Pneumonia symptoms : भारत में अक्सर लोग तालाब और खुले जल में नहाते हैं। अगर पानी स्थिर और गर्म है तो इससे लेजियोनेला बैक्टीरिया (Legionella bacteria) का संकरण हो सकता है। जोकि खतरनाक निमोनिया (Pneumonia) का कारण बन सकता है।
Swimming in lakes pneumonia risk : हाल ही में किए गए एक अध्ययन में यह बात सामने आई है कि शांत जल वाले तालाबों में तैराकी करने से लेजियोनेला बैक्टीरिया (Legionella bacteria) से संक्रमण हो सकता है, जो निमोनिया (Pneumonia) का कारण बन सकता है। इस बैक्टीरिया को लेजियोनेर्स डिजीज भी कहा जाता है। शोधकर्ताओं ने खुले जल में तैराकी करने वाले लोगों को इसके खतरों के प्रति जागरूक रहने की सलाह दी है।
लेगियोनेला बैक्टीरिया एक प्रकार का जीवाणु है, जो शरीर में गंभीर फेफड़ों की सूजन का कारण बनता है। इसके लक्षणों में बुखार, ठंड लगना, थकावट, सीने में दर्द, खांसी, शारीरिक कमजोरी और कभी-कभी दस्त भी हो सकते हैं। इस संक्रमण से बचने के लिए उचित सावधानी रखना बेहद जरूरी है, खासकर उन लोगों के लिए जिनकी प्रतिरक्षा प्रणाली कमजोर है।
शोधकर्ताओं के अनुसार, लेजियोनेला बैक्टीरिया गर्म और स्थिर जल में फलते-फूलते हैं। यह न केवल जलाशयों, बल्कि प्लम्बिंग सिस्टम, एयर कंडीशनरों, सार्वजनिक स्पा और नदियों जैसे जल निकायों में भी पाया जा सकता है। ऐसे जल निकायों में तैरने या पानी में अधिक समय बिताने से यह बैक्टीरिया शरीर में प्रवेश कर सकता है।
इस बैक्टीरियल संक्रमण से खासतौर पर वे लोग प्रभावित हो सकते हैं जिनकी उम्र 50 वर्ष से अधिक है, जो धूम्रपान करते हैं, जिन्हें हृदय या गुर्दे की पुरानी बीमारियां हैं, या जिनकी प्रतिरक्षा प्रणाली कमजोर है। इन लोगों को संक्रमण का खतरा अधिक होता है। इसलिए, ऐसे व्यक्तियों को इस प्रकार के जलाशयों में तैराकी से बचना चाहिए।
लेगियोनेर्स डिजीज के लक्षण आमतौर पर संक्रमण के बाद 2 से 14 दिनों के भीतर प्रकट होते हैं। इसके लक्षणों में बुखार, खांसी, सीने में दर्द, सांस लेने में तकलीफ, और थकान जैसी समस्याएं शामिल हैं। कुछ मामलों में दस्त भी हो सकते हैं। यह बीमारी गंभीर हो सकती है और समय पर इलाज न मिलने पर जीवन के लिए खतरे का कारण बन सकती है।
डॉक्टरों का कहना है कि यदि किसी व्यक्ति में निमोनिया के लक्षण दिखाई दें, जो सामान्य एंटीबायोटिक्स से ठीक नहीं होते हैं, तो लेजियोनेर्स डिजीज की संभावना पर विचार किया जाना चाहिए। खासकर उन मरीजों में जिनका इम्यून सिस्टम कमजोर है या जिनका हाल ही में यात्रा का इतिहास रहा है।
इसके अलावा, जिन मरीजों को सामुदायिक निमोनिया का उपचार होते हुए भी लक्षण में सुधार नहीं होता, उन्हें लेजियोनेर्स डिजीज की जांच करानी चाहिए। विशेष रूप से, जिन लोगों को अस्पताल में भर्ती किया गया हो या जिनके पास अस्पताल से संबंधित निमोनिया हो।
खुले जल में तैराकी करते समय सावधानी रखना अत्यंत महत्वपूर्ण है, खासकर अगर पानी स्थिर और गर्म हो। यह सुनिश्चित करने के लिए कि हम इस तरह की खतरनाक बीमारियों से बच सकें, हमें अपने स्वास्थ्य की देखभाल और संभावित जोखिमों के बारे में पूरी तरह से जागरूक होना चाहिए।
IANS