलैंड क्लिनिक ने बताया हो सकता है लेबाइल हाइपरटेंशन के कारण

Labile Hypertension Cause: क्या आपका BP भी बिना वजह अचानक बढ़ जाता है? जानें क्लीवलैंड क्लिनिक और रिसर्च के अनुसार क्या है लेबाइल हाइपरटेंशन, इसके छिपे कारण, लक्षण और इससे बचने के उपाय।
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Sep 05, 2026
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बार-बार अचानक BP क्यों बढ़ जाता है- प्रतीकात्मक तस्वीर (Source- Freepik)

Labile Hypertension Symptoms: आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में ब्लड प्रेशर (BP) की समस्या बहुत आम हो गई है। लेकिन क्या आपके साथ कभी ऐसा होता है कि एक पल आपका ब्लड प्रेशर बिल्कुल नॉर्मल रहता है और अचानक अगले ही पल बहुत ज्यादा बढ़ जाता है? अगर हां, तो इसे साधारण हाई बीपी समझकर टालने की गलती न करें। अचानक और बार-बार ब्लड प्रेशर का इस तरह ऊपर-नीचे होना एक खास डॉक्टरी स्थिति हो सकती है, जिसे लेबाइल हाइपरटेंशन (Labile Hypertension) कहा जाता है। नेचर (Nature) जर्नल की रिसर्च के अनुसार, लेबाइल हाइपरटेंशन में व्यक्ति का ब्लड प्रेशर बिना किसी लंबे समय की बीमारी के भी अचानक बहुत तेजी से बढ़ जाता है और फिर अपने आप या थोड़े आराम के बाद नॉर्मल हो जाता है। यह बदलाव इतना तेज होता है कि मरीज खुद समझ नहीं पाता कि आखिर उसके शरीर में क्या हो रहा है। आइए जानते हैं कि लेबाइल हाइपरटेंशन क्या है, यह क्यों होता है, इसके लक्षण क्या हैं और इसे कैसे कंट्रोल में रखा जा सकता है।

लेबाइल हाइपरटेंशन क्या है और यह सामान्य हाई बीपी से कैसे अलग है?

क्लीवलैंड क्लिनिक के अनुसार, सामान्य हाई ब्लड प्रेशर (Hypertension) में मरीज का बीपी लगातार बढ़ा हुआ रहता है और उसे कंट्रोल करने के लिए रोज दवाएं लेनी पड़ती हैं। लेकिन लेबाइल हाइपरटेंशन थोड़ा अलग और उलझाने वाला होता है। इसमें आपका बीपी दिन में कई बार अचानक बहुत ऊपर चला जाता है (जैसे 140/90 से ऊपर) और फिर कुछ देर में अपने आप सामान्य स्तर पर आ जाता है। शरीर में यह अचानक आने वाला उछाल दिमाग, दिल और नसों पर बहुत ज्यादा दबाव डालता है।

लेबाइल हाइपरटेंशन के मुख्य कारण

  • अत्यधिक तनाव और घबराहट (Stress and Anxiety)- अचानक कोई बुरी खबर सुनना, काम का बहुत ज्यादा दबाव, डर या घबराहट होने पर शरीर में 'स्ट्रेस हॉर्मोन्स' (जैसे एड्रेनालिन) का बहाव तेज हो जाता है। इससे दिल की धड़कन बढ़ती है और बीपी अचानक शूट कर जाता है।
  • व्हाइट कोट हाइपरटेंशन (White Coat Hypertension)- कई लोगों को डॉक्टर या अस्पताल देखते ही घबराहट होने लगती है। क्लीनिक में जांच कराते समय उनका बीपी अचानक बढ़ जाता है, जबकि घर पर बिल्कुल नॉर्मल रहता है।
  • कैफीन, शराब और स्मोकिंग- बहुत ज्यादा चाय, कॉफी, सिगरेट या शराब का सेवन करने से नसें अचानक सिकुड़ जाती हैं, जिससे बीपी में तेज उछाल आता है।
  • हॉर्मोनल असंतुलन- शरीर की एड्रिनल ग्रंथि (Adrenal Gland) में गड़बड़ी या कुछ खास हॉर्मोन्स के ज्यादा बनने से भी बीपी अचानक अनियंत्रित हो जाता है।
  • नींद की कमी और दर्द- रात में सही से नींद न आना या शरीर में किसी तरह का तेज दर्द होना भी बीपी को अचानक बढ़ा सकता है।
  • कुछ दवाओं का असर- दर्द निवारक गोलियां (Painkillers), डीकंजेस्टेंट (सर्दी-जुकाम की दवाएं) या वजन घटाने वाली दवाओं के असर से भी बीपी अचानक ऊपर जा सकता है।

शरीर में दिखाई देने वाले प्रमुख लक्षण

  • अचानक तेज सिरदर्द होना होना।
  • घबराहट और सीने में जकड़न महसूस होना।
  • चक्कर आना या आंखों के आगे धुंधलापन।
  • सांस लेने में तकलीफ।
  • चेहरे और गर्दन पर गर्मी या लालिमा महसूस होना।

डॉक्टर इसकी जांच कैसे करते हैं?

  • एम्बुलेटरी ब्लड प्रेशर मॉनिटरिंग (ABPM)- इसमें मरीज को 24 घंटे के लिए एक छोटी बीपी मशीन पहना दी जाती है, जो दिन और रात भर थोड़े-थोड़े अंतराल पर बीपी रिकॉर्ड करती रहती है।
  • घर पर बीपी की लगातार जांच (Home BP Monitoring)- मरीज को दिन में अलग-अलग समय पर घर पर बीपी नापने और उसकी डायरी बनाने को कहा जाता है।
  • ब्लड और यूरीन टेस्ट- हॉर्मोनल गड़बड़ी या गुर्दे (Kidney) की बीमारी का पता लगाने के लिए।

लेबाइल हाइपरटेंशन से बचाव के उपाय

क्लीवलैंड क्लिनिक के मुताबिक, इस समस्या को काफी हद तक अपनी लाइफस्टाइल में सुधार करके संभाला जा सकता है;

  • तनाव को कम करें।
  • कैफीन और स्मोकिंग से दूरी बनाएं।
  • पर्याप्त और अच्छी नींद लें।
  • नमक का सेवन सीमित रखें।
  • बिना डॉक्टर की सलाह के दवाएं न लें।

डॉक्टर के पास कब जाना जरूरी है?

अगर आपका बीपी अचानक 180/120 से ऊपर चला जाए, साथ में सीने में तेज दर्द हो, हाथ-पैर सुन्न पड़ रहे हों, बोलने में परेशानी हो या बहुत तेज सिरदर्द हो, तो यह मेडिकल इमरजेंसी हो सकती है। ऐसी स्थिति में तुरंत नजदीकी अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में जाएं। बीपी का बार-बार ऊपर-नीचे होना दिल और दिमाग की नसों को नुकसान पहुंचा सकता है। इसलिए इन लक्षणों को नजरअंदाज न करें और समय रहते डॉक्टर से परामर्श लें।

डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ओपिनियन का विकल्प नहीं है। पाठकों को सलाह दी जाती है कि वे कोई भी दवा, उपचार या नुस्खा अपनी मर्जी से ना आजमाएं। इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है।

Published on:
05 Sept 2026 03:00 pm